Tuesday, September 30, 2014

दर्द-भरी-याद

हरजगह तू ही तू होते 
फिर भी तुम दूर होते 
हरवक्त तुम साथ देते 
पर फिर भी दूर होते 

आज श्रीगणेश किया तूने 
मैंने पहले कई बार श्री गणेश किया था
पर हरबार दुःख देखना पड़ा 
इस बार तुम आवाज़ लगा रहे हो 
या मुझे आवाज़ लगाना है 
ये तो बता मेरे-जाने-जाना ! !

अर्ज़ है .....
वक़्त गुज़ारता हूँ - तुझ संग वक़्त पाने को 
पर वो वक़्त कब आएगा-तुझ संग वक़्त बिताने को 

एक बार तो संपर्क में आओ,
दूर से ही सही- पर वक़्त तो बिताओ 

दर्द बहुत होता है - जब नहीं देखता तुझे संपर्क में 
दूर से ही सही - पर आओ तो वक़्त पे संपर्क में 

भरोसा देता हूँ - नहीं करूँगा तंग 
जैसे रखोगे - रह लूंगा संग 
दूर से ही सही - रहो कहोगे - तो दूर ही रहूँगा 
पर संपर्क में आओ तो - दर्द नहीं लगता सह पाउँगा 

अभी अचानक - तेरी बहुत-बहुत याद आई  
दिल में दर्द उठा - और तुझे लिखने की बात हो आई 
तू नहीं हो पास में - सचमुच तेरी याद आई 
अब तो आजा संपर्क में - तेरी बहुत याद है आई 

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