Thursday, November 17, 2016

ये साँस टिकी है तुम पर

अर्ज़ है ...

करते ही क्यों हो ब्रेक-अप
दुनिया ही है विनाश के कगार पर
कुछ वर्ष तो जी लो मिलकर
हम अपना जान छिड़कते हैं तुम पर

तेरे आँखों में बसकर
हम जीना चाहते हैं
उन नयनों में खोकर
हम बसना चाहते हैं

कुछ पल तो जी लो मिलकर
हम प्यार लुटाते तुम पर
तुझसे मिलने की चाहत में
हम खड़े हैं जीवन के चौराहे पर

अगर तुम ना पढ़ते
मेरे दर्दों को समझते
नहीं कभी मैं लिखता
यूँ घुट घुट कर ना मरते

इस जीवन में साथ रह लो
ना छोडो यूँ दोराहे पर
तेरे मुस्कुराहट में जी लूँ
ये आस टिकी है तुम पर



Monday, November 14, 2016

प्यार क्या होता है - प्यार वो होता है

नजरों से बाँध लूँ तुझको
प्यार वो होता है
तू पल में हो जाय मेरी
प्यार वो होता है

तुझे देखते ही भा जाय
प्यार वो होता है
तू मुस्कराकर इंकार करे
प्यार वो होता है

तेरे नयनों में समां जाऊँ
प्यार वो होता है
तू समाने में आनाकानी करे
प्यार वो होता है

दूर रहकर भी तू तड़पाये
प्यार वो होता है
चैन से तू ना रहने दे
प्यार वो होता है

तुझे लिपट लिपट कर चाहूँ
प्यार वो होता है
तेरे इर्द गिर्द घूमता जाऊँ
प्यार वो होता है

पलकों के आँसू गिरने ना दे
प्यार वो होता है
बार बार आँसू गिराकर प्यार पाऊँ
प्यार वो होता है

तेरे चाहने में कमी नहीं कर पाऊँ
प्यार वो होता है
मैं इतना ही चाहा तुझे,ये कहकर तू रूठ जाय
प्यार वो होता है


Sunday, November 13, 2016

पल पल तरसते रहे

चन्द छन्द महसूस के .. एक गजल ..

तेरे संग गुजारने को कुछ पल

हर पल हम तरसते रहे 
तुम किस किस के साथ रहकर
हर पल गुजार चलते रहे 

छुआ भी नहीं तुम्हें हम कभी

पर हर पल तुझे छूते रहे
मंदिर हो या हो मनमंदिर
हर जगह तुझे पूजते रहे 

तेरे संग ...


देख देख तरसता रहा मैं 

अकेले में आँसू बहाते रहे 
एक पल को देख लूँ जी भर
हर पल को हम तरसते रहे 

तेरे संग ...


मौका तो देते एक पल ही सही

हर वक्त मुझसे भागते रहे
हर पल दिल ने अल्फ़ाज़ उठाई
मगर हमेशा तुम कतराते रहे

तेरे संग ...


Thursday, November 10, 2016

एक मँगनी क्या, चाहे तू दस दस कर ले

अर्ज़ है .. एक गीत .. दुनिया के हालात पर

डेट पर चल एक दिन ही सही
मेरी मुराद पूरी कर दे
फिर कब मिले ना मिले इस जिंदगी में
मेरी मुराद तो पूरी कर दे

देखते ही तुझे दिल से दीखता
अर्ज़ करने को दिल महसूसता
बोल आ कर लबों पर
तेरे नयनों से हाँ की इंतज़ार करता

कर दे मुराद पूरी मेरी
मेरी मुराद तो पूरी कर दे
फिर मिले ना मिले इस जिंदगी में
अगली जिंदगी की तारीख मुकर्रर कर दे

आज तक मैं बोल नहीं पाया किसी से
आई लव यू
बिन तेरे बोले कैसे बोल पाउँगा
तड़पता हूँ मैं तेरे लिये,कैसे रह पाउँगा

डेट पर चल एक दिन ही सही..

एक मँगनी क्या, चाहे तू दस दस कर ले
तेरे लिए जो प्रेम की आग है
वो आग कभी खत्म ना होगी समझ ले
मुझ तड़पते इंसान को थोड़ा तो जिन्दा कर ले

डेट पर चल एक दिन ही सही
सबकुछ ठीक हो जाएगा
कभी पीछे ना हटूँगा
तेरे हाँ से ही मैं चल पाउँगा

कुछ नहीं है इस जिंदगी में
ये धरती युहीं चलती रहेगी
कभी ट्रम्प कभी मोदी
जिसे जो करनी है करती रहेगी

डेट पर चल एक दिन के लिए सही
सब कुछ ठीक हो जाएगा
मेरी मुराद को पूरा कर दे
ये अर्ज़ हमेशा तुझसे करता रहेगा

☺☺😊😢🎂💐










Monday, November 7, 2016

मृगनयनी से लगन

बना लो मुझे गुलाम तेरी गुलामी करूँगा
थोड़ा बहुत तुझसे नमकहरामी करूँगा
तुम मुझे  सिखाना नमकहलाली करना
पर मैं कुछ ना सीखकर दिल्लगी करूँगा 

बना लो मुझे गुलाम...

तेरे देहरी पर रहकर गुलामी करूँगा
देख देख तुझको आहें भरूँगा
आँख मार मार कर रिझाया करूँगा
अपनी लगन की बात तुझसे  करूँगा

बना लो मुझे गुलाम...

तेरे झूठे गुस्से पर डरता रहूँगा
आगोश में ले कर कहता रहूँगा
ठंड की सी सी में सटता रहूँगा
तेरे गर्म साँसों में आहें भरूँगा

बना लो मुझे गुलाम...

देख देख कर तुझे तड़पता रहूँगा
तेरे नखरे पर फ़िदा होता रहूँगा
जुल्फों के झटके से उड़ता रहूँगा
गुदगुदी लगाकर पकड़ता रहूँगा

बना लो मुझे गुलाम...

लगन कर के मुझसे अग्न जला लो
ठंढी सिगड़ी जलाकर बीड़ी फूँक लो
मैं नहीं जानता कि तुम रूठी हुई हो 
हमारी यारी में लगन कर मगन हो लो 

बना लो मुझे गुलाम...

Saturday, October 29, 2016

तोड़ दिए तूने प्रीत के सपने

तोड़ दिए तूने प्रीत के सपने
बुनने लगे तुम अपने ही सपने
कैसे कैसे मैंने दिन थे बिताये
सोचा था तुम सच करोगे सपने

सामने रहकर भी दूर दूर से रहे
हर रोज तेरे लिए तरसते ही रहे
इतनी बेरुखी हमसे तूने दिखाई
छोड़ तुम चले,हम तड़पते ही रहे

मिलते ही तो क्या तेरा कम हो जाता
तेरे अंदर का प्यार क्या मैं छीन लेता
इतना लिख के भी जब नहीं समझे
सामने से बोलकर क्या प्यार मिलता

तुम भी दिखे जमाने सा बेदर्द होकर
महसूस ना किये रूह को समझकर
हम रोज इन्तजार में तड़पते ही रहे
तुम कैसे थे यार,तोड़ दिए तड़पाकर





Saturday, October 8, 2016

जीवन के खेल निराले

किसी ने सवाल उठाया, वो ऐसे जीता है,
 वो ऐसे करता है
नहीं करना चाहिए, क्या क्या करना चाहिए ..

मेरा विचार ..

अर्ज़ है ..

विपदा इस संसार में भांति भांति के हैं असंतोष
जिसको जैसी होती करनी वे पाते उसी में संतोष

कोई नहीं अच्छा कोई नहीं खराब 
सब जी लेते हैं एक हक़ से जनाब

जब आते हैं हम जीवन में, किसी तरह भी जी लीजिये
गोल-गोल रोटी को किधर से भी खाने का शुरू कीजिये 

किसी का भी जीवन अच्छाई से नहीं भरा है
दिल टटोलने पर असन्तोष दिख ही जाता है

जीना ही अच्छा है, मर तो हम कभी भी लेंगे 
मरने के बाद का क्या सचमुच हम जान लेंगे 

अगर जान ले मरने का मर्म इस जीवन में
फिर चैन से काम करेंगे जो भी है जीवन में

कोई मुँह फुलाकर बैठे तो उसपर हंसी ही आएगी
कैसे तड़प कर जी रहे हैं फिर भी चेहरे मुस्कुराएगी 

धन्यवाद

Saturday, September 24, 2016

कैंची ना चलाओ मेरे प्रेम पर

इस पोस्ट पर एक शेर है ..

कितना भी कैंची चलाओ
पर परखो कैंची कैसे जुड़ी रहती है 
दिल चीज ही है ऐसी
यदि मिल जाय दिल सा,उलझी रहती है :)

कितना भी काटो मुझे
तुझसे कट नहीं पाउँगा
जन्म जन्म का है रिश्ता
तुझसे जड़ से जुड़ा रहूँगा 

भले तुम दूर रहो
रहो तुम अपनी दुनिया में 
तुम्हें पास रखने से
हरा भरा फ़ैल जाता मेरी दुनिया में 

तुम मुझसे दूर हो 
ये तेरे लिए हो सकता है 
पर मैं कितना दूर हूँ तुमसे,
कोई भी समझ सकता है 

याद कर के तुझे
अश्रु के कुछ बून्द बहा लेता हूँ
तुमसे दुरी के जख्म पर
लहू का बारिश बरसा लेता हूँ 

चेहरे किताब से तुम दूर हो 
देखने को दिल तरस जाता है 
तुम कहते पीछा करते हो
बस लिख के तस्सली करता है 

सोचो जरा तुम एक पल को
कि क्या मैं तुम्हें दूर कर पाया हूँ 
मैं मानव मशीन नहीं आज सा
रूह की परख से करीब लाया हूँ 

नहीं चाहिए तेरा तन-बदन
तुम ये बदन किसी को दे दो
तुम हो रूह,बस आये हो इस देह में 
अपने रूह को मेरे रूह से मिलने दो 

तुम्हें अपनाने के लिए
मुझे तनिक भी देर नहीं लगेगा
जब शरीर रहूँगा छोड़ता भी
ये चाह उस अंत समय में भी रहेगा 

तुमसे प्यार करके सही कहूँ 
ये जीवन मेरा धन्य हो गया
ये तो अच्छा है 
तुमसे पहले रूह का भान था हो गया
वरना तुम हमेशा कहते 
तेरे खूबसूरती पर मैं फिसल गया

कृष्ण कैसे रह गया,राधा के बिना
राधा कैसे रह गयी,कृष्ण के बिना
दुनिया नहीं समझती,पर मैं जानता
कि कैसे रह गए एक दूसरे के बिना



Tuesday, September 20, 2016

हादसों का शहर

तेरा शहर है तेरी तरह हादसों का शहर                  ;)
लूट लिया मुझको सरेआम कुछ तेरी तरह            ;)

ये तुम्हें कैसे कहे आज 
कि तुम नजर का एक धोखा थे 
कि तेरे नजर बहुत रूखे थे 
कि नजरों से तुम बात नहीं करते थे 

तेरा नजर है तेरी तरह फरेबों का नजर 
लूट रहा मुझको रोज दीमक की तरह 
तेरा शहर है तेरी तरह हादसों का शहर 
लूट रहा मुझे सरेआम कुछ तेरी तरह 

मेरे शहर में होकर भी 
दूर दूर से तरसाते रहते 
आसमाँ से बरसते पानी 
फिर भी प्यास नहीं बुझते 

तेरा शहर है तेरी तरह हादसों का शहर 
लूट लिया मुझको सरेआम कुछ तेरी तरह 

अनायास आज आया तेरा नाम बोलते बोलते

अनायास आज आया तेरा नाम 
बोलते बोलते 
मुस्कुरा उठा मेरा तन्हा दिल 
बोलते बोलते 

तेरे आँखों की सुरमई यादें बिखर गई 
तुमसे रुखसत का वो पल फ़ैल गई 
तुम देखते हुए चल देते हो बिन कहे 
तेरी चाल मेरे आँखों में चमक गई 

कैसे बातों को घुमाया सबसे 
देखते देखते 
मैं रह गया भौंचक्का लोगों को 
देखते देखते 
अनायास आज आया तेरा नाम 
बोलते बोलते

घूमने गया था मैं तेरे शहर में 
तेरा शहर फीका लगा तेरे बिना 
खोज रही थी निगाहें तुम्हें 
चैन ना आया एक पल तेरे बिना 

कैसे कैसे वक्त बिताया मैं 
रोते रोते 
मायूषी में तन्हा महसूसा
चलते चलते 
अनायास आज आया तेरा नाम 
बोलते बोलते

मुस्कराहट के झुरमुट में छुपा लेता हूँ 
तुम एक याद हो नहीं समझा पाता हूँ 
चलते वक्त के साये में मैं चल लेता हूँ 
क्यों तुम दूर किये नहीं समझ पाता हूँ 

तुम तो रह लेते हो 
हँसते हँसते 
खोज लेते हो नए दोस्त 
उड़ते उड़ते 
अनायास आज आया तेरा नाम 
बोलते बोलते 




Friday, September 9, 2016

Human care Human

Beautiful clip...

True men always care women
True human always care Human 
True women always care men
True individual always care Individuals

This is our earth, 
This is our society
Come forward and 
Helps who is needy

You do not know at which location
Someone will be standing for help
Keep feelings in your heart always
And open your wings to help & help

Life is nothing but a simple river
Who knows just to flow and move
The same Life lives in all humans  
Who knows simply to care and live

O' Humans, O' Learned, O' Intellectuals
Come forward and lead life humanly 
History is showing us to care others
And live life together happily and evenly 



https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=323740601303947&id=265706157107392

कुछ वक्त पर

अर्ज़ है ... कुछ वक्त पर

किन्हें फुर्सत है पीछा करने की
तुझे फुर्सत ही नहीं सुनने की

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फुर्सत ही फुर्सत में ऐसा लगता 
फसल लगाई है मैंने फुर्सत की


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तुम आ भी जाओ कुछ वक्त लेकर
या मुझे बुला लो कुछ वक्त देकर

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वक्त ही वक्त है देने को तेरे लिए
क्योंकि जिन्दा हूँ बस तुझे देखकर

------

कोई चाहत नहीं, होती भी तो मिट जाती
बस तुझमें खो जाऊँ,हरवक्त दिल चाहती

------

तेरे संग रहने की कल्पना कर मुस्कुरा लेता हूँ कुछ वक्त

वरना इतना भाग्य कहाँ कि मैं पा लूँ और रह लूँ हरवक्त




Saturday, September 3, 2016

दिल और आँख

दिल और आँख पर कुछ विचार ..

कितना क्रूर वक्तव्य है जब कोई नहीं देख पाता
बस अनुभव से छूता, अंदर ही अंदर बात करता

दिल से दिल में समझता,दिल से दिल को समझाता
दिल ही दिल में बात करता, दिल ही दिल से सुनता 

कोई जरूरी नहीं कि 
जिसकी आँखे नहीं है वह ही ऐसा करता
ये भी कोई जरूरी नहीं कि
जिसकी आँखे हैं वह ऐसा नहीं करता

कोई अपने प्रियवर  की याद, अपने  दिल में ही तो करता
आँखे होकर भी क्या फर्क पड़ता, बस दिल से याद करता

ये दिल भी क्या चीज है, आँखे का काम करता
कोई दूर है इस आँख से, पर दूर नहीं रहने देता

ये आँखे भी क्या चीज है,दिलवर को नहीं देखता
फिर आँसू बहाता और दिल की आँखों से देखता

कितनी अभूतपूर्व बाते घटती पर कोई अनुभव नहीं कर पाता
आँख से आँसू बहाता,फिर उसे पोछता,फिर कर्म में लग जाता

दिल से उस दिल को देखने को दिल पर छोड़ देता
दिल ही दिल में बातकर दिल में  सन्तोष कर लेता 




Tuesday, August 23, 2016

उसने समझा मेरा कोई वजूद नहीं

क्या तुझे कोई सवाल नहीं है 
कुछ बात करते रहने का
क्या सारी बातें मेरी ही है 
तुझसे बात करते रहने का

कयामत का धैर्य है तुझमें
सामने रहकर भी चुप रह जाते
जब तुम रहते हो सामने 
मुझसे चुप नहीं रहे जाते 

कुछ तो हौसला दो
बात शुरू करने का
कोई अनुभव नहीं है 
मुझे शुरुआत करने का

चलो शुरुआत कुछ बात का
आज शाम में हमने कर दिया
अब ये दोष नहीं देना मुझे 
कि मैंने बात शुरू नहीं किया 

एक बात बोलूँ- तुम ऐसे ही चले आओ
और चल पड़ते हैं हमदोनों सफर पर
पूछूँगा भी नहीं किसी से या तुमसे 
कि जाना है किधर,बस होगा एक सफर

**************
बिन कहे कुछ तुम ऐसे चले गए
जैसे कि मेरा कुछ वजूद ही नहीं 
हंसी आती है, पर कोई गुस्सा नहीं 
क्योंकि रूह से प्यार है तन से नहीं

ऐसा नहीं कि तुझे कम आँकता हूँ
ऐसा भी नहीं कि मुझमें कमी है 
ऐसा महसूसता हूँ मैं तुझमे निहित हूँ
जन्मों जन्मों से तेरे इन्तजार में हूँ 

भले तुम हँसकर टाल दो-महसूस को
भले तुम तव्वजो नहीं दो इस प्यार को
मगर मुझे कोई इसमें हँसी नहीं दीखता
और हरवक्त तव्वजो देता इस चाह को 

मुझे संज्ञान है पर रावण सा नहीं है
मुझे ध्यान है पर दुर्योधन सा नहीं है
पूर्ण सन्तुलन में हूँ और अधीर भी नहीं
प्रकृति के सब रंग की मुझे पहचान है 

बिना इज्जत के तो मैं खाता भी नहीं
बिना इजाजत के छु दूँ ऐसा भी नहीं
प्यार करके मरता जरूर हूँ तुझ पर
मगर कोई जिल्लत सहूँ, ऐसा भी नहीं 

हमने पहचाना है रूह की शख्सियत 
इस शरीर का तो कोई मोल ही नहीं 
तुम समझते रहो- खोते रहो मौज में 
मेरा दौर कही और है,पर मौज में नहीं 

Sunday, August 21, 2016

क्यों हम मानव उड़ना चाहते

क्यों हम मानव उड़ना चाहते
क्यों हम कोशिश करते रहते
क्यों हम उड़ने की चाह रखते
और बार बार हम उड़ते रहते

ये सोच नहीं एक सच्चाई है
हम कैद होते भावनाओं में
भावना हमेशा उड़कर आती
हमें भी उड़ाती अपने संग में

उड़कर जाना चाहते उनके पास
जो नहीं होते हैं हमारे आस-पास
उड़ा कर उसे लेकर जाना चाहते
उन्हें  रखना चाहते दिल के पास

क्या रखा है इस दुनिया में, क्या है जीवन में
एक पल या पल पल हम रह लें उसके साथ
क्यों रहे हम उससे दूर,क्यों ना रहे हम पास में
यही आशा उड़ाती हमें अपने भावना के साथ

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=10207126594347755&id=1368734241

Saturday, August 13, 2016

राधे तेरे याद में



इसे कविता कहूँ, शेर कहूँ, दोहा कहूँ या दिल से उपजा भाव कहूँ..

मत देख ऐसे राधे झांकते हुए
तेरे याद में हूँ खोया,बजाते हुए
बाँसुरी की धुन को सजाते हुए
तेरे याद में तुझमें लहराते हुए 

राधे तेरी नटखटपन पे स्नेह आता है 
तुमसे दूर रहकर भी मन मुस्कुराता है 
तेरे मधुर मुस्कराहट में खो जाता है 
उस मृग्नयनी आँखों में डूब जाता है 

बाँसुरी से धुन बजने लगता है 
दिल में लहर उठने लगता है 
सूने मन में तरंग छाने लगता है 
तू ना होकर भी सामने लगता है 

राधे तेरे नटखटपन पे नेह आ जाता है
मधुर मधुर किलकारी गूँजने लगता है 
तेरा चुलबुला चाल थिरकने लगता है 
नयनों में नयना डाल कहने लगता है 

तू दूर है पर दिल से दूर नहीं
तू जहाँ भी है पर यहाँ भी है 
तू खुश रह, कामना करता है 
मुस्कुराते रह,इक्छा करता है 



Saturday, August 6, 2016

बूँद बूँद

इसी बूँद बूँद से 
जिंदगी है चलता
इसी बूँद बूँद से
प्यास है बुझता
इसी बूँद बूँद से
जीवन तड़पता
यही बूँद बूँद तो
मज़ा भी देता
बूँद बूँद से ही
घड़ा भी भरता
इसी बूँद बूँद से
सागर भी बनता
इसी बूँदो में
मिठास भी होता
इसी बूँद में भी
कोई जहर पिरोता
इसी एक बूँद में
अमृत भी होता
यही एक बूँद
आँख को भर देता
यही बूँद कभी
चेहरा भी चमकाता
इसी बूँद से कभी
पसीना भी झलकता
यही बूँद बारिस बन
खेंतो को सींचता
कभी जुल्फों में आकर
गोरी को उलझाता
कपड़ों को भिंगाकर
कपकपी भी देता
क्या है ये बूँद
कितना अजूबा होता
जब उनकी याद
आँखों से लरजता
तब यादों के फूल बन
दिल में है बसता
कभी मुस्कुराता
कभी खिलखिलाता
बारिस के मौसम में
बूँद बूँद है बरसता
💦💧💧💦

मत मायुष् हो वो नादान आँसू

मत मायुष् हो वो नादान आँसू
छलककर गिर पड़ते हो तनिक दुःख देखकर
कभी उन मृग्नयन को तो देखो
जो याद में ही तृप्त कर देते हैं मुस्कुराकर

आज भी बीतते हैं यादों में तेरे
संग संग बिताये एक एक पल
तुम जब होगे साथ, हरवक्त सोचता,
कितने सुहाने होंगे वो पल

मैं ही डर जाता कि
पता नहीं की तू फिर कहीं ना पिन चुभोये
बड़ी मुश्किल से
सम्भल पाया था मैं जब वो तूफ़ान थे आये

गलती किसकी किसका दोष
मैं दुनिया के नजर से ना देखता
मैं तो था डुबा तेरे प्यार में सनम
इतना ही मैं हूँ जानता मैं मानता

तुम हो रूठे तुम हो गुस्सा
इसका पता ही नहीं चलता
तू अगर अवसर देते रहने का
तेरा हर छन्द तब पता चलता

तेरे नखरे बहुत अच्छे होते हैं
तेरे तेवर सचमुच तीखे होते हैं
आशाएं मुझे हौसले देते रहते है
तेरे संग मुस्कुराउँ,सपने देखते हैं

अर्ज़ है ..
तेरा मुझसे रुठने का कुछ ही वक्त अभी गुजरा है
कोई बात नहीं, हमारी दोस्ती लम्बी चलने वाली है



Wednesday, August 3, 2016

तुम जो ऐसे चुप रहती हो

तुम जो ऐसे चुप रहती हो 
कारण बताओ क्यों चुप हो 
तुम जो ऐसे रूठी रहती हो 
कारण बताओ क्यों रूठी हो 

दुनिया से तुम बोलती हो 
हम से तुम क्यों नहीं बोलती 
हर के साथ तुम हंसती हो 
हम से तुम क्यों नहीं हंसती 

तुम जो ऐसे चुप रहती हो 
कारण बताओ क्यों चुप हो ...

तुम एक कारण बता दो हमें 
कि हम तुमसे प्यार करे क्यों नहीं 
इतना गुनाह है प्यार क्या 
ये बतलाते तुम क्यों नहीं 

तुम जो ऐसे चुप रहती हो 
कारण बताओ क्यों चुप हो ...

तुम्हे नहीं पता हम कैसे रह जाते 
तड़पते बिलखते रोते हुए 
ऐसा तुझसे मैं क्या ले लूंगा 
जो यूँ छोड़ देते रोते हुए 

तुम जो ऐसे चुप रहती हो 
कारण बताओ क्यों चुप हो ...

क्या ऐसा नहीं हो सकता 
कि नदी सा मिल जाय राह में हम 
क्या ऐसा नहीं हो सकता 
कि हम बात करे जैसे भूले नहीं हम 

नहीं कुछ तेरा हानि होगा 
बस तुम हमसे बात करो 
तेरा चेहरा लब सब बोलता है 
कभी तो हमसे भी सुना करो 

तुम जो ऐसे चुप रहती हो 
कारण बताओ क्यों चुप हो ...

एक शेर...
जब भी उनसे बात करने को दिल चाहता 
ये दिल उनसे कुछ बात कर लेता 
जब भी मिलने कि तड़प सताने लगता 

आँखों से दो-चार बून्द टपका देता 


Tuesday, August 2, 2016

रजनीगन्धा फूल हो तुम

रजनीगन्धा फूल हो तुम 

तुम कयामत की खूबसूरत हो
खुदा ऐसे ही तुझे खूबसूरत रखे
उससे तो अच्छा तेरे रूह है
जो तुझमें रहकर चमकाकर रखे 

तेरा भींगा बदन तेरा भींगा बाल
मदमस्त कर रहा है माहौल को
ऐ बला की खूबसूरत मृगनयनी
अपने नयनों से देख लो हमको 

तुम पूछो भी कभी हमसे 
तुम हमें कितने हसीन लगते 
हरवक्त खुदा से मैं कहता 
कि मुझे तेरे साथ हमेशा रखते 

आज पता चला-कैसे मूर्तिकार 
किसी मॉडल को देख मूर्ति बनाता है 
सच खुदा ने बख्सा ये अवसर
तुझे देखकर प्यारे शब्द उकेरता है 

दिल होता है तुझे उठाऊँ 
उन हसीन पलकों को छूकर
क्या तुम अवसर दोगे  मुझे 
यूँही लबों को मुस्कुराकर 

ऐ जो तुम शरमाकर दूर हो जाते हो
कसम से तुम बहुत हसीन लगते हो
ऐसे तो कितने रंगीनियाँ भड़े पड़े हैं
खुदा से कहता बस तुम नाजनीन हो

Monday, August 1, 2016

ऐ दिल तुझे सखी कहूँ

ऐ दिल तुम्हें चाहूँ ऐसे 
कि मैं तुझे सखी कहूँ 
मत रह दूर तुम हमसे
कि मैं इसे बेरुखी कहूँ 

इतना तुम्हें चाहूँ तुझे
कि ऐ दिल तुझे अपना कहूँ
मत दूर हो तुम ऐसे हमसे
हरवक्त तुमसे कहता रहूँ 

ऐ दिल तुम्हें चाहूँ ऐसे 
कि मैं तुझे सखी कहूँ .......

कैसे कहूँ कि तुम हो कितने
सलोने भी अपने भी 
मेरा दिल तड़पता रहता है
जानते भी मानते भी

फिर क्यों दूर हो तुम हमसे
बताओ भी जताओ भी
कि अब दिल मेरा लगता नहीं
समझो भी समझाओ भी

ऐ दिल तुम्हें ऐसे चाहूँ 
कि मैं तुम्हें सखी कहूँ ........

पता है तुम्हें क्या प्रभु शंकर ने
कहा था माँ सती से ऐसे ही 
कि मत ले परीक्षा तू प्रभु राम का 
जब वो सिया को वन में ढूंढे कहीं 

मगर माँ सती नहीं मानी
और चुपके से सिया बन बैठी कहीं 
वन में भटकते जब राम ने देखा-पूछा
माँ संग में प्रभु शंकर दिख रहे नहीं 

माँ सती ऐसे सकुचाई 
कि घबराकर अन्तर्ध्यान हो गई वहीं 
लड़खड़ाते हुए कैलाश पहुंची
और ऐसे जताई जैसे कुछ हुआ हो नहीं

लेकिन ये भगवान शंकर हैं
जिनसे कुछ भी छुपता नहीं 
ध्यान लगाकर जब वे देखे 
ये क्या किया सती-बोल पड़े वहीँ 

माँ सिया का तू रूप लेकर
अब कैसे तुम्हें मानु प्रिय सती
मेरी सती जो बस अपनी है 
कैसे पाऊँ किसी और में सती

वैराग्य छा गया शंकर में 
नहीं चाहा कोई रंग-राग भी
इतना चला ये कहानी 
कि सती को त्यागना पड़ा शरीर भी

फिर लेकर पुनर्जन्म सती आई 
हिमालय राजा के घर पार्वती बनकर
तपस्या की खूब घनघोर 
तब कहीं जाकर मिली पार्वती को शंकर 

तबतक इन्तजार में रहे शंकर
प्रेम में विह्वल सती के लिए 
हे प्राणप्रिय हे सखीप्रिय 
शंकर है बस पार्वती तेरे लिए 

कितनी अच्छी है यह घटना
जन्म जन्म से चल रही 
शंकर संग पार्वती की सुधि
प्रेम प्यार में घुलती रही

आओ तुम सती सा बनकर
आओ भी पार्वती सा बनकर
जन्म जन्म से खोज रहा
मैं तुझे शंकर सा बनकर 

ऐ दिल तुम्हें चाहूँ ऐसे 
कि मैं तुझे हमेशा सखी कहूँ 
मत रह दूर तुम हमसे
कि मैं इसे तेरा बेरुखी कहूँ