Saturday, September 24, 2016

कैंची ना चलाओ मेरे प्रेम पर

इस पोस्ट पर एक शेर है ..

कितना भी कैंची चलाओ
पर परखो कैंची कैसे जुड़ी रहती है 
दिल चीज ही है ऐसी
यदि मिल जाय दिल सा,उलझी रहती है :)

कितना भी काटो मुझे
तुझसे कट नहीं पाउँगा
जन्म जन्म का है रिश्ता
तुझसे जड़ से जुड़ा रहूँगा 

भले तुम दूर रहो
रहो तुम अपनी दुनिया में 
तुम्हें पास रखने से
हरा भरा फ़ैल जाता मेरी दुनिया में 

तुम मुझसे दूर हो 
ये तेरे लिए हो सकता है 
पर मैं कितना दूर हूँ तुमसे,
कोई भी समझ सकता है 

याद कर के तुझे
अश्रु के कुछ बून्द बहा लेता हूँ
तुमसे दुरी के जख्म पर
लहू का बारिश बरसा लेता हूँ 

चेहरे किताब से तुम दूर हो 
देखने को दिल तरस जाता है 
तुम कहते पीछा करते हो
बस लिख के तस्सली करता है 

सोचो जरा तुम एक पल को
कि क्या मैं तुम्हें दूर कर पाया हूँ 
मैं मानव मशीन नहीं आज सा
रूह की परख से करीब लाया हूँ 

नहीं चाहिए तेरा तन-बदन
तुम ये बदन किसी को दे दो
तुम हो रूह,बस आये हो इस देह में 
अपने रूह को मेरे रूह से मिलने दो 

तुम्हें अपनाने के लिए
मुझे तनिक भी देर नहीं लगेगा
जब शरीर रहूँगा छोड़ता भी
ये चाह उस अंत समय में भी रहेगा 

तुमसे प्यार करके सही कहूँ 
ये जीवन मेरा धन्य हो गया
ये तो अच्छा है 
तुमसे पहले रूह का भान था हो गया
वरना तुम हमेशा कहते 
तेरे खूबसूरती पर मैं फिसल गया

कृष्ण कैसे रह गया,राधा के बिना
राधा कैसे रह गयी,कृष्ण के बिना
दुनिया नहीं समझती,पर मैं जानता
कि कैसे रह गए एक दूसरे के बिना



Tuesday, September 20, 2016

हादसों का शहर

तेरा शहर है तेरी तरह हादसों का शहर                  ;)
लूट लिया मुझको सरेआम कुछ तेरी तरह            ;)

ये तुम्हें कैसे कहे आज 
कि तुम नजर का एक धोखा थे 
कि तेरे नजर बहुत रूखे थे 
कि नजरों से तुम बात नहीं करते थे 

तेरा नजर है तेरी तरह फरेबों का नजर 
लूट रहा मुझको रोज दीमक की तरह 
तेरा शहर है तेरी तरह हादसों का शहर 
लूट रहा मुझे सरेआम कुछ तेरी तरह 

मेरे शहर में होकर भी 
दूर दूर से तरसाते रहते 
आसमाँ से बरसते पानी 
फिर भी प्यास नहीं बुझते 

तेरा शहर है तेरी तरह हादसों का शहर 
लूट लिया मुझको सरेआम कुछ तेरी तरह 

अनायास आज आया तेरा नाम बोलते बोलते

अनायास आज आया तेरा नाम 
बोलते बोलते 
मुस्कुरा उठा मेरा तन्हा दिल 
बोलते बोलते 

तेरे आँखों की सुरमई यादें बिखर गई 
तुमसे रुखसत का वो पल फ़ैल गई 
तुम देखते हुए चल देते हो बिन कहे 
तेरी चाल मेरे आँखों में चमक गई 

कैसे बातों को घुमाया सबसे 
देखते देखते 
मैं रह गया भौंचक्का लोगों को 
देखते देखते 
अनायास आज आया तेरा नाम 
बोलते बोलते

घूमने गया था मैं तेरे शहर में 
तेरा शहर फीका लगा तेरे बिना 
खोज रही थी निगाहें तुम्हें 
चैन ना आया एक पल तेरे बिना 

कैसे कैसे वक्त बिताया मैं 
रोते रोते 
मायूषी में तन्हा महसूसा
चलते चलते 
अनायास आज आया तेरा नाम 
बोलते बोलते

मुस्कराहट के झुरमुट में छुपा लेता हूँ 
तुम एक याद हो नहीं समझा पाता हूँ 
चलते वक्त के साये में मैं चल लेता हूँ 
क्यों तुम दूर किये नहीं समझ पाता हूँ 

तुम तो रह लेते हो 
हँसते हँसते 
खोज लेते हो नए दोस्त 
उड़ते उड़ते 
अनायास आज आया तेरा नाम 
बोलते बोलते 




Friday, September 9, 2016

Human care Human

Beautiful clip...

True men always care women
True human always care Human 
True women always care men
True individual always care Individuals

This is our earth, 
This is our society
Come forward and 
Helps who is needy

You do not know at which location
Someone will be standing for help
Keep feelings in your heart always
And open your wings to help & help

Life is nothing but a simple river
Who knows just to flow and move
The same Life lives in all humans  
Who knows simply to care and live

O' Humans, O' Learned, O' Intellectuals
Come forward and lead life humanly 
History is showing us to care others
And live life together happily and evenly 



https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=323740601303947&id=265706157107392

कुछ वक्त पर

अर्ज़ है ... कुछ वक्त पर

किन्हें फुर्सत है पीछा करने की
तुझे फुर्सत ही नहीं सुनने की

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फुर्सत ही फुर्सत में ऐसा लगता 
फसल लगाई है मैंने फुर्सत की


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तुम आ भी जाओ कुछ वक्त लेकर
या मुझे बुला लो कुछ वक्त देकर

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वक्त ही वक्त है देने को तेरे लिए
क्योंकि जिन्दा हूँ बस तुझे देखकर

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कोई चाहत नहीं, होती भी तो मिट जाती
बस तुझमें खो जाऊँ,हरवक्त दिल चाहती

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तेरे संग रहने की कल्पना कर मुस्कुरा लेता हूँ कुछ वक्त

वरना इतना भाग्य कहाँ कि मैं पा लूँ और रह लूँ हरवक्त




Saturday, September 3, 2016

दिल और आँख

दिल और आँख पर कुछ विचार ..

कितना क्रूर वक्तव्य है जब कोई नहीं देख पाता
बस अनुभव से छूता, अंदर ही अंदर बात करता

दिल से दिल में समझता,दिल से दिल को समझाता
दिल ही दिल में बात करता, दिल ही दिल से सुनता 

कोई जरूरी नहीं कि 
जिसकी आँखे नहीं है वह ही ऐसा करता
ये भी कोई जरूरी नहीं कि
जिसकी आँखे हैं वह ऐसा नहीं करता

कोई अपने प्रियवर  की याद, अपने  दिल में ही तो करता
आँखे होकर भी क्या फर्क पड़ता, बस दिल से याद करता

ये दिल भी क्या चीज है, आँखे का काम करता
कोई दूर है इस आँख से, पर दूर नहीं रहने देता

ये आँखे भी क्या चीज है,दिलवर को नहीं देखता
फिर आँसू बहाता और दिल की आँखों से देखता

कितनी अभूतपूर्व बाते घटती पर कोई अनुभव नहीं कर पाता
आँख से आँसू बहाता,फिर उसे पोछता,फिर कर्म में लग जाता

दिल से उस दिल को देखने को दिल पर छोड़ देता
दिल ही दिल में बातकर दिल में  सन्तोष कर लेता