Saturday, January 30, 2016

भक्त के अखाड़े में भगवान

भक्ति किसे करना चाहिए
अब भक्त बता रहे हैं
मैं ही एक अच्छा भक्त हूँ
अब भक्त बता रहे हैं

छीन ली है भक्त ने भगवान से
भक्ति करने का अधिकार
भगवान भी चुप हो गए
सोच रहे-भक्त का क्यों करे प्रतिकार

कितनी अनुपम भक्ति होती है
जब भी भक्ति हम करते
यही सोचते - यही समझते
हम ही अनुपम भक्त हैं ऐसा जानते

दूसरे भी मानव हैं भक्ति करने को
ऐसा हम मानव भूल जाते
तब ही ऐसे गड़बड़ माहौल बनते
मानव लड़ते-झगड़ते-हिस्सा खोजते

अरे भगवान कोई चीज़ नहीं
वह उन्मुक्त है - सर्वोपरि है - अनुपम है
तुम भले बंध जाओ उससे
वह नहीं बंधता है क्योंकि वह सबका है

सम्भलो ओ इंसान,ऐसे मत बनो खुदगर्ज़
भगवान सबका है- सबको करने दो अर्ज़
:)

Wednesday, January 20, 2016

चन्द छंद नजर पर

चन्द छंद नजर पर...

गुस्ताखी तो मुझसे होगी ही
जब भी तुम होगे महसूस में 
चाहे यादों में या सपनो में
या सामने या फिर कब्र में 

कैसे देखूँ तुझे दोस्त के नज़र से 
तुम्हीं क्यों नहीं दोस्त बन जाते 
दिल करता है देखूँ तुझे नज़र भर
तुम्हीं क्यों नहीं नज़र आ जाते

तुझे नजर भर देख लूँ कैसे भी
तेरे दोस्त के नजर में देखता हूँ
तुझको उन नजरों में ढूँढता हूँ 
आ जाओ नजर भर सोचता हूँ 

जब भी वो नजरें याद आ जाते 
यादों में ही उन नजरों में खो जाता 
उनके उठते और गिरते नजर में
लहरों की तरह मैं बहता जाता 

इस नजर का क्या भरोसा 
एक बार तो नजर आ जाओ
ऐसे ही नजरें परेशान रहती
मेरे नजरों में तो समां जाओ

Sunday, January 17, 2016

धुआँ से निकालकर

कविता कभी तुकांत हो जाती है 
कभी अतुकांत हो जाती है 
जब भावना सुगबुगाती है 
कुछ कहने को हो आती है 
कविता अपनेआप बन जाती है 
भावना व्यक्त हो जाती है
ऐसा लगता-वह सामने बैठी है 
जैसे उसको ही सुनाती है 


उस कॉफी के धुँए में 
जो चेहरा नज़र आता है 
वह अपना लगता है 
उसे गुदगुदी लगाने को 
दिल चाहता है 
पकड़ कर चूम लूँ 
ऐसा ही दिल चाहता है 
कहाँ खोये थे 
ऐसा पूछना चाहता है 
तुझे भुला ही नहीं अबतक
नहीं भूलना आता है 
आओ संग संग रह ले 
हर समय चाहता है 
तेरे संग गुनगुनाने को
दिल चाहता है 
तेरे बालों से मैं खेलूँ 
क्लिप से बँधे लट खोलता है 
उन केशुओं के बदरी में 
भींगना चाहता है 
उन झील सी गहरी आँखों में 
तैरना चाहता है 
उस मृगनयनी मस्ती में 
खोना चाहता है 
तुझे कोई कष्ट ना हो 
हर कष्ट लेना चाहता है 
तेरे प्यार में रहना चाहता है 
सपनों से निकाल कर
हकीकत में लाना चाहता है 

Wednesday, January 13, 2016

प्रेम क्या है ...

प्रेम का रंग नदी सा कलकल बहता जाय
धारा का रूप लेकर  निश्छल चलता जाय

सप्त रंगो के मेल में झील मिल करता जाय
सुहाना चकमक करता  मधुरम् रंग बरसाय 

सप्तक के तार में सा और प  से सुर सजाय
कभी श्रृंगार कभी मल्हार का सरगम सुनाय 

शब्दों को ऊँगली से महसूस करता जाय
प्रेम का रंग पलपल  निश्छल बहता जाय 

Sunday, January 10, 2016

एक गजल - दिखाओ जरा

तेरा शायराना अंदाज़ नूरानी चेहरा
कहाँ छुपाये रखे हो बताओ जरा 

आओ जरा दिखाओ जरा 
दिल से दिल मिलाओ जरा 

राह देखते देखते शाम हो गई 
दीपक तो घर में जलाओ जरा 
आँखों की चमक से रोशन करो
दिल का अँधेरा हटाओ जरा 

आओ जरा दिखाओ जरा
नयनों से नयन मिलाओ जरा 

लाली को गालों पे लगाओ जरा
झटका के जुल्फें लहराओ जरा
मृगनयनी आँखों का वो शर्माना
मुस्कुराते मुझे भी दिखाओ जरा 

आओ जरा मुस्कुराओ जरा
क्यों छुपे बैठे हो बताओ जरा 

Saturday, January 9, 2016

एक गजल .... तुम कहाँ हो

एक गजल .... तुम कहाँ हो 

मुद्दते बाद इश्क चढ़ी है तुम कहाँ हो 
तेरे जुल्फों के साये में रह लूँ तुम कहाँ हो 

माना कि तुम हो कोई बहती धारा
तेरे बाद नहीं खोजा कोई किनारा 
मिले तो बहुत पर सब मशगूल थे जरा 
सबकी चाहत थी तुम सा बहे धारा 

पर बताओ भी अब तुम कहाँ हो 
मुद्दते बाद इश्क चढ़ी है तुम कहाँ हो 

गमों के साये हो, या हो कोई रैन बसेरा 
तेरी यादें रही बराबर, रहा रब सा सहारा 
तेरे मुस्कराहट को चाहूँ तुम कहाँ हो 
अपने हँसी में खोने दो तुम कहाँ हो 

अब बता भी दो कि तुम कहाँ हो 
मुद्दते बाद इश्क चढ़ी है तुम कहाँ हो 

Tuesday, January 5, 2016

You are my Music

Music is You...

You are my Music
Music is in you 
Blow some Lyric 
Cause Music is you

Music is You
Song is You
Because of you
Sing on you 

Whenever I feel you
You become my time
Time moves like flies
Tone comes as Rhyme 

Give me your ear
Let me sing cooo
Blow some music
Flow tune in you 

You are my Music
Music is in you 
Blow some Lyric 
Cause Music is you

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