Sunday, January 10, 2016

एक गजल - दिखाओ जरा

तेरा शायराना अंदाज़ नूरानी चेहरा
कहाँ छुपाये रखे हो बताओ जरा 

आओ जरा दिखाओ जरा 
दिल से दिल मिलाओ जरा 

राह देखते देखते शाम हो गई 
दीपक तो घर में जलाओ जरा 
आँखों की चमक से रोशन करो
दिल का अँधेरा हटाओ जरा 

आओ जरा दिखाओ जरा
नयनों से नयन मिलाओ जरा 

लाली को गालों पे लगाओ जरा
झटका के जुल्फें लहराओ जरा
मृगनयनी आँखों का वो शर्माना
मुस्कुराते मुझे भी दिखाओ जरा 

आओ जरा मुस्कुराओ जरा
क्यों छुपे बैठे हो बताओ जरा 

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