तोड़ दिए तूने प्रीत के सपने
बुनने लगे तुम अपने ही सपने
कैसे कैसे मैंने दिन थे बिताये
सोचा था तुम सच करोगे सपने
सामने रहकर भी दूर दूर से रहे
हर रोज तेरे लिए तरसते ही रहे
इतनी बेरुखी हमसे तूने दिखाई
छोड़ तुम चले,हम तड़पते ही रहे
मिलते ही तो क्या तेरा कम हो जाता
तेरे अंदर का प्यार क्या मैं छीन लेता
इतना लिख के भी जब नहीं समझे
सामने से बोलकर क्या प्यार मिलता
तुम भी दिखे जमाने सा बेदर्द होकर
महसूस ना किये रूह को समझकर
हम रोज इन्तजार में तड़पते ही रहे
तुम कैसे थे यार,तोड़ दिए तड़पाकर
बुनने लगे तुम अपने ही सपने
कैसे कैसे मैंने दिन थे बिताये
सोचा था तुम सच करोगे सपने
सामने रहकर भी दूर दूर से रहे
हर रोज तेरे लिए तरसते ही रहे
इतनी बेरुखी हमसे तूने दिखाई
छोड़ तुम चले,हम तड़पते ही रहे
मिलते ही तो क्या तेरा कम हो जाता
तेरे अंदर का प्यार क्या मैं छीन लेता
इतना लिख के भी जब नहीं समझे
सामने से बोलकर क्या प्यार मिलता
तुम भी दिखे जमाने सा बेदर्द होकर
महसूस ना किये रूह को समझकर
हम रोज इन्तजार में तड़पते ही रहे
तुम कैसे थे यार,तोड़ दिए तड़पाकर