Thursday, April 28, 2016

कुछ तथ्य अनुभव के


जबतक मिलकर दो आत्माएं एक नहीं होती
तबतक ही दुनिया के उलझन और फ़साने हैं
जब मिल जाते दो आत्मा,सागर बन जाते हैं
पलपल मिलकर लहरें उठाते,घुलते-मिलते हैं 

पल पल साथ रह लेता हूँ

कुछ पल खोकर तुममें 
रोज साथ हो लेता हूँ 
तुझे प्यार करने के लिए
कुछ पल निकाल लेता हूँ 

तुम हो साथ ऐसा सोच
रोज प्यार कर लेता हूँ 
रहते अगर साथ तुम 
यही सोच बीता लेता हूँ 

तुम साथ हो या नहीं 
ये याद नहीं रखता हूँ 
प्यार के पल को लिख
पन्नों को भर लेता हूँ 

पागल हूँ दीवाना हूँ 
उम्र नहीं,नहीं सोचता हूँ 
तेरे संग रहने की ललक
सार्थक कर लेता हूँ 

पल में गुस्सा पल में नफरत
भूलने की कोशिश करता हूँ
जैसे ही महसूसता तुम नहीं
फिर याद में तुझे ले आता हूँ 

कैसे इतना वर्ष बीत गया
कुछ मलाल नहीं होता है 
तुम ना होते संग साथ में 
नहीं रह पाता, सोचता है 

रखना ध्यान अपना भी 
नहीं है साथ तो क्या हुआ
यूँहीं बातें कर लेता तुमसे
नहीं तू सुनते तो क्या हुआ

Saturday, April 23, 2016

मिलकर भी अंजान


देखा जब तुम्हें इधर, वो ही नूर टपकता है 
जैसा था वर्षों पहले, वो ही हूर चमकता है 

देखने दो मुझे यूँही तुम,मुझे अपने नजर से
क्यों खामोश हो जाते, मेरे यूँ देखते रहने से 

तुम नहीं जानते, तुम कितने अनमोल हो
देखते ही सब कुछ ठहर जाता,तुम हूर हो 

मिलने दो मुझे तुम्हें मेरी तरह से 
जिस भी तरह मिलना चाहता है 
सावन की घटा बारिश बनकर 
जब तेरे तनबदन पर टपकता है 

खामोश है मेरी चाह तुमसे मिलने को 
कई वर्षों से शायद कई कई जन्मों से
सुखा में तपकर भी चाह नहीं सुखा है 
पल पल रुका है तेरे मिलन के आस से 

तुम पढ़कर भी मेरा सन्देश, खामोश रह जाते हो
भेंट होने पर ऐसा भाव करते,जैसे जानते नहीं हो 

कितना मैं टूट जाता हूँ तेरे ख़ामोशी से
कभी देखकर मुझे तुम अंदाजा लगाना
पर फिर भी मुस्कुराहट निकल पड़ती है 
क्योंकि तुम्हें अच्छा लगता है मुस्कुराना

एक शेर अर्ज़ है -

मिलकर भी अंजान, सच कितनी बेकरारी है
तुमसे मिलने को हर शर्त मानने की तैयारी है

Tuesday, April 19, 2016

रूह का इस जिंदगी में सफर

रूह का इस जिंदगी में सफर

तुम शरीर को देखोगे तो जरूर मेरी उम्र ज्यादि है 
अगर रूह को देखोगे-हम सबकी उम्र एक सी है 

शरीर का क्या है यह रहेगा आता जाता
देखते ही देखते बस  रूह ही बच जाता

हर रूह का है मान,हमें सम्मान करना ही होगा
क्या है हर रूह की इक्छा,रूह को व्यक्त करना पड़ेगा

हर रूह है मुक्त,जग में अपना कर्तव्य करने को
अगर है कोई अधीन, जरूरत है रूह को ज्ञान लाने को

कोई भी रूह बदनामी के लिए प्यार नहीं करता
रूह के स्तर पर ही एक रूह दूसरे की समझता 

क्या है तेरे रूह की इक्छा,एक बार व्यक्त करना पड़ेगा
तब ही एक रूह का दूसरे रूह से ताल पर ताल बजेगा

जिया रे तूने मुझे धक दिया

New version of this tv song  .. this may be..

जिया रे जिया रे जिया रे

जैसे ही देखा तुझे मुझे धक हुआ
मेरी ही आँखों पे ना विश्वास हुआ
कैसे तूने मेरा  नजरन्दाज  किया
सरेआम तूने मेरा कत्लेआम किया

जिया रे जिया रे जिया रे

देखकर तुझमें गरिमा का भाव
मेरे दिल में बहुत गद गद हुआ
तेरे आँखों में खोकर अपने को
सच तुझपर बहुत गुमान हुआ

जिया रे जिया रे जिया रे

तुझे देखते ही लगा मेरी सिया मिल गई
जो कभी थी बिछुड़ी मेरी पीड़ा हर गई
पर नीरसता से भरी तेरी नजरन्दाज ने
जैसे नदी के किनारे पर नाव हो डूबो गई

जिया रे जिया रे जिया रे

किस पल में तुझे मैं नहीं मिस किया
यादों में हर पल तुझे मैं किस किया
कैसे हूँ मैं बिताया एक एक पल को
देखकर सामने भी तूने मुझे टिस दिया

जिया रे जिया रे जिया रे


https://m.youtube.com/watch?v=viX3OhntosA

Sunday, April 17, 2016

मत लो परीक्षा मुझसे गरिमा की

मत रोको हमें, मत टोको हमें 
तुमसे हमें मिलने दो, जीने दो 
मिलन को टूट कर बिखरने दो
धारा प्रवाह बहने दो,मिलने दो 

प्रार्थना करता हूँ ईश्वर से 
किसी भी तरह तुम मेरे हो 
मगर जबतक तुम नहीं कहते 
ईश्वर भी कैसे कहे मेरे हो 

मत लो परीक्षा मुझसे गरिमा की 
तेरे लिए ना रखने को दिल करता 
हर परिभाषा हमारी जिंदगी का 
तेरे साथ लिखने को दिल करता 

तुम बहार हो,तुम आसमाँ  हो 
तुम अपने बाहों में समां लो
तुमसे एक पल दूर नहीं रहना
अपने साथ-साथ मुझे ले लो 

जैसे ही देखा तेरा एक झलक 
मिलन का एक बाढ़ आ गया 
कैसे सम्भाला मैं अपने को 
दिल टूट कर तार तार हो गया 

जैसे ही देखा तुमको,दिल चाहा
तुम्हे ले उड़ जाऊं दूर गगन में 
घूमूँ चाँद-सितारों के संग 
रहूं जीवन भर तेरे संग संग में 

Friday, April 15, 2016

Caption says many things






There is always colourful scenes 
only you have to see through your mind
Eyes may see them or not
But you can always feel through your mind


Monday, April 4, 2016

पल को सही मानों अगर - एक गजल

एक गजल

पल को सही मानों अगर

इस पल तुम्हें याद किया
अश्रु धारा बहने लगी यूँ
दूर सावन को याद किया

आसमान भी बरस गया

पल में ही बरसात किया
पल को तुम सही मानो
इस पल तुम्हें याद किया

संगीत यूँहीं मन में बज रहा था

सुबह से ही दिल सजा रहा था
बेदर्दी बालमा तुझको का धुन
अंदर ही अंदर ही बजा रहा था

जैसे ही यह धुन बजने लगा

आसमान में बादल छाने लगा
गीतों के संग तेरे यादों के संग
झूम झूम कर बरसने लगा

पल को सही मानो अगर

इस पल ने तुझे याद किया
एक गीत बजा संगीत सजा
आसमान ने बरसात किया

प्रेम को तुम समझ  पाओ

इस पल ने तुझे याद किया
पल को सही मानो अगर
इस पल ने तुझे याद किया