रूह का इस जिंदगी में सफर
तुम शरीर को देखोगे तो जरूर मेरी उम्र ज्यादि है
अगर रूह को देखोगे-हम सबकी उम्र एक सी है
शरीर का क्या है यह रहेगा आता जाता
देखते ही देखते बस रूह ही बच जाता
हर रूह का है मान,हमें सम्मान करना ही होगा
क्या है हर रूह की इक्छा,रूह को व्यक्त करना पड़ेगा
हर रूह है मुक्त,जग में अपना कर्तव्य करने को
अगर है कोई अधीन, जरूरत है रूह को ज्ञान लाने को
कोई भी रूह बदनामी के लिए प्यार नहीं करता
रूह के स्तर पर ही एक रूह दूसरे की समझता
क्या है तेरे रूह की इक्छा,एक बार व्यक्त करना पड़ेगा
तब ही एक रूह का दूसरे रूह से ताल पर ताल बजेगा
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