Monday, April 4, 2016

पल को सही मानों अगर - एक गजल

एक गजल

पल को सही मानों अगर

इस पल तुम्हें याद किया
अश्रु धारा बहने लगी यूँ
दूर सावन को याद किया

आसमान भी बरस गया

पल में ही बरसात किया
पल को तुम सही मानो
इस पल तुम्हें याद किया

संगीत यूँहीं मन में बज रहा था

सुबह से ही दिल सजा रहा था
बेदर्दी बालमा तुझको का धुन
अंदर ही अंदर ही बजा रहा था

जैसे ही यह धुन बजने लगा

आसमान में बादल छाने लगा
गीतों के संग तेरे यादों के संग
झूम झूम कर बरसने लगा

पल को सही मानो अगर

इस पल ने तुझे याद किया
एक गीत बजा संगीत सजा
आसमान ने बरसात किया

प्रेम को तुम समझ  पाओ

इस पल ने तुझे याद किया
पल को सही मानो अगर
इस पल ने तुझे याद किया

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