Wednesday, October 29, 2014

अपनी धुन में रहता हूँ

ग़ुलाम अली का ग़ज़ल पे आधारित .. अपनी धुन में रहता हूँ ...

अपनी धुन में रहता हूँ 
तेरे यादों में खोया रहता हूँ 
तेरे याद में जीता मरता हूँ 
मैं भी तुझ संग जीता हूँ 

अपनी धुन में रहता हूँ 
तेरे यादों में जीता रहता हूँ 

तू रहते कहीं खोये
मैं रहता तुझमे खोये
तुझे याद नहीं मेरी 
मैं तुझमे में खोता रहता हूँ 

अपनी धुन में रहता हूँ 
तेरे यादों में खोता रहता हूँ 

तू रात-भर न जाने 
किस-किस से बातें करते हों 
मुझसे करने से कतराते 
मैं बस याद में  मुस्कुरता हूँ 

अपनी धुन में रहता हूँ 
तेरे यादों में मुस्कुराता हूँ 

मौत को भी बोल दिया है 
छूना नहीं मुझे तेरे आने तक 
और तुझे जल्दी है मेरे मरने की 
देखो मैं कैसे जिन्दा हूँ 

अपनी धुन में रहता हूँ 
तेरे आने तक तो जिन्दा हूँ 

कितना भी गुस्सा करता हूँ 
फिर भी दूर नहीं होता हूँ 
रातों में- सपनो में
यादों में जीता जिलाता हूँ 

अपनी धुन में रहता हूँ 
तेरे यादों में जीता रहता हूँ 

Tuesday, October 28, 2014

हो गया मेरा वल्लाह-वल्लाह

देख तेरा सिग्नल पाकर 
हो गया मेरा वल्लाह-वल्लाह 
कहाँ थे अबतक मेरे जानम 
दिल से निकले तू माशा-अल्लाह 

रूप तेरा निखरा निखरा 
अदा तेरा वल्लाह-वल्लाह 
दुनिया देखे - दुनिया नाचे 
दुनिया बोले - हाय  अल्लाह 

देख तेरा सिग्नल पाकर 
हो गया मेरा वल्लाह-वल्लाह ....

नखरे तेरे कितने अनोखे 
देखते ही बोले-हाय अल्लाह 
झुक-झुक दिल आदाब करे 
दिल से बोले - माशा-अल्लाह

देख तेरा सिग्नल पाकर 
हो गया मेरा वल्लाह-वल्लाह ....

नैन शराबी - देह गुलाबी 
धक से निकले माशा-वल्लाह 
छूने को दिल मेरा चाहे 
कहाँ छुपे हो - हाय अल्लाह 

देख तेरा सिग्नल पाकर 
हो गया मेरा वल्लाह-वल्लाह ....

दिल से निकले दुआ तेरे लिए 
खुदा बनाया - माशा-अल्लाह 
तुझको देखते ही दिल बोले 
कहाँ थे अबतक - मेरे अल्लाह 

देख तेरा सिग्नल पाकर 
हो गया मेरा वल्लाह-वल्लाह ....




Sunday, October 26, 2014

कई दिन से बदली छाई

कई दिन से यहाँ बदली छाकर 
खुशनुमा माहौल बना रही है 
गीत गुनगुनाने को तुझ पर  
मुझे बार-बार कह रही है 

मैं टाल रहा  था गीत को 
जैसे तुम मुझे टाल रही हो 
गीत कह रही कि तुझे मना लूँ 
सुबह से मुझसे बोल रही है 

वो रूप की शहजादी
तू इतना क्यों इतरा रही है 
रूप की कोई परिभाषा होगी 
तुझसे ही निकल रही है 

कहाँ खोई हो उधेरबुन में 
आजा मेरे पास तुझे हँसा दूँ 
मैं बन गया हूँ तेरे लिए जोकर 
सोचा थोड़ा तुझे मुस्कुरा दूँ 

सीखा मैंने तुझसे ही मुस्कुराना 
क्यों मुस्कराहट भूल गई हो 
किस चिंता में डूबी हो तुम 
शुभ प्रभात भी नहीं की हो 

ज्ञान का दीपक जलाया मैंने 
तेरे मन के अंधकार को देखकर  
कहीं तू भटक ना जाय मुझसे 
प्रकाशित किया हूँ ये सोचकर 

वो चपल चंचल मृगनैनी 
सतरंगी छटा भी झूठी है 
तेरे यादों की रौशनी में 
आज ये मन फिर से नही है 

चल बात कर ले -इकरार कर ले 
मेरा दिल तुझे बुला रहा है 
मेरे  मन का मीत तुझसे 
प्रीत  करने को टकरा रहा है 

ये बदरी  अगर बरस जाती 
सोचता हूँ कैसे तू भींगती 
आसमान से गिरकर बूंदें 
तुझसे मिलने को चिपकती 

हरेक बून्द के उभार में 
तेरा उभार भी प्रकट होता 
जो तू सहेजे हो सालों से 
छूने को जी ललच  उठता 

तुझे छूने को हरवक्त मन 
उठता रहता मचल मचल के 
कैसे तू रुकी हो अबतक मुझे 
छूने नहीं दिया उछल-उछल के 

सोच के मेरा मन कहता है 
आज मना लूँ -तुझे सजा लूँ 
नील गगन में तारों जैसा 
अपने अँखियों में तुझे बसा लूँ 




Saturday, October 25, 2014

यादों में बसे यार

तुमने पढ़ना छोड़ दिया
हमने लिखना छोड़ दिया 
क्या कहूँ यादों में बसे यार
मैंने जीना छोड़ दिया 

तुम छुप-छुप कर आते 
मुझे दर्द में डूबे से जगाते
जीने का जज्बा सिखाते 
कैसा है हाल-मुझसे पूछते 

एक बार-सीधे पूछकर तो देखो 
दर्द सचमुच चला जायेगा 
तुम कहोगे तो प्यार करूँगा 
वरना कम-से-कम जी तो पाउँगा 

दर्द भी फीका पड़ जाता है 
कुछ समय बाद बेअसर हो जाता है 
तेरे याद में बस मुस्कुराता हुआ 
दर्द अपनेआप काफूर हो जाता है 

नहीं आता मैं तेरे शहर 
कोई नहीं है जो मेरा हो 
काम उतना ही है औरों से 
बस दूर से राम-राम हो 

बस तुम ही हो उस शहर में 
तुम बुलाओगे तो आऊंगा 
वरना मर-जी तो रहा ही हूँ 
जैसे-तैसे जीता रहूँगा 

मुझे पता नहीं तेरे प्यार का 
तुझे है भी या नहीं मेरे लिए 
अहसान करके मत करो प्यार 
नहीं कर पाओगे सदा के लिए 

ये दुःख के गीत नहीं लिखा मैंने 
ये जीवन की रीत लिखा है 
तुमसे बहुत प्यार करता हूँ 
ये दिल तुझे कष्ट में नहीं रख पाता है 

तुमने पढ़ना छोड़ दिया
हमने लिखना छोड़ दिया 
क्या कहूँ यादों में बसे यार
मैंने जीना छोड़ दिया 

Friday, October 24, 2014

दीप दिवाली-रंग-रंगोली

दीप जलाये नयन बिछाए 
खो गई है किसी यादों में 
मेरे दिल की मन-मृगनैनी 
मुस्कुरा रही है इरादों में 

रंग-रंगोली की सेज है 
लाल-पिली सभी रंगो का 
कई रंगो का मेल-जोल से  
अनोखा मिश्रण है रंगों का 

कई दीपों से दीप सजाकर 
रंग-दीप बन गया है रंगोली में 
सचमुच अद्भुत छटा है छाई
अरमान दिख रहा है आँखों में 

किसकी बाट जोह रही मृगनैनी  
दीप समूह जलाये आँगन में 
किसको नयनों में बसाये 
मुस्कुरा रही है दिल ही दिल में 

दीपों का दीप  सजाकर 
दीप सज गया है नयनन में 
ज्योत जलाये रंग जमाये 
चमक दिख रहा है चेहरे में 

दीप-समूह से छंट गया अँधेरा 
अमावस नहा उठा है रौशनी में 
मुस्कुराहट निकल रही है ऐसी 
मैं खिल रहा हूँ दिल ही दिल में 

याद आती है एक तस्वीर पुरानी 
जिस वर्ष मिला था उस दिवाली का 
लिखा था कुछ अधूरा अधूरा सा 
बस वर्णन किया था मृगनैनी का 

दिल करता है उड़ के जाऊं 
बैठ जाऊं मैं उसके संग 
दीपों से निकली रौशनी में 
बिताऊं शाम मृगनैनी संग 

लाल-पिली रंग-रंगोली संग 
छू कर उसके गुलाबी-अंग
दीपों से निकली रोशनी में 
देखूं उसका हर बदलता रंग 

दीप जलाये नयन बिछाए 
खो गई है किसी यादों में 
मेरे दिल की मन-मृगनैनी 
मुस्कुरा रही है इरादों में 





Wednesday, October 22, 2014

खुशियों की राह

कहने को तो कह दिया मैने
मनुष्य को खुशियों की राह 
खुद बनानी पड़ती है
जीने के लिये

पर वो खुशियाँ है क्या
कितने तरह की  होती है
कैसे चुनी जाती है
कैसे लाई जाती है
क्या क्या चाह  होती है
सब तुझसे जुड़ गई है
और तेरे बिन
कोई भी खुशी नहीं दिखती

जब भी कोई खुशी उड़ती आ जाती
तो यही देखता
तुम होते तो कैसे चहकते
तुम होते तो कैसे मुस्कुराते
तुम होते तो कैसे खिलखिलाते
तुम होते तो कैसे चमकते

और वो खुशी 
बिन भींगाए ही मुझे
समुद्र की लहर की तरह
उठकर शांत हो जाती

मेरे इन विचारों से
ऐसा नहीं समझना
कि मैं दुखी हूँ
बस खुशियों को 
पहचानने की समझ आ गई
यही समझ  काफी है
उस खुशी मे डूबना
डूबकर इतराना नहीं कर पाता
डूब ही जाऊँ
इन खुशियों मे 
इसकी ज़रूरत नहीं महसूसता
बस मुस्कुराता

और तेरी मुस्कुराहट मे खो जाता.




Kahne ko to kah diya maine
Manushya ko Khushiyon ki raah 
khud banani parti hai
Jine ke liye

Par wo khushiyan hai kya
kitne trah ki hoti hai
Kaise chuni jati hai
Kaise lai jati hai
Kya kya chah hoti hai
Sab tujhse jud gai hai
Aur tere bin
Koi bhi khushi nahi dikhti

Jab bhi koi khushi udti aa jati
To yahi dekhta
Tum hote to kaise chahkte
Tum hote to kaise muskurate
Tum hote to kaise khilkhilate
Tum hote to kaise chamakte

Aur wo khushi 
bin bhingaye hi mujhe
Samudra ki lahar ki tarah
Uthkar shant ho jati

Mere in vicharon se
Aisa nahi samjhna
Ki main dukhi hun
Bas khushiyon ko 
pahchanne ki samjh aa gai
Yahi samjh kafi hai
Us khushi me dubna
Dubkar itrana nahi kar pata
Dub hi jaaun
In khushiyon me 
Iski zaroorat nahi mahsoosta
bas muskurata
Aur teri muskurahat me kho jata.


दीप जलाओ-दिल से करो दिल को रोशन

दीप जलाओ-दिल से करो दिल को रोशन
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Firaq Gorakhpuri ka ek sher-
Muddte gujri, Aur teri yaad bhi na aai hame
Aur hum bhul gaye hotujhr, Aisa bhi nahi


पता नहीं तुझे
मुझसे शुभकामना सन्देश का
इंतज़ार है या नहीं
पता नहीं तुझे
इंतज़ार होना भी चाहिए भी या नहीं
पता नहीं मैं
ये क्यों आशा करता
कि तुझे इंतज़ार होना था चाहिए

Fir bhi

दीप जलाओ - दीप जलाओ
मनाओ दिवाली रे
दिल से करो दिल को रोशन
आई दिवाली रे

शुभकामना का सन्देश भेजो
आई दिवाली रे
मीठे-मीठे मिठाई खा लो
आज दिवाली रे

दीप जलाओ - दीप जलाओ
आई दिवाली रे
दिल से करो दिल को रोशन
आज दिवाली रे



Monday, October 20, 2014

इस तस्वीर में दीखता तेरा अल्हडपन

देख के तेरा रूप सलोना 
दिल मेरा खुश हो जाता है 
आ जा वो मृगनैनी मेरे 
मेरा दिल तुझसे टकराता है 

तेरे अदाओं से, खिल खिल जाता 
मेरा मन फूल बगियाँ से 
ऐसी कशिश ना देखी कभी 
रुके ना मन-भौरां मंडराने से 

ले के अंगराई जो तूने देखी 
बाहों में भरने को दिल आता है 
आ जा वो मनमोहिनी मेरी 
मेरा दिल तेरे बिन तड़पता है 

देख के तेरा रूप सलोना 
दिल मेरा खुश हो जाता है ...


इस तस्वीर में दीखता तेरा 
भोली जवानी कुछ अल्हड सा 
तेरा प्यार भी मेरे लिए
दिखता है कुछ प्यारा सा 

देख के तेरा प्यार मेरे लिए 
दिल मेरा खुश हो जाता है 
आ जा वो मृगनैनी मेरे 
मेरा दिल कबसे तड़पता है 

देख के तेरा रूप सलोना 
दिल मेरा खुश हो जाता है ...

कब की है ये तस्वीर बताओ 
तब से तू क्यों थे छुपाये हुए 
जब मैं तेरे लिए तड़पता था 
तब क्यों थे तेरे हवाएँ उड़े हुए 

ऐसी भी क्यों दुरी है अब 
चांदिनी रातें आहें भरता है 
तुझसे मिलने को मृगनैनी 
मेरा दिल बहुत तड़पता है 

देख के तेरा रूप सलोना 
दिल मेरा खुश हो जाता है ...




Saturday, October 18, 2014

देखा तुझे यादों में

एक ग़ज़ल 
========
देखा तुझे यादों में, खयालों में , सपनों में 
तेरे नशीले रूप को
भरकाते हुए योवन में, आँखों में, दुपहरी में

छलक जाते थे जाम तेरे नैनो से 
पीकर मदहोश हो जाता था तेरे नैनो से 
तेरे लब से रस जो निकल पड़ते थे
पी लेता था उन रसों को अपने नैनों से 

तेरे मद्धम चाल की वो ठक-ठक आवाज़ 
जगा देती थी मेरे सोये अरमानों को 
कुहुक के रह जाता था तुझे छूने से
कैसे भूलूँ मैं उन यादों को, तेरे इरादों को 

शेर अर्ज़ है ...
ख़ुदा जो बक्शा है तुझमे नज़ाकत 
उससे जयादा कहीं हैं तुझमे नफासत 
कहूँ मैं ख़ुदा से कि दे दे देखने की ताकत 
और देखता रहूँ यहीं दूर से तेरी अदालत 

कैसे कैसे दिन बीते, कैसे कैसे रात 
पर ख़त्म ना हुआ तेरे गुस्सों का अम्बार 
कैसे कहूँ - किससे कहूँ - कोई नहीं सुनने वाला
एक तू ही थे मृगनैनी, थे मेरे दिल का यार 

Friday, October 17, 2014

एक मुलाकात और हमदोनों की बात

तुमसे बात करने की ललक में 
मैं किस-किस से बात कर लेता हूँ 
और तुम समझते तुम्हे छोड़ 
किसी और से बात कर लेता हूँ 

देखता हूँ उन शब्दों को 
जो तुम फटाफट लिखते जाते 
धीरे-धीरे जब लिखावट होता 
कोई और है-मुझे पता लग जाते 

कोई बात नहीं- मृगनैनी !

जितना मिलना है तेरा प्यार 
मुझे उतना ही मिल पायेगा 
ख़ुदा ने जितना बख्शा  है 
उससे ज्यादा थोड़े ही मिल पायेगा

तुम्हे भी पता है - जो हमसे बात कर रहा है 
कि मैं उसे धन नहीं दूंगा 
बस तुमसे बात करने की ललक में
उसका मन रख लेता हूँ और रख लिया करूँगा :)

इधर देखा था-एक नाटक - एक मुलाक़ात 
शाहिर लुधयानवी और अमृता प्रीतम पर 
लौटा था "शाहिर का रूह" प्रीतम से बात करने 
मौत के बाद भी शाहिर-का-तन छोड़ने पर 

देखकर कर कथा- यही लगा 
चाहते तो दोनों थे - पर 
कुछ रोजमर्रे की ज़िन्दगी में 
कुछ देश के हालत में
कुछ दोनों धर्मों के बीच में 
कुछ ग़लतफ़हमी में 
कुछ जरूरत-से-ज्यादा विश्वास में 
कुछ अलग-अलग रहने में 
कुछ दोनों के भिन्न-भिन्न जीविकोपार्जन में 
बहुत कुछ होता चला गया 
और सोचते रहे - वक़्त निकलता चला गया ,

ये जमाना तब भी इन्हें देखा करता था 
शिराज के मरने के बाद भी देखा करता था 
प्रीतम के अंतिम दिन तक देखा करता था 
और आज भी जमाना देखा करता था 

नाटक के हॉल में यही सुनाई दे रहा था 
अगर दोनों मिल गए होते 
तो किसका क्या हो गया होता 
तो किसका घाटा हो गया होता 
तो किसको फायदा हो गया होता 

अगर ना मिल पाये दोनों 
तो किसका क्या हो गया था 
तो किसका घाटा हो गया था  
तो किसको फायदा हो गया था 

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शाहिर की ही लिखी हुई - एक गीत 

ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं
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ये महलों, ये तख्तों, ये ताजों की दुनियाँ
ये इंसान के दुश्मन समाजों की दुनियाँ
ये दौलत के भूखे रवाजों की दुनियाँ
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

हर एक जिस्म घायल, हर एक रूह प्यासी
निगाहो में उलझन, दिलों में उदासी
ये दुनियाँ हैं या आलम-ए-बदहवासी
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

जहाँ एक खिलौना हैं, इंसान की हस्ती
ये बस्ती हैं मुर्दा परस्तों की बस्ती
यहाँ पर तो जीवन से मौत सस्ती 
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

जवानी भटकती हैं बदकार बन कर
जवां जिस्म सजते हैं बाजार बनकर
यहाँ प्यार होता हैं व्योपार बनकर
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

ये दुनियाँ जहाँ आदमी कुछ नहीं है
वफ़ा कुछ नहीं, दोस्ती कुछ नहीं हैं
यहाँ प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

जला दो इसे, फूँक डालो ये दुनियाँ
मेरे सामने से हटा लो ये दुनियाँ
तुम्हारी हैं तुम ही संभालो ये दुनियाँ
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाये तो क्या हैं

Saturday, October 11, 2014

कल जो देखा तुमको

नहीं पूछता किसी से मैं  
कैसा है मेरे दिल का यार 
बस दिल के नज़र से देख लेता 
जोड़ के रिश्ता मन के तार 

कल जो देखा तुमको  
बड़े दिल से लगे तुम प्यारा 
महारानी जैसा लगते थे 
बनके आँखों का तारा

काली-काली सी आँखे 
चाँद सा तेरा मुखड़ा 
देखा जो रूप सुनहरा 
बन गए दिल का टुकड़ा 

क्या गजब की तू हसीन लगती है 
हसीन से ज्यादा जहीन लगती है 
अनोखा है तुझमे दोनों का संगम 
क्या कहूँ जानू-बहुत श्रध्ये लगती है 

अब समझा क्यों तेरा भाव बढ़ा है 
लोगो ने तुम्हें बहुत चढ़ा रखा है  
ठीक है-बन जा तू ज़माने सा,पर अच्छा है 
जो तूने अपने को संभाल रखा है 

देख के तुझे ऐसा लगता है 
स्वर्ग यही धरती पे आ गया है 
मैं क्यों पहले आ गया धरती पे 
कब से बेचारा दिल सोच रहा है 

बहुत सवाल करते-छुप छुप के 
जवाब न सुनते - मेरे दिल से 
पूछता हूँ - जब आइना देखते हो 
तो क्या सवाल करते-अपने दिल से 

अपने आइना को मुझे मानकर 
चल-आज सवाल पूछना मुझसे 
खुद-ब-खुद जवाब मिल जाएगा
तब कहना छुप-छुप के मुझसे 

हैं तेरे जितने भी नखरे
हैं बहुत ही न्यारे प्यारे 
नसीबवाला ही पायेगा 
उठाने को - ऐसे तेरे नखरे 

यही जो तुम पूछ लेते हो छुप के
मुस्कुरा दिया करता है मेरा दिल 
हवा जो उडाता है मेरे जुल्फों को 
पूछता हूँ क्या छू के आये तुम्हारा दिल 

इसीलिए तो कहता हूँ-कहता रहूँगा 
दुरी तो बस अब एक परदे की है 
अब तुम इसे मीलों दूर करो 
तो ये तेरी बात है-बस तेरी बात है 





Thursday, October 9, 2014

शीत के प्रथम प्रहर

जब तुम मुस्कुराती हो 
चाँद सी शर्माती हो 
चुपके से मेरे नैनों में 
दिल में उतर जाती हो 

चैन-वैन सब लूट के तू  
मन ही मन समाती हो
जब-जब पूछूं तेरी बातें  
दिल में कूक जगाती हो 

जैसे ही पवन का झौंका
छूता है मेरे तन को  
याद आते है तेरा तन 
कैसे छुआ होगा तुझको  

उडाता है मेरे बालों को 
याद आते तेरे रेशमी बाल 
कैसे उड़ते थे तेरी जुल्फें
जब तू रखते थे खुले बाल 

तेरी चाल-ढाल सब अनोखी 
उस अदा पे निकले-उफ़ 
खुली दुपहरी में भी 
छा जाय अँधेरा घुफ़  

छूने को बदन तेरा 
हाथ अपने से बहके 
ऐसा लगे-छूते तू भी गोरी 
मन-ही-मन चहके 

ठण्ड की पहली प्रहर
शीत जगाये तन में 
अगन लगाये तन में गोरी 
आलिंगन की आस में 

लाल-लाल रतनार सा 
गोरी तू छैल-छबीली 
किस दुनिया में उलझे तू 
आ चल मिले हमजोली 



Tuesday, October 7, 2014

कुहू-कुहू बोले

देख के तेरा तन-मन से मनवा मेरा डोले 
राग-रागिनी तेरे अंग से कुहू-कुहू बोले 
कैसे कहूँ तोसे सजनी-तू खूब छबीली होले
हमें भी ले चल अपने संग-मनवा मेरा बोले 

लाल-लाल तेरी चुनरिया-खूब रंगीनी होले 

गरबा के रंग में गोरी-खूब खेल तू खेले 
नाच-नाच के कमर के लोच-खूब हल्ला बोले 
देखा जब से फोटु तेरा-मनवा मेरा डोले 

छैल-छबीली रंग-रंगीली तेरे नैन निराले 

काले-काले बालों में फूलों की बगियन डाले 
यह रसिक-मन से तुझे-सोलह श्रृंगार करा ले
दिल से कहूँ कि तू गोरी-बस मेरी दिल की होले 

सचमुच मौका दे दे अब - मुझको लेके उड़ ले

दिल की बात दिल ही जाने- मनवा मेरा डोले 
कहत कबीर सुनो भाई साधु की राग में रंग ले 
देखा नहीं तुझसा गोरी - तेरा मनवा भी बोले 

तू जब चलती-ठुमुक ठुमुक-सबके मनवा डोले 
तेरी कूक पर कोयल भी हलके-हलके कुहू बोले 
फिर मैं कहाँ पाऊँ गोरी-अपनी आवाज़ सुना ले 
खिड़की खोल के बोल दे गोरी-अपनी रंग जमा ले 










दिन बीत गया

दिन बीत गया, पर उनकी आवाज़ नहीं आई 
बस भूतों की सायं-सायं सी आवाज़ आई 
क्या करे मनवा - कैसे समझाए उनको 
मन उनमे ही रमता है - क्यों नहीं उन्हें समझ आई 

ठुमुक-ठुमक कर चलती होंगी 

इधर-से-उधर घूमती होंगी 
बिना-बात का बात करती होंगी 
जहाँ करनी है बात-नहीं करेंगी 

क्यों मैं तेरे एक इशारे पर दौड़ पड़ता हूँ 
जबकि तुम चुप होकर मुस्कुराते रहते 
कई बार तेरे चुप्पी से मुँह बना कर लौटा हूँ
टूटकर सचमुच तब शरीर में प्राण नहीं रहते 

एक बार-बस एक बार-कृपया तुम आवाज़ दो 
फिर सारे के सारे कार्य आगे के सफल हो जायेगा 
यह सत्य है कि तुम चहेते हो बहुत सारों के  
क्या तुम अहसान कर रहे-पर हर-बार मुझे ही  तपना पड़ेगा  

प्यार अहसान नहीं-यह तुम भी जानते 
प्यार अहसास है - यह तुम खूब जानते 
एक-दूसरे को इज़्ज़त देना-हम दोनों जानते 
एक दूसरे के लिए जीना-मरना,हम जानते 

यह सहभाग है-दोनों का बराबर का भाग है 
हम दोनों को अहसान नहीं-अहसास चाहिए 
अनवरत प्यार की मीठी-मीठी गुदगुदी चाहिए
धड़कते दिल से प्यार का आदान-प्रदान चाहिए 

Sunday, October 5, 2014

Words are in Hearts

Some words used in words


Good words collection..
How to take such middle words .. positively and negatively..these all depends on Person's heart :)

Positive Views :-

1. Hell in Hello - Hell situation (of my and yours) has gone away, when I called Hello to you or You told Hello to me. Means.. do not worry.. now you are in cared hand.
2. Good in Goodbye - Good is always Good.. so when we are departing, your goodness is with me and with that goodness, I will remember you (for both).
3.Lie in believe - when we believed each other- There is no place of Lie between ourselves. Means full Trust.
4. Over in Lover - All doubts are OVER, so noe you are my Lover (for both you and I).
5. End in Friend - All negative feelings have been ended, so you are Friend .. in hindi .. DOST .. means end of dualism means we are ONE. One feeling.. One concept :)
6. Ex in Next - whenever you move ahead .. last actions be with you .. either wrong or right .. so carry only those things .. which are good .. if at all any bad results comes .. be ready to face with positive attitude.
7. If in Life - There is always IF .. in Life .. but you have to live Life .. so just live without worries of IF .. all things will be fine.

One more word which is not in list..wish to include ...

8. Mile in Smile - when you are miles-miles away from me .. I remember your smile my Good-Heart and your smile cheers me to smile back.. do you feel my smile there. When our miles-away-smiles will become eyes-level-smile.. when distance of mile will be root out so that we can feel close-smile.

Its you..how you take this world
Its you..how you think the world
Its you..how you percept the world :)


aa jaun-sachmuch aa jaun

Tumhe kab se bol raha hun
Ankhiyan me jhank kar kah raha hun
Ki mat dimag laga hamare pyar me
Dil se baat kar le- dil se kah raha hun

Jab tum chhupkar
Nakli bankar
Bahrupiye bhesh me
Humse puchhti ho
Ki aa jau
Sachmuch aa jau
Chal aa jati hun

Tab teri ek tasweer ki mudra
Yaad aa jati hai
Jisme tumne
Aankho me jhankte huye
Khinchwaya hai
Jisme tumne
Apne hasin chahre ko
Haath pe tikaye huye ho
Baal khule hai
Dil ke vichar
Tere chamkte aankho se
Gulabi Gaalo se
Halki dimple se
Muskurate chehre se
Byan karti hai
 Ki aa jau
Sachmuch aa jaun
Chal aa jati hun

Ye kon si tarikh ki tasweer hai
Kya tujhe yaad hai
Ki tum us din se
Bol rahe ho
ki aa jaun
Sachmuch aa jaun
Chal aa jati hun
Par haqeeqt me jab
Mai baat karna chahta
Tujhe sunna chahta
To tum aise katra jate
Jaise kabhi pahchan hi na ho
Aur mai bas
Sochta rah jata
ki ye sapna hai
ya haqeeqat hai
Ki aa jaun
Sachmuch aa jaun
Chal aa jati hun

duri to bas ek parde ki hai
Ab tum ise milon dur kar rahe ho
To ye teri baat hai

"Arre aana, sachmuch me aana
Ye to bahut naseeb ki baate honge
Kamsekam Abhi ke pal to ji le Dosti ke
Aage ki baate hummil ke faisla karenge"

Saturday, October 4, 2014

पी लेने दो जाम साकी

पी लेने दो जाम साकी
पी लेने दो 
जी लेने दो मदमस्त हो के 
जी लेने दो 

बहुत दिन से शोहबत ना था 
जाम क्या था भूल गया था 
पी लेने दो छक के  साकी
पी लेने दो 
जी लेने दो छक के  साकी
जी लेने दो 

मत खेलो मुझसे 
मैं हूँ नहीं औरो के जैसा 
मै बस प्यार करता हूँ  
तुम भी करो मेरे जैसा 
जी लेने दो मुझे भी 
जी लेने दो 
पी लेने दो जाम साकी
पी लेने दो 

नहीं कर मेरे दर्द पर विश्वास 
आजतक कोई नहीं किया है 
तू भी कोई खुदा नहीं 
अपवाद क्यों तुझे बनना है 
जी लेने दो तेरे मुस्कराहट में 
जी लेने दो 
पी लेने दो जाम  
पी लेने दो 

नशा भी नहीं चढ़ता 
जब तेरी नशीली आँखे देख लेता हूँ 
बिना पिए ही झूमता रहता 
जब मृगनैनी आँखे देख लेता हूँ 
खो जाने दे निगाहों में 
खो जाने दे 
जी लेने दे तेरे साये में 
जी लेने दे 

शरारत भरी तेरी यादें
हरवक्त याद आती हैं 
दिल करता गाल पकड़ कर पूछूं  
मुझे क्यों तड़पाते  हो
देख लेने दो इन गालों को 
देख लेने दो 
छू लेने दो इन लब को 
छू लेने दो 

पी लेने दो जाम  
पी लेने दो 
जी लेने दो मदमस्त हो के 
जी लेने दो 


Friday, October 3, 2014

मृगनैनी के रंग

देख के तेरा रूप सलोना 
मन रंगीन हो जाता है 
तू ही एक हो मृगनैनी 
मुझे प्रकृति से जोड़ता है 

तू नहीं तो मै  कहाँ होता 
तू होते तो सबकुछ जुड़ता 
अंग-अंग में लहर दौड़ता 
तुझे देखते ही अंग फड़कता 

मृगनयनी तू मनमोहिनी 
लब है भरपूर रस भरे 
नाक कटीली नैन नशीली 
गुलाबी रंग से मादकता भरे 

ओत-प्रोत हो जाता मै 
खो जाता तेरे नैनो में 
कजरारे तेरे काले बाल 
सिहरन देते अंग-अंग में 

कामदेव भी ना संभलेगा 
तड़प जायेगा छूने को 
देख के तेरा नैन नशीला 
खो जायेगा तेरे अँखियन में 

लब रशीले रस नशीले  
चुम्बन होगा मादकता में 
छू के तेरा गाल गुलाबी 
डूब जायेगा तेरे अंग-अंग में 

रंग देखा ढंग ना देखा 
सोच रहा यहाँ मन ही मन में 
तू कहाँ खोये हो मृगनैनी 

आग लगा के मेरे तन-मन में 
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Dekh ke tera roop salona
Man rangin ho jata hai
Tu hi ek ho mrignaini
Mujhe prakriti se jodta hai

Tu nahi to mai kaha hota
Tu hote to sabkuch judta
ang ang me lahar daudta
Tujhe dekhte hi farkata

Mrignani tu manmohini
Lab hai bharpur ras bhare
Naak katili nain nashili
Gulabi rang se madakta bhare

Oot prot ho jata mai
Kho jata tere naino me
Kajrare tere kale baal
Sihran karte ang ang me

Kaamdev bhi na sambhlega
Tadap jayega chhune ko
Dekh ke tera nain nashila
Kho jayega tere ankhiyan me

Lab rashile ras nasilie
Chumban hoga madakta me
Chhu ke tera gaal gulabi
Dub jayega tere ang ang me

Rang dekha ang na dekha
Soch raha yaha man hi man me
Tu kaha khoy ho mrignaini
Aag laga yaha mere tan-man me

Thursday, October 2, 2014

Life - Jeevan

Life is a quiz. Until solved .. you are perplexed .. till solved .. you are busy .. and that business is life
... in that busy period .. how you act .
 How u react .. how u engrossed .. thats the life ....

Kal raat ko
Ghar ke balkoni se dekha
Road par aate jate traffic
Roj ki tarah
Par aaj ka nazar kuchh aur tha
Roj mai bhi hota hu
Traffic ka hissa
Kitna chil po
Dhum dham
Ye awaz wo awaz
Bazar ki ranginiya
Sarak ke dhul
Bazar ki pareshani
Usme bjagte log
Dhamkam dhuka
Kabhi Haafte ghar aate
Kabhi mauj manate aate
Kabhi yuhi bag latkaye
Kabhi baki kaamo ke sath
Kabhi koi bakaya kaam nahi
Bas jo hoga kal kaam
Dekh liya jayega
Aaj aisa bhi soch nahi
Man ekdam shant
Dil ekdam chupchap
Bas dekhne ko dil karta
Bina kuchh dimag lagaye

Kitna dube huye log dikhte
Aur mai yaha muskura raha hu
Dil hi dil me kah raha hu
Aaj mai sadak ke traffic me nahi
aaj mai zindagi ke traffic me nahi
Mai akela apni tanhai ke sath
Kitna shant lagta hai
Kitna nirav lagta hai
Kitna alag alag lagta hai
na khone ka gam
Na pane ka lobh
na jine ki chah
na marne ka gam
Sab saman lagta hai
Sage sambandhi bhi
Bas ek hath ki duri par dikhte
Koi oot prot nahi
abhi koi apsara bhi aa jay
to bas kah sakta ki
Uske kaun kaun ang achche hain
Lekin usme khona jaisa kuchh nahi
Prakriti ki bhav bhangima
Bas dikhti hai
Khone ko dil nahi karta
Mai alag .. prakriti alag
Fir bhi hun .. prakriti me

Tabhi bachcho ne bola
garba me chale
mela dekhenge
Ye khayenge
Wo dekhenge
Mai muskura raha tha
Soch raha tha
Sachmuch prakriti me khona
Jivan me dube rahna hi zindagi hai
Uski ranginiyon me khona
Uski tufano ko jhelna
Uski trango ko chhuna
Usper atkheliyan karna
Yahi to zindagi hai
Par mai nahi kho pa raha hu
Aaj in ranginiyon me
Jaise purin ka pata
Pani me dubkar bhi
Pani me nahi bhingta
Pani se bahar jaise hi nikalo
Wah sukha rahta
Pani ke lagne jaisa prabhav
Patte par nahi dikhta
Mai bhi waisa hi
mahsoos kar raha hun
Zindagi rupi pani me duba hua hu
Pat zindagi ka pani nahi lag raha
Abhi koi chikoti bhi kate
To muskurayega
Uff nahi karega
Ghabrayega nahi
Sab drasta bhav me dikh raha hai
na lobh kisi chiz ka
Na moh kisi chiz se
Na kaam ki ashakti
Na krodh kisi pe
Na ahankar bhi hai
Ki mai ye hun..wo hu..
Itna jaan raha hu
Kewal itna ahm bacha hai
Ki mai likh pa raha hun

Garba me jakar dekha
Dhum hi dhum the
Dhol nagare baj rahe the
ranginya koot koot kar thi
sabke chehre par raunak hi raunak
Ramniya sab mast thi
koi solah shringar
Koi bas naya paridhan pahne huye
bachcho ki kilkariya
Hansi thothole
kisi ne kuchh chutkula sunaya
Sab ke sath mai bhi hansa
Par ander shant shant
Uss kolahal me bhi
ek shant talav ki tarah
agar koi kankar gire
To mai gin ke bata du
Kitne tarang uthe hain
Kitne hilkoron ne
kendra se lekar
kinare tak ka safar
tai kiya hai
dekha garba me nachte huye
Logo ko .. bachcho ko..
Ramniyon ko..sab umr ke logo ko
sab khoye huye us raag rang me
Par mai ek dam shant
na awaz pareshan kar raha tha
Na ramniya dhamniya jaga rahi thi
menka bhi aati to aaj pass nahi hoti
Mai shant .. mai nirav
mai bas avlokan kar raha hun
dil hi dil me bol raha hu
Dekho wo kaisa khoya hai
Dekho us ramni ko
Kitna shringar ki hai
dekho us ladke ko
us ramni se aankh mila raha hai
ramni bhi muskura rahi hai
Apne ango ko dikha rahi hai
Ladke ke chehre damak rahe hai
Wah bhi taal me taal mila raha hai
Sab muskura rahe hain
Pahle aur aaj ki tulna me
mujhme kitna anter hai
mai un ramniyo me
kho bhi nahi raha
Jaise har koi kho raha hai
Aaj purush aur prakriti
dono alag alag dikh rahe hai
Mai bas kinare khada khada
sab ki isthiti bhamp raha hu
Koi mujhe lubha nahi pa raha
bas mai shant aur ander se shant
Jivan kya hai
Samjh raha tha
Aur aaj mujge ye bhan hua
Purush aur prakriti
ye jivan dete..
jivan me ramte
Jivan me ramate
Jabtak agyan hai
tab hi jivan me ramta hai
Jab gyan aa jata
Jivan wah jivan nahi rahta
Bas shant..nirav..nischal hota