Tuesday, October 7, 2014

कुहू-कुहू बोले

देख के तेरा तन-मन से मनवा मेरा डोले 
राग-रागिनी तेरे अंग से कुहू-कुहू बोले 
कैसे कहूँ तोसे सजनी-तू खूब छबीली होले
हमें भी ले चल अपने संग-मनवा मेरा बोले 

लाल-लाल तेरी चुनरिया-खूब रंगीनी होले 

गरबा के रंग में गोरी-खूब खेल तू खेले 
नाच-नाच के कमर के लोच-खूब हल्ला बोले 
देखा जब से फोटु तेरा-मनवा मेरा डोले 

छैल-छबीली रंग-रंगीली तेरे नैन निराले 

काले-काले बालों में फूलों की बगियन डाले 
यह रसिक-मन से तुझे-सोलह श्रृंगार करा ले
दिल से कहूँ कि तू गोरी-बस मेरी दिल की होले 

सचमुच मौका दे दे अब - मुझको लेके उड़ ले

दिल की बात दिल ही जाने- मनवा मेरा डोले 
कहत कबीर सुनो भाई साधु की राग में रंग ले 
देखा नहीं तुझसा गोरी - तेरा मनवा भी बोले 

तू जब चलती-ठुमुक ठुमुक-सबके मनवा डोले 
तेरी कूक पर कोयल भी हलके-हलके कुहू बोले 
फिर मैं कहाँ पाऊँ गोरी-अपनी आवाज़ सुना ले 
खिड़की खोल के बोल दे गोरी-अपनी रंग जमा ले 










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