Saturday, October 25, 2014

यादों में बसे यार

तुमने पढ़ना छोड़ दिया
हमने लिखना छोड़ दिया 
क्या कहूँ यादों में बसे यार
मैंने जीना छोड़ दिया 

तुम छुप-छुप कर आते 
मुझे दर्द में डूबे से जगाते
जीने का जज्बा सिखाते 
कैसा है हाल-मुझसे पूछते 

एक बार-सीधे पूछकर तो देखो 
दर्द सचमुच चला जायेगा 
तुम कहोगे तो प्यार करूँगा 
वरना कम-से-कम जी तो पाउँगा 

दर्द भी फीका पड़ जाता है 
कुछ समय बाद बेअसर हो जाता है 
तेरे याद में बस मुस्कुराता हुआ 
दर्द अपनेआप काफूर हो जाता है 

नहीं आता मैं तेरे शहर 
कोई नहीं है जो मेरा हो 
काम उतना ही है औरों से 
बस दूर से राम-राम हो 

बस तुम ही हो उस शहर में 
तुम बुलाओगे तो आऊंगा 
वरना मर-जी तो रहा ही हूँ 
जैसे-तैसे जीता रहूँगा 

मुझे पता नहीं तेरे प्यार का 
तुझे है भी या नहीं मेरे लिए 
अहसान करके मत करो प्यार 
नहीं कर पाओगे सदा के लिए 

ये दुःख के गीत नहीं लिखा मैंने 
ये जीवन की रीत लिखा है 
तुमसे बहुत प्यार करता हूँ 
ये दिल तुझे कष्ट में नहीं रख पाता है 

तुमने पढ़ना छोड़ दिया
हमने लिखना छोड़ दिया 
क्या कहूँ यादों में बसे यार
मैंने जीना छोड़ दिया 

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