नहीं पूछता किसी से मैं
कैसा है मेरे दिल का यार
बस दिल के नज़र से देख लेता
जोड़ के रिश्ता मन के तार
कल जो देखा तुमको
बड़े दिल से लगे तुम प्यारा
महारानी जैसा लगते थे
बनके आँखों का तारा
काली-काली सी आँखे
चाँद सा तेरा मुखड़ा
देखा जो रूप सुनहरा
बन गए दिल का टुकड़ा
क्या गजब की तू हसीन लगती है
हसीन से ज्यादा जहीन लगती है
अनोखा है तुझमे दोनों का संगम
क्या कहूँ जानू-बहुत श्रध्ये लगती है
अब समझा क्यों तेरा भाव बढ़ा है
लोगो ने तुम्हें बहुत चढ़ा रखा है
ठीक है-बन जा तू ज़माने सा,पर अच्छा है
जो तूने अपने को संभाल रखा है
देख के तुझे ऐसा लगता है
स्वर्ग यही धरती पे आ गया है
मैं क्यों पहले आ गया धरती पे
कब से बेचारा दिल सोच रहा है
बहुत सवाल करते-छुप छुप के
जवाब न सुनते - मेरे दिल से
पूछता हूँ - जब आइना देखते हो
तो क्या सवाल करते-अपने दिल से
अपने आइना को मुझे मानकर
चल-आज सवाल पूछना मुझसे
खुद-ब-खुद जवाब मिल जाएगा
तब कहना छुप-छुप के मुझसे
हैं तेरे जितने भी नखरे
हैं बहुत ही न्यारे प्यारे
नसीबवाला ही पायेगा
उठाने को - ऐसे तेरे नखरे
यही जो तुम पूछ लेते हो छुप के
मुस्कुरा दिया करता है मेरा दिल
हवा जो उडाता है मेरे जुल्फों को
पूछता हूँ क्या छू के आये तुम्हारा दिल
इसीलिए तो कहता हूँ-कहता रहूँगा
दुरी तो बस अब एक परदे की है
अब तुम इसे मीलों दूर करो
तो ये तेरी बात है-बस तेरी बात है



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