Tuesday, May 31, 2016

तूने क्यों ठान लिया

तुमने क्या ठान लिया है 
सच में नहीं बोलने का
अपने मीठे लबों को 
मेरे सामने नहीं खोलने का 

ऐसी भी क्या मर्ज़ी तूने है ठानी
मुझे तुम लगती हो अपनी ही जानी 

तूने क्यों ठान लिया है
ऐसा कुछ करने का 
मैं ही मिला क्या 
इस धरती पर सताने का 

तुझसे मेरी बहुत पुरानी पहचान है
तू मानों या ना मानों तू मेरी जान है 

ऐसा क्या किया हमने 
ये तो मुझे बताओ 
रोज रोज मिलकर भी
ऐसे तो ना सताओ 

तू भले नहीं मानती मुझे अपना तेरा
जल्दी से बातकर   मत कर बखेड़ा 

एक एक दिन करके 
कई दिन बीत गए 
तेरे ऐसे व्यवहार से 
सीने पर चाकू चल गए

तूने क्यों ठान लिया है
ऐसा कुछ करने का 
मैं ही मिला क्या 
इस धरती पर सताने का 

Monday, May 30, 2016

चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो 
तेरे चाहत में मैं घुलता जाऊँ 
तुम मिश्रण सा घुलाया करो

तेरे प्यार में बन जाऊँ नौटी
तुम डंडा नहीं फटकाया करो
करता रहूँ मैं प्यार तुम्हीं से
मेरे प्यार को तुम समझा करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो...

मैं प्यार करूँ कन्हैया की तरह
राधा सा पनघट पे आया करो
तुम देखने में लगती हो देवी
अपने प्रकाश में समेटा करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो...

तुम्हें महसूसने से मिटती है कामना
तुम देवी सा बहुत पतित पावन हो 
तेरे नयनों में खोकर पा लूँ जगह
अपने मृगनयनों को खोला करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो...

दुरी कहाँ हैं तेरे मेरे बीच 
क्यों लगता है मुझसे बोला करो
तेरे रूह मेरे रूह से अक्सर मिलते
अर्धांगनी सा अपने को समझा करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो...

हम मिल सकते हैं कभी भी
तुम आज के जैसा महसूसा करो
कैसे बेताब थे बोलने को हम
हम हैं तुम्हारे ही समझा करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो...

मिल जाएं हम नदी की तरह
अपने अस्तित्व को ना खोजा करो
तेरे रूह का सतीत्व दमकता है
अपने रूह को मेरे से मिलाया करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो....

Sunday, May 29, 2016

तुम हो कहाँ, हम है कहाँ

खोजती है आँखें मेरी,तुम हो कहाँ
तुम हो जहाँ, मेरी मंजिल वहाँ
बसा लो अपने निगाहों में मुझे
ना पूछो , थे हम कहाँ

मिल भी जाओ  नदी की तरह
ना पूछे हम,थे तुम कहाँ
घुल जाओ भी पानी की तरह
ना जाने हम, थे हम कहाँ

खोजती है आँखें मेरी,तुम हो कहाँ ...

इस जमीं पर,इस शहर में,तुम हो कहाँ
तुम हो जहाँ, मेरी मंजिल वहाँ
बसा लो अपने निगाहों में मुझे
ना पूछो तुम, थे हम कहाँ

खोजती है आँखें मेरी,तुम हो कहाँ ..

दुनिया के दिलकश नज़ारे में,
तुम हो कहाँ, हम है कहाँ
बता दो हमें भी चला आऊंगा
तुम हो जहाँ, मेरी मंजिल वहाँ

खोजती है आँखें मेरी,तुम हो कहाँ ..

माना की तेरी मंजिल है अपनी
जहाँ सब को होता है अपने से जाना
रुक कर सम्भल कर चलते हुए
मुझे भी ले लो, ना पूछो कहाँ

खोजती है आँखें मेरी,तुम हो कहाँ ...


देखते ही तुमको कई गीत उभरता
तुम थे कहाँ, सुनाऊँ कहाँ
तुमको देखता तो देखता ही रह जाता
पता ही नहीं कि मैं हूँ कहाँ

खोजती है आँखे मेरी,तुम हो कहाँ
तुम हो जहाँ, मेरी मंजिल वहाँ
बसा लो अपने निगाहों में मुझे
ना पूछो तुम, थे हम कहाँ 

खोजती है आँखें मेरी,तुम हो कहाँ ...





Friday, May 27, 2016

एक छंद..जीवन पर..

एक छंद..जीवन पर..

लीला समझकर रीत निभाता जा
जीवन है एक सपना,समझता जा

यहीं कर ले प्रेम,मिले तो करता जा
ना भी मिले प्रेम,बस मुस्कुराता जा

जानते हुए भी कि राम खुद भगवान् है
रंगमंच की तरह वह कर्तव करता गया
दुनिया वाले दोष देते रहे निरी कैकई को
और वह दरिया बनकर बस चलता गया

जीवन कठिन नहीं है,संसार में बना कठिन
हम तो इस संसार के नहीं,क्यूँ बनाये कठिन

जब तक ज्ञान आता, समझते उम्र निकल गई
जब ज्ञान नहीं रहता,ये दुनिया हमें उलझा गई

इसी उलझन को सुलझाते हुए जीवन बहती है
किसी की याद में, प्रेम में, ये दुनिया सजती है 


Thursday, May 19, 2016

माना कि हम तेरे काबिल नहीं

माना कि हम तेरे काबिल नहीं
फिर भी कभी तो बोला करो 
इतना अंजान भी तो नहीं हम 
मुझसे भी अब तो बोला करो 

माना कि तेरे आँखों में हैं चमक

पर इन आँखों को सवाँरा करो 
इन आँखों से ही तो मृगनयनी हो
इन आँखों में सुरमा लगाया करो 

माना कि हम तेरे काबिल नहीं

पर कभी हाल भी तो पूछा करो 
हम शिकायत भी कर सकते नहीं
पर मुझे भी तो अब समझा करो 

तुमसे बोलने की बहुत चाहत है

हमसे भी तो बोल लिया करो
शिकवा करूँ तो किससे करूँ
मुझे भी तो अब पहचाना करो

माना कि तुम बहुत सक्षम हो

पर दिल होता मेरे घर रहा करो
कैसे तुम घर से दूर रहते होगे
तुम कोई कष्ट महसूस ना करो

माना कि तुम हो बहुत खुद्दार

पर मुझे इतना तो पराया ना करो
तुम्हें देखते ही लगता तुम अपने हो 
जब भी जरूरत हो कहा करो 

माना कि हम तेरे काबिल नहीं

फिर भी कभी तो बोला करो 
इतना अंजान भी तो नहीं हम
हो सके तो मिल कर रहा करो

नहीं आने दूंगा कोई आंच कभी

मैं भी हूँ खुद्दार तुम्हारे ही जैसा 
बस हूँ तेरे दोस्ती का कायल 
तुम मुझे दीखते ठीक मेरे जैसा 

माना कि हम तेरे काबिल नहीं

फिर भी कभी तो बोला करो 
इतना अंजान भी तो नहीं हम 
मुझसे भी अब तो बोला करो

Wednesday, May 18, 2016

कृष्ण भाव - राधा से

कृष्ण भाव - राधा से

तुमसे ना रखूँ मांग
तो किससे रखूँगा
पूरी दुनिया रही माँग
मैं तुमसे ही माँगूगा 

तुम्हें देखते ही सन्तोष मिलता
तुम्हें सोचते ही चिंता नहीं सताती
तुम्हें याद करते ही कष्ट नहीं भेदता
तुम्हें ना चाहूँ कोई कारण नहीं दीखता

तुमसे ना रखूँ मांग
तो किससे रखूँगा
पूरी दुनिया रही माँग
मैं तुम्हें ही माँगूगा 

तुम अनुपम हो, अविरल हो
तुम छंद हो, मेरी कविता हो 
तुम ज्ञान हो, मेरा प्रकाश हो
जितना दूर हो पर क्यों दूर हो 

तुमसे ना रखूँ मांग
तो किससे रखूँगा
पुरे दिल में हो तुम
मैं तुम्हें ही रखूँगा 

Tuesday, May 17, 2016

रास्ते पर चलते जाना है

कितनी दूर चल कर आया हूँ
कितनी दूर चल कर जाना है
कुछ  नहीं पता इस राह का
फिर भी चलते ही जाना है 

जितना पता है इस राह का 
उसमें सारे पते खो जाते है 
नदी खो जाते हैं  समुद्र  में 
समुद्र का ठिकाना ही नहीं है

कितनी दूर चलकर आया हूँ
कितनी दूर चलकर जाना है 
तुम हो नहीं साथ, फिर भी 
रास्ता का नियम निभाना है 

कैसे कहूँ-चलते चलते थक गया हूँ
तुझे देखा तो ऐसा लगा नहीं थका हूँ 
तेरे मुस्कराहट में सच ऐसे खो गया 
जैसे राह का भर्मजाल से मैं परे हूँ 

तुम कितनी दूर चलकर आये हो
जिसमें तुम थके नहीं दीखते हो 
क्या लेकर साथ मुझे सीखा दोगे
इस रास्ता का नियम निभाना है 

मजबूरी होगी तुम्हें भी शायद 
तब ही तो तुम कुछ नहीं बोलते 
सामने से यूँ निकल जाते, जैसे
तुम एक दूसरे को नहीं जानते 

सच तुम्हें भी तो आगे बढ़ना है
तुम्हें भी तो असीम को पाना है 
मेरे कारण तुम्हें देर ना हो जाय
राह का नियम तुम्हें भी निभाना है 

कितनी दूर चलकर आया हूँ
कितनी दूर चलकर जाना है 
तुम हो नहीं साथ, फिर भी 
राह पर मुझे चलते जाना है 





Monday, May 16, 2016

मेरे शब्दों में जो होगा वही सजेगा

शब्दों में वो ही लिखेगा
जो दिल में होगा,मन में होगा
यहाँ दिल में तो तुम बसे हो
फिर शब्दों में तुम ही सजेगा

दिल करता है 
तुझे नींद से जगाऊँ
पलकों को खोलकर उठाऊँ
लंबी नाक को खींचूँ
तेरे गुस्से को फेकूँ
तेरे चेहरे पर मुस्कान बिखेरूँ
तेरे खिलखिलाहट में खो जाऊँ
उन गाल के गड्ढों में डूब जाऊँ
बिखरते लटों को सवारूँ
तेरे लावण्य नूर में चमकुँ
हल्के हल्के पदचाप करते 
समय के गति में संग संग खो जाऊँ 

मेरे शब्दों में गीतों में 
और कुछ ना मिलेगा
तुम ही मिलोगे-हिलोगे
जैसा मेरा दिल कहेगा 

तुझे देखते ही,ये अनुमान लगा पाता
कि कैसी रही होगी कृष्णा की राधा
या कैसी रही होगी शंकर की पार्वती
कैसे चले होंगे संग दोनों आधा-आधा 

कभी छाँव मद्धम कभी तेज धुप
कैसे छुपे होंगे दुपट्टा लेकर ओट
बड़े बड़े नयनों में चमक जगाये
मुस्कुराते जीवन होते लोट-पोट

कौन कहता है समय बीत जाता है
गोल धरती सा चल कर ये आता है
तारों नक्षत्रों को फिर से मिला देता है 
बीते पलों को फिर से जीला देता है 

मेरे शब्दों में वही सजेगा
जो मेरे तन-मन में खिलेगा
वही चमकेगा, वही बिखेरेगा
तेरे आने का इंतज़ार करेगा

Wednesday, May 11, 2016

Keep flying O' Butterfly

When I see your flying...it reflects as...

This happiness blooms out from your core heart

Do you know it really emits from your body length
Your inner feelings of happiness which you wish to zoom out
Eyes catches those expressions when they zoom in on body

Keep expressing

Keep brightening 
Keep enlightening 
O' Knight angle

Keep going

Keep moving
Keep flying
O' Butterfly

Keep chanting

Keep expressing
Keep blooming
O' Flower 

Keep enjoying

Keep living
Keep smiling
O' Warrior 

Tuesday, May 10, 2016

Attitude, Ego and Ignorance

Once  Krishna saw these Attitude, Ego and Ignorance in Radha...he says..

Seeing your Attitude,O Radha
Feel like truly being you
Whenever any pain comes
You kick that pain from you

Seeing your Ego,O Radha
Feel like standing with you
Whenever any force comes
you smash that force from you

Seeing your ignorance,O Radha
Feel like laughing on you
Whenever any tear strikes
You ignore that tear from you

With the same Attitude
One crosses the river of life
With the same Ego
One stands in the storm also
With the same ignorance
One forgets any scarcity in life
Feel love-you keep me away
With your Attitude, Ego & Ignorance

Remembering you
My Attitude moves away
Feeling of you
My Ego merges with you
Smiling for you
My ignorance fades away
I can not keep for you
any Attitude, Ego & Ignorance

Why not I lost in playing my flute
I feel like merging with you
I feel like  swimming with you
I feel like watering with you

Monday, May 9, 2016

You are diamond

One poem

Do not ignore O my love
It is really unbearable
How one one minute is lasting
It is totally unbelievable

How time is lasted without you
It is really unspeakable
The moment I feel you
It becomes memorable 

Just talk, listen, speak
O my dear adorable 
Do not kill my feelings
It is totally unbearable

Who told you after pressure
You have become diamond
The day I had seen you first
Since then you were diamond

I do not know how I am living
Without talking away from you
How to say that I did not know
Really I am nothing without you

I really do not beg from you
it is my love,which is adorable
It is not you should love me back
You are totally not responsible 

Do not ignore O my love
Just speak, it is unbearable
How one one moment passes
pinch me,make me believable

Thursday, May 5, 2016

खुदा ! तेरा ये दुनिया

खुदा ! तेरा ये दुनिया

ये दुनिया का ताना बाना
इस दुनिया को उलझाना
सबको उलझाये रखना
बस तेरा काम रह गया है

इस दुनिया में उलझना
इस दुनिया को समझना
एक चढ़ाई सा ठान लेना
बस मेरा काम रह गया है 

नहीं है तेरे इस दुनिया में
यहाँ कुछ भी कोई झमेला
केवल मैं तुम्हे ना समझूँ 
बस यही दुनिया रह गया है 

सब दिल का है एक रंग 
फिर आसपास हैं दूरियाँ 
इस दूरियाँ में हैं कट रहे
बस यहाँ दर्द रह गया है 

कितना भी कार्य समेटूँ 
कितना भी कर्म फैलाऊँ
कितना भी समझ जाऊँ 
बस यहाँ कर्म रह गया है 

कर्म की जिजीविषा 
अकर्म की लालसा 
कर्म से सबकुछ पाना
अब कर्म अपना हो गया है 

इस कर्म में दिल खो गया है 
कर्म में भावना छुप गया है
इस कर्म में दिल पीस गया है
बस यहाँ कर्म ही कर्म रह गया है 

नहीं है तेरे इस दुनिया में
कर्म सा कुछ भी झमेला
क्योंकि अंत में बस मौत है
बस तेरा पास आना रह गया है

इस दिल का क्या करूँ 
इस कर्म में दिल मर गया है 
दिल में रूह है भी नहीं 
बस रूह नाम सा रह गया है

दिल को साथ रखकर भी
कर्म किया जा सकता है 
केवल कर्म को तव्वजो दे
ये दिल तेरे दुनिया में मर गया है 

ये दुनिया का ताना बाना
इस दुनिया को उलझाना
सुलझा के फिर उलझाना
बस एक नाटक सा रह गया है 

वो खुदा-रूह ही इस दुनिया में
सबके दिल में है धड़क रहा
तेरे नाटक से पर्दा उठ गया है 
फिर भी तू चुप है,दिल मुस्कुरा गया है