तुमने क्या ठान लिया है
सच में नहीं बोलने का
अपने मीठे लबों को
मेरे सामने नहीं खोलने का
ऐसी भी क्या मर्ज़ी तूने है ठानी
मुझे तुम लगती हो अपनी ही जानी
तूने क्यों ठान लिया है
ऐसा कुछ करने का
मैं ही मिला क्या
इस धरती पर सताने का
तुझसे मेरी बहुत पुरानी पहचान है
तू मानों या ना मानों तू मेरी जान है
ऐसा क्या किया हमने
ये तो मुझे बताओ
रोज रोज मिलकर भी
ऐसे तो ना सताओ
तू भले नहीं मानती मुझे अपना तेरा
जल्दी से बातकर मत कर बखेड़ा
एक एक दिन करके
कई दिन बीत गए
तेरे ऐसे व्यवहार से
सीने पर चाकू चल गए
तूने क्यों ठान लिया है
ऐसा कुछ करने का
मैं ही मिला क्या
इस धरती पर सताने का
सच में नहीं बोलने का
अपने मीठे लबों को
मेरे सामने नहीं खोलने का
ऐसी भी क्या मर्ज़ी तूने है ठानी
मुझे तुम लगती हो अपनी ही जानी
तूने क्यों ठान लिया है
ऐसा कुछ करने का
मैं ही मिला क्या
इस धरती पर सताने का
तुझसे मेरी बहुत पुरानी पहचान है
तू मानों या ना मानों तू मेरी जान है
ऐसा क्या किया हमने
ये तो मुझे बताओ
रोज रोज मिलकर भी
ऐसे तो ना सताओ
तू भले नहीं मानती मुझे अपना तेरा
जल्दी से बातकर मत कर बखेड़ा
एक एक दिन करके
कई दिन बीत गए
तेरे ऐसे व्यवहार से
सीने पर चाकू चल गए
तूने क्यों ठान लिया है
ऐसा कुछ करने का
मैं ही मिला क्या
इस धरती पर सताने का



