Monday, May 30, 2016

चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो 
तेरे चाहत में मैं घुलता जाऊँ 
तुम मिश्रण सा घुलाया करो

तेरे प्यार में बन जाऊँ नौटी
तुम डंडा नहीं फटकाया करो
करता रहूँ मैं प्यार तुम्हीं से
मेरे प्यार को तुम समझा करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो...

मैं प्यार करूँ कन्हैया की तरह
राधा सा पनघट पे आया करो
तुम देखने में लगती हो देवी
अपने प्रकाश में समेटा करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो...

तुम्हें महसूसने से मिटती है कामना
तुम देवी सा बहुत पतित पावन हो 
तेरे नयनों में खोकर पा लूँ जगह
अपने मृगनयनों को खोला करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो...

दुरी कहाँ हैं तेरे मेरे बीच 
क्यों लगता है मुझसे बोला करो
तेरे रूह मेरे रूह से अक्सर मिलते
अर्धांगनी सा अपने को समझा करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो...

हम मिल सकते हैं कभी भी
तुम आज के जैसा महसूसा करो
कैसे बेताब थे बोलने को हम
हम हैं तुम्हारे ही समझा करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो...

मिल जाएं हम नदी की तरह
अपने अस्तित्व को ना खोजा करो
तेरे रूह का सतीत्व दमकता है
अपने रूह को मेरे से मिलाया करो

मैं चाहूँ तुझे प्रेमी की तरह
तुम प्रेमिका सा बना करो....

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