Tuesday, August 23, 2016

उसने समझा मेरा कोई वजूद नहीं

क्या तुझे कोई सवाल नहीं है 
कुछ बात करते रहने का
क्या सारी बातें मेरी ही है 
तुझसे बात करते रहने का

कयामत का धैर्य है तुझमें
सामने रहकर भी चुप रह जाते
जब तुम रहते हो सामने 
मुझसे चुप नहीं रहे जाते 

कुछ तो हौसला दो
बात शुरू करने का
कोई अनुभव नहीं है 
मुझे शुरुआत करने का

चलो शुरुआत कुछ बात का
आज शाम में हमने कर दिया
अब ये दोष नहीं देना मुझे 
कि मैंने बात शुरू नहीं किया 

एक बात बोलूँ- तुम ऐसे ही चले आओ
और चल पड़ते हैं हमदोनों सफर पर
पूछूँगा भी नहीं किसी से या तुमसे 
कि जाना है किधर,बस होगा एक सफर

**************
बिन कहे कुछ तुम ऐसे चले गए
जैसे कि मेरा कुछ वजूद ही नहीं 
हंसी आती है, पर कोई गुस्सा नहीं 
क्योंकि रूह से प्यार है तन से नहीं

ऐसा नहीं कि तुझे कम आँकता हूँ
ऐसा भी नहीं कि मुझमें कमी है 
ऐसा महसूसता हूँ मैं तुझमे निहित हूँ
जन्मों जन्मों से तेरे इन्तजार में हूँ 

भले तुम हँसकर टाल दो-महसूस को
भले तुम तव्वजो नहीं दो इस प्यार को
मगर मुझे कोई इसमें हँसी नहीं दीखता
और हरवक्त तव्वजो देता इस चाह को 

मुझे संज्ञान है पर रावण सा नहीं है
मुझे ध्यान है पर दुर्योधन सा नहीं है
पूर्ण सन्तुलन में हूँ और अधीर भी नहीं
प्रकृति के सब रंग की मुझे पहचान है 

बिना इज्जत के तो मैं खाता भी नहीं
बिना इजाजत के छु दूँ ऐसा भी नहीं
प्यार करके मरता जरूर हूँ तुझ पर
मगर कोई जिल्लत सहूँ, ऐसा भी नहीं 

हमने पहचाना है रूह की शख्सियत 
इस शरीर का तो कोई मोल ही नहीं 
तुम समझते रहो- खोते रहो मौज में 
मेरा दौर कही और है,पर मौज में नहीं 

Sunday, August 21, 2016

क्यों हम मानव उड़ना चाहते

क्यों हम मानव उड़ना चाहते
क्यों हम कोशिश करते रहते
क्यों हम उड़ने की चाह रखते
और बार बार हम उड़ते रहते

ये सोच नहीं एक सच्चाई है
हम कैद होते भावनाओं में
भावना हमेशा उड़कर आती
हमें भी उड़ाती अपने संग में

उड़कर जाना चाहते उनके पास
जो नहीं होते हैं हमारे आस-पास
उड़ा कर उसे लेकर जाना चाहते
उन्हें  रखना चाहते दिल के पास

क्या रखा है इस दुनिया में, क्या है जीवन में
एक पल या पल पल हम रह लें उसके साथ
क्यों रहे हम उससे दूर,क्यों ना रहे हम पास में
यही आशा उड़ाती हमें अपने भावना के साथ

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=10207126594347755&id=1368734241

Saturday, August 13, 2016

राधे तेरे याद में



इसे कविता कहूँ, शेर कहूँ, दोहा कहूँ या दिल से उपजा भाव कहूँ..

मत देख ऐसे राधे झांकते हुए
तेरे याद में हूँ खोया,बजाते हुए
बाँसुरी की धुन को सजाते हुए
तेरे याद में तुझमें लहराते हुए 

राधे तेरी नटखटपन पे स्नेह आता है 
तुमसे दूर रहकर भी मन मुस्कुराता है 
तेरे मधुर मुस्कराहट में खो जाता है 
उस मृग्नयनी आँखों में डूब जाता है 

बाँसुरी से धुन बजने लगता है 
दिल में लहर उठने लगता है 
सूने मन में तरंग छाने लगता है 
तू ना होकर भी सामने लगता है 

राधे तेरे नटखटपन पे नेह आ जाता है
मधुर मधुर किलकारी गूँजने लगता है 
तेरा चुलबुला चाल थिरकने लगता है 
नयनों में नयना डाल कहने लगता है 

तू दूर है पर दिल से दूर नहीं
तू जहाँ भी है पर यहाँ भी है 
तू खुश रह, कामना करता है 
मुस्कुराते रह,इक्छा करता है 



Saturday, August 6, 2016

बूँद बूँद

इसी बूँद बूँद से 
जिंदगी है चलता
इसी बूँद बूँद से
प्यास है बुझता
इसी बूँद बूँद से
जीवन तड़पता
यही बूँद बूँद तो
मज़ा भी देता
बूँद बूँद से ही
घड़ा भी भरता
इसी बूँद बूँद से
सागर भी बनता
इसी बूँदो में
मिठास भी होता
इसी बूँद में भी
कोई जहर पिरोता
इसी एक बूँद में
अमृत भी होता
यही एक बूँद
आँख को भर देता
यही बूँद कभी
चेहरा भी चमकाता
इसी बूँद से कभी
पसीना भी झलकता
यही बूँद बारिस बन
खेंतो को सींचता
कभी जुल्फों में आकर
गोरी को उलझाता
कपड़ों को भिंगाकर
कपकपी भी देता
क्या है ये बूँद
कितना अजूबा होता
जब उनकी याद
आँखों से लरजता
तब यादों के फूल बन
दिल में है बसता
कभी मुस्कुराता
कभी खिलखिलाता
बारिस के मौसम में
बूँद बूँद है बरसता
💦💧💧💦

मत मायुष् हो वो नादान आँसू

मत मायुष् हो वो नादान आँसू
छलककर गिर पड़ते हो तनिक दुःख देखकर
कभी उन मृग्नयन को तो देखो
जो याद में ही तृप्त कर देते हैं मुस्कुराकर

आज भी बीतते हैं यादों में तेरे
संग संग बिताये एक एक पल
तुम जब होगे साथ, हरवक्त सोचता,
कितने सुहाने होंगे वो पल

मैं ही डर जाता कि
पता नहीं की तू फिर कहीं ना पिन चुभोये
बड़ी मुश्किल से
सम्भल पाया था मैं जब वो तूफ़ान थे आये

गलती किसकी किसका दोष
मैं दुनिया के नजर से ना देखता
मैं तो था डुबा तेरे प्यार में सनम
इतना ही मैं हूँ जानता मैं मानता

तुम हो रूठे तुम हो गुस्सा
इसका पता ही नहीं चलता
तू अगर अवसर देते रहने का
तेरा हर छन्द तब पता चलता

तेरे नखरे बहुत अच्छे होते हैं
तेरे तेवर सचमुच तीखे होते हैं
आशाएं मुझे हौसले देते रहते है
तेरे संग मुस्कुराउँ,सपने देखते हैं

अर्ज़ है ..
तेरा मुझसे रुठने का कुछ ही वक्त अभी गुजरा है
कोई बात नहीं, हमारी दोस्ती लम्बी चलने वाली है



Wednesday, August 3, 2016

तुम जो ऐसे चुप रहती हो

तुम जो ऐसे चुप रहती हो 
कारण बताओ क्यों चुप हो 
तुम जो ऐसे रूठी रहती हो 
कारण बताओ क्यों रूठी हो 

दुनिया से तुम बोलती हो 
हम से तुम क्यों नहीं बोलती 
हर के साथ तुम हंसती हो 
हम से तुम क्यों नहीं हंसती 

तुम जो ऐसे चुप रहती हो 
कारण बताओ क्यों चुप हो ...

तुम एक कारण बता दो हमें 
कि हम तुमसे प्यार करे क्यों नहीं 
इतना गुनाह है प्यार क्या 
ये बतलाते तुम क्यों नहीं 

तुम जो ऐसे चुप रहती हो 
कारण बताओ क्यों चुप हो ...

तुम्हे नहीं पता हम कैसे रह जाते 
तड़पते बिलखते रोते हुए 
ऐसा तुझसे मैं क्या ले लूंगा 
जो यूँ छोड़ देते रोते हुए 

तुम जो ऐसे चुप रहती हो 
कारण बताओ क्यों चुप हो ...

क्या ऐसा नहीं हो सकता 
कि नदी सा मिल जाय राह में हम 
क्या ऐसा नहीं हो सकता 
कि हम बात करे जैसे भूले नहीं हम 

नहीं कुछ तेरा हानि होगा 
बस तुम हमसे बात करो 
तेरा चेहरा लब सब बोलता है 
कभी तो हमसे भी सुना करो 

तुम जो ऐसे चुप रहती हो 
कारण बताओ क्यों चुप हो ...

एक शेर...
जब भी उनसे बात करने को दिल चाहता 
ये दिल उनसे कुछ बात कर लेता 
जब भी मिलने कि तड़प सताने लगता 

आँखों से दो-चार बून्द टपका देता 


Tuesday, August 2, 2016

रजनीगन्धा फूल हो तुम

रजनीगन्धा फूल हो तुम 

तुम कयामत की खूबसूरत हो
खुदा ऐसे ही तुझे खूबसूरत रखे
उससे तो अच्छा तेरे रूह है
जो तुझमें रहकर चमकाकर रखे 

तेरा भींगा बदन तेरा भींगा बाल
मदमस्त कर रहा है माहौल को
ऐ बला की खूबसूरत मृगनयनी
अपने नयनों से देख लो हमको 

तुम पूछो भी कभी हमसे 
तुम हमें कितने हसीन लगते 
हरवक्त खुदा से मैं कहता 
कि मुझे तेरे साथ हमेशा रखते 

आज पता चला-कैसे मूर्तिकार 
किसी मॉडल को देख मूर्ति बनाता है 
सच खुदा ने बख्सा ये अवसर
तुझे देखकर प्यारे शब्द उकेरता है 

दिल होता है तुझे उठाऊँ 
उन हसीन पलकों को छूकर
क्या तुम अवसर दोगे  मुझे 
यूँही लबों को मुस्कुराकर 

ऐ जो तुम शरमाकर दूर हो जाते हो
कसम से तुम बहुत हसीन लगते हो
ऐसे तो कितने रंगीनियाँ भड़े पड़े हैं
खुदा से कहता बस तुम नाजनीन हो

Monday, August 1, 2016

ऐ दिल तुझे सखी कहूँ

ऐ दिल तुम्हें चाहूँ ऐसे 
कि मैं तुझे सखी कहूँ 
मत रह दूर तुम हमसे
कि मैं इसे बेरुखी कहूँ 

इतना तुम्हें चाहूँ तुझे
कि ऐ दिल तुझे अपना कहूँ
मत दूर हो तुम ऐसे हमसे
हरवक्त तुमसे कहता रहूँ 

ऐ दिल तुम्हें चाहूँ ऐसे 
कि मैं तुझे सखी कहूँ .......

कैसे कहूँ कि तुम हो कितने
सलोने भी अपने भी 
मेरा दिल तड़पता रहता है
जानते भी मानते भी

फिर क्यों दूर हो तुम हमसे
बताओ भी जताओ भी
कि अब दिल मेरा लगता नहीं
समझो भी समझाओ भी

ऐ दिल तुम्हें ऐसे चाहूँ 
कि मैं तुम्हें सखी कहूँ ........

पता है तुम्हें क्या प्रभु शंकर ने
कहा था माँ सती से ऐसे ही 
कि मत ले परीक्षा तू प्रभु राम का 
जब वो सिया को वन में ढूंढे कहीं 

मगर माँ सती नहीं मानी
और चुपके से सिया बन बैठी कहीं 
वन में भटकते जब राम ने देखा-पूछा
माँ संग में प्रभु शंकर दिख रहे नहीं 

माँ सती ऐसे सकुचाई 
कि घबराकर अन्तर्ध्यान हो गई वहीं 
लड़खड़ाते हुए कैलाश पहुंची
और ऐसे जताई जैसे कुछ हुआ हो नहीं

लेकिन ये भगवान शंकर हैं
जिनसे कुछ भी छुपता नहीं 
ध्यान लगाकर जब वे देखे 
ये क्या किया सती-बोल पड़े वहीँ 

माँ सिया का तू रूप लेकर
अब कैसे तुम्हें मानु प्रिय सती
मेरी सती जो बस अपनी है 
कैसे पाऊँ किसी और में सती

वैराग्य छा गया शंकर में 
नहीं चाहा कोई रंग-राग भी
इतना चला ये कहानी 
कि सती को त्यागना पड़ा शरीर भी

फिर लेकर पुनर्जन्म सती आई 
हिमालय राजा के घर पार्वती बनकर
तपस्या की खूब घनघोर 
तब कहीं जाकर मिली पार्वती को शंकर 

तबतक इन्तजार में रहे शंकर
प्रेम में विह्वल सती के लिए 
हे प्राणप्रिय हे सखीप्रिय 
शंकर है बस पार्वती तेरे लिए 

कितनी अच्छी है यह घटना
जन्म जन्म से चल रही 
शंकर संग पार्वती की सुधि
प्रेम प्यार में घुलती रही

आओ तुम सती सा बनकर
आओ भी पार्वती सा बनकर
जन्म जन्म से खोज रहा
मैं तुझे शंकर सा बनकर 

ऐ दिल तुम्हें चाहूँ ऐसे 
कि मैं तुझे हमेशा सखी कहूँ 
मत रह दूर तुम हमसे
कि मैं इसे तेरा बेरुखी कहूँ