इसे कविता कहूँ, शेर कहूँ, दोहा कहूँ या दिल से उपजा भाव कहूँ..
मत देख ऐसे राधे झांकते हुए
तेरे याद में हूँ खोया,बजाते हुए
बाँसुरी की धुन को सजाते हुए
तेरे याद में तुझमें लहराते हुए
राधे तेरी नटखटपन पे स्नेह आता है
तुमसे दूर रहकर भी मन मुस्कुराता है
तेरे मधुर मुस्कराहट में खो जाता है
उस मृग्नयनी आँखों में डूब जाता है
बाँसुरी से धुन बजने लगता है
दिल में लहर उठने लगता है
सूने मन में तरंग छाने लगता है
तू ना होकर भी सामने लगता है
राधे तेरे नटखटपन पे नेह आ जाता है
मधुर मधुर किलकारी गूँजने लगता है
तेरा चुलबुला चाल थिरकने लगता है
नयनों में नयना डाल कहने लगता है
तू दूर है पर दिल से दूर नहीं
तू जहाँ भी है पर यहाँ भी है
तू खुश रह, कामना करता है
मुस्कुराते रह,इक्छा करता है


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