Tuesday, August 2, 2016

रजनीगन्धा फूल हो तुम

रजनीगन्धा फूल हो तुम 

तुम कयामत की खूबसूरत हो
खुदा ऐसे ही तुझे खूबसूरत रखे
उससे तो अच्छा तेरे रूह है
जो तुझमें रहकर चमकाकर रखे 

तेरा भींगा बदन तेरा भींगा बाल
मदमस्त कर रहा है माहौल को
ऐ बला की खूबसूरत मृगनयनी
अपने नयनों से देख लो हमको 

तुम पूछो भी कभी हमसे 
तुम हमें कितने हसीन लगते 
हरवक्त खुदा से मैं कहता 
कि मुझे तेरे साथ हमेशा रखते 

आज पता चला-कैसे मूर्तिकार 
किसी मॉडल को देख मूर्ति बनाता है 
सच खुदा ने बख्सा ये अवसर
तुझे देखकर प्यारे शब्द उकेरता है 

दिल होता है तुझे उठाऊँ 
उन हसीन पलकों को छूकर
क्या तुम अवसर दोगे  मुझे 
यूँही लबों को मुस्कुराकर 

ऐ जो तुम शरमाकर दूर हो जाते हो
कसम से तुम बहुत हसीन लगते हो
ऐसे तो कितने रंगीनियाँ भड़े पड़े हैं
खुदा से कहता बस तुम नाजनीन हो

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