Saturday, August 30, 2014

तेरी ये तस्वीर

तेरी ये तस्वीर बड़ी प्यारी लगती है 
तीखी लगती है बहुत न्यारी लगती है 
तेरी ये तस्वीर...

दीखता है इस तस्वीर में 
कि  तुम मुझे याद करते हो 
मुझसे अंखिया मिलाने की 
हिम्मत दिखाने की जुर्रत करते हो 
तेरी ये तस्वीर...

इस तस्वीर में एक शरारत है 
प्रेम से देखो तो नज़ाकत है 
अदा के साथ एक नफासत है 
तेरी नटखट भरी फितरत है 
तेरी ये तस्वीर...

तुम कहो ना कहो महसूसता है 
अधिकार दो या ना दो हक़ सा लगता है 
जब तुम पूछोगे तो दिल कहता है 
तुमसे प्यार है-तेरे कान में कहता है 
तेरी ये तस्वीर...

तुम सुनो ना सुनो मुस्काता है 
तेरी निश्छल हंसी में खो जाता है 
हर-पल को पल-पल में जीता है 
तुम कहो ना कहो- प्यार करता है 
तेरी ये तस्वीर...

तू प्यार का सागर हो-दिल कहता है 
तेरे एक बूँद के प्यासे हैं-महसूसता है 
तुम पिलाओ ना पिलाओ- मुस्कुराता है 
तेरे अंखियो को देखकर ही पी लेता है 
तेरी ये तस्वीर...

तुम जियो सालों साल- दिल कहता है 
तुम हँसते रहो इसीतरह- दुआ  करता है 
पल पल जीते रहो महसूसता है 
तुम दूर हो मुझसे-इसपर हंसी लगता है 
तेरी ये तस्वीर...

Friday, August 29, 2014

आज तुझे ख्याल आया

आज भी तुझे ख्याल आया 
कि नहीं याद करना है मुझे 
चलो कितना अच्छा है सबब 
मैं  बैठा रहा  याद करते तुझे 

दुनिया का बाजार बहुत है अलबेला 
पहाड़ पे चढ़ जाओ,रह जाते अकेला 
पर कितनी देर रह पाते अकेला 
यह तो दिल ही जानता,जो है अकेला 

दुनिया की याद तो आएगी ही 
पहाड़ पे भी तुम्हारा याद आता 
पर इससे तुम्हे क्या 
तुम्हें तो दुनिया में मन लगता 
दुनिया में जीते 
दुनिया को भरमाते 
दुनिया से बात करते 
तेरे दुनिया में मैं  नहीं होता 
तुम मुझे रखना भी नहीं चाहते 
तेरा पीछा जो करता था 
तुम्हें छूने के लिए नहीं 
पर तुम्हें देखने को 
तुम्हें उड़ते महसूसने को 
तुम्हें अच्छा नहीं लगा 
तुमने दूर भेज दिया 
तुम मुक्त हो गए 
अब खुलकर उड़ सकते थे 
खुल कर उड़ रहे हो 
दुनिया का बाजार बना लिए 
कई दुनिया बना दिए 
अब कोई तुझे पीछा नहीं कर रहा 
तुम मुक्त हो उन्मुक्त उड़ रहे 

चलो-आज भी तुझे ख्याल आया 
कि नहीं याद करना है मुझे 
चलो कितना अच्छा है सबब 
मैं ही याद कर लेता हूँ तुझे 

तेरे बातों से यह तो लगा
कि अभी कोई तुझे रोकता है 
कि अभी कोई तुझे टोकता है 
कि ऐसे न करो, वैसे न करो 
इसका तुम्हे पहले भी चिढ था 
इसका तुम्हे अभी भी चिढ है 
फर्क इतना है चेहरा बदल गया है 

चलो-आज भी तुझे ख्याल आया 
कि नहीं याद करना है मुझे 
चलो कितना अच्छा है सबब 
मैं ही याद कर लेता हूँ तुझे 

तुम नहीं समझोगे 
एक पिता का दर्द 
तुम नहीं जानोगे 
एक भाई का अहसास 
तुम नहीं समझ सकते 
एक प्रियतम का आस 
तुम्हें केवल दीखता 
ये सब है सारे बदहवास
 
इनका हाल जानने को 
इनके रूप में जन्म लेना होगा 
तब जाकर समझ सकते 
कि मर्द क्या क्या होगा 

अगर नारी और पुरुष के एक ही रंग होते 
तो शायद ये प्रकृति कब की  सिमट चुकी होती
इनके कई रंग है, इनके कई ढंग है 
इन्हीं रंगो को समझने और समझाने
हम आते जाते रहते हैं 
यह शरीर तो बस माध्यम है 
आने जाने की एक गाड़ी है 
कभी इस सड़क पे, कभी उस सड़क पे
चलती रहती है , जाती रहती है 
जिंदगी के गीत गाती रहती है 
और हम ज़िंदगी जीते रहते हैं 
इसलिए मैं कहता हूँ और कहता रहूँगा 
तुम कितने भी गर्त के काम करोगे 
तुम्हारा ये शरीर करेगा 
तुम शुद्ध-चैतन्य आत्मा हो 
जो कभी मलिन नहीं होता 
तुम अच्छे आत्मा हो 
जो कभी नमकीन नहीं होता 
बस मीठा-मीठा होता है 
और वही मीठापन बिना चखे ही 
मुझे महसूस होता था 
जब भी तुझे देखता था 
एक अहसास होता था 
एक आस होता था 
कभी दर्द नहीं-पर ख़ुशी होता था 
कभी दुरी नहीं-पर अपना होता था 
सपने भी अपना होता था 
और जो अपना है सपना नहीं होता है 
वह बस अपना होता है, अपना होता है 

चलो-आज भी तुझे ख्याल आया 
कि नहीं याद करना है मुझे 
चलो कितना अच्छा है सबब 
मैं ही याद कर लेता हूँ तुझे 







Thursday, August 28, 2014

आज सुबह सपने में देखा

आज तुम्हें सुबह सपने में देखा 
गुरुर में नहीं पर प्यार में देखा 
बैठे पास मंद-मंद मुस्कुरा रहे हो 
अंखिया से अंखिया मिला रहे हो 
मैंने बोला - कान इधर ला
कान में बोला - आई लव यू 
तुम मुस्कुराये फिर अंखिया मिलाये 
बोले - आगे भी कुछ बोलोगे 
तभी सुबह का घंटी बजा 
मुस्कुराता यादों में दिन बिता 
तुझे भी या कुछ ऐसा सपना आता है 
जो है पराया, पर अपना सा लगता है 

पहले तो अपना पन्ना स्थित कर किताब पर 
समझ नहीं आता तू है या कोई और 
भटक जाता हूँ जवाब देते देते 
बोल देता हूँ कही का कहीं कुछ और :)


Wednesday, August 27, 2014

खोया खोया चाँद

दिल दिल से बनी दिल्ली में 
एक दिल धड़क रहा है 
कायनात भी है खाली 
ऐसा दिल कह रहा है 

कौन लफ्ज उनके लिए चुनूँ  
मेरा मन कह रहा है 
अरमान है उनसे मिलने का 
मौका तलाश रहा है 

कहा जाऊँ मैं  उनसे मिलने
पहले भी भटक के आ गया है 
बस दूर से उन्हें देख के युहीं 
खाली हाथ आ गया है 

फरमान नहीं है मिलने का 
बहुत दूर है प्यार की बात
बात करना भी दूभर है 
करते हैं वो बड़ी बड़ी बात

सागर सा उन्हें दुःख है 
देखे तो है कितना रवानी 
मेरे पास भी है दिल-का-सागर 
जो समां लेते हैं रिस्ते पानी

चल चलते हैं किसी सागर पास 
जहाँ मिलते हैं सबके सारे आस 
चाँद भी लहर उठा हिलोरे देगा 
छंट जायेगा सारे दुःख के सांस 

ऐसे क्या देखते हो तुम 
दूर गगन में चाँद को 
मिला लो तुम अपनी सूरत 
कह दो मेरे मन-के-चाँद को 

बता भी दिया था एक दिन 
कि झांक लो बंद खिड़की से 
देखो इंगित किया है लाल से 
बैठ के बात तो हो अच्छे से 

देखो खो गया चाँद गगन में 
जो हैं मेरा दिल का तारा
ढूंढ़ता रहता हूँ सितारों में 
पर मिलता नहीं कोई किनारा 






Saturday, August 23, 2014

जीवन और प्यार

तुम अगर हवा होते,तो छोड़ देता 
कि बार बार आता है फिर आ जायेंगे 
तुम अगर बारिस होते तो जाने देता 
कि हर साल आते हैं फिर बरस जायेंगे 

तुम तो इतने अनुपम आनंदित अविचल अनूठे हो 
बिन हवा के हवा आ जाते,तेरे जुल्फों को लहराने को 
बिन मौषम बारिस आ जाते,तेरे को भिगाने को 
देखते देखते रूह एक हो जाते,जीवन को चलाने को 

कैसे कहुँ कि तुम कुछ नहीं थे 
कैसे अनदेखी करूँ कि तुम नहीं थे 
कैसे समझाऊं कि तुम ज्ञान नहीं थे 
कैसे बताऊँ कि बस तुम ही तुम थे 

प्यार का अगर मौषम होता 
मौषम कब का आकर चला  जाता 
प्यार का अगर कोई उम्र होता 
कब का जन्म लेकर मर गया होता 

प्यार अगर अल्फाज होता 
कब का वह बयाँ हो गया होता 
प्यार अगर  शब्द होता 
कब का शब्दों से शब्द निकलता जाता 

प्यार तो वो अल्फाज है 
मुस्कान है , 
अविचल है 
कल कल है 
पल पल है 
हर पल है 
निश्छल है 
जिवंत है 
प्राण है 
अपान  है 
रूह है 
धड़कन है 
धरकते दिल का हरकत है 
इस हरकत से मैं, तुम और सब हैं
यह धरा हैं, कायनात हैं 
बिन तुम के भी तुम हैं 
बिन हम के भी हम हैं 
जीवन सबका चलता जाता हैं 
आ गए तो जन्नत हैं 
नहीं आये तो "मैं" खत्म है. 

तुम कितना भी जोर लगाओगे 
तुम्हारे प्रति औपचारिकता नहीं हो पायेगा 
प्यार तो फूलों जैसा है 
मौषम रहे ना रहे खिलता रहेगा 
बहार आये ना आये महकता रहेगा 
तुम आ गए तो खुश हो लेगा 
वरना जीवन का काम है चलना 
यह तो चलता रहेगा 
घुट-घुट जीता रहेगा 
हम खुश हैं- खाली-खाली कहता रहेगा 
जीवन का काम है चलना 
यह चलता रहेगा-चलता रहेगा 



Friday, August 22, 2014

मनरंगी नाव

देख के तेरा अंदाज़ 
मुझे लगा कि एक कविता लिख दूँ   ;)
तुम सुनो ना सुनो 
मौषम ने कहा - मैं गुनगुना दूँ  :)

ऐसा नहीं कहता मेरा ये दिल 

कि ऐसे ना तुम देखा करो 
इसी मृगनयनी निगाहों से 
हक़ीक़त में मुझे देखा करो 

तेरे नटखट अदा से   

माहौल भी घबड़ा गया 
बिना नदी के भी धारा में 
मनरंगी  नाव आ गया 

बलखाने लगी नाव रुक-रुक के 

हाँथ बंधे डगमगाई टूक-टूक के 
कि गोरी चली है युहीं मुस्कुराने 
कोई टोके नहीं उसे झुक झुक के 

मुस्कराहट है आई ऐसी 

कि सतरंगी फूल खिल उठे 
इस सुने चबूतरे पे भी 
नदी में तरंग बहक उठे 

मुस्कराहट की लहर ऐसी है छाई

कि गाल में गढ़े पड़ने लगे तुझे 
तरंग के हिचकोले से हाँथ के बंधन 
कहते है दृस्य,प्रीत सम्भालो मुझे 

देख के तेरा- ये देखने का अंदाज़ 

ले आया है मौषम में बहता बहार 
निश्छल धारा युहीं निकलती गई 
बिन बादल के भी आ गई फुहार 

दिल में था कि उनकी तस्वीर यहाँ लगाऊँ
नाव में था कि दिल सा उनको इसमें बैठाऊँ
पर बैठना तो है जैसे बहुत दूर की बात 
बात भी नहीं होती,रह गई बस कहने की बात 

बस - देख के अंदाज़ तेरा 
मुझे लगा कि एक कविता लिख दूँ   ;)
तुम सुनो ना सुनो 
मुझे लगा कि मैं गुनगुना दूँ   :) 








तुम ख़ुदा हो

हे प्रभु-तुम जो भी, कुछ भी हो 
पर मेरे लिए ख़ुदा हो 
तुम्हे पता नहीं ख़ुदा का 
मुझे पता है, तुम ख़ुदा हो 

तेरे नाम से सांसे चलती है 
तेरे नाम से आहें भरती हैं 
तुम्हें पता नहीं तुम क्या हो
मुझे पता है, तुम ख़ुदा हो 

जो सजा तुम मुझे दे रहे या दिए 
उस सजा के मै काबिल नहीं 
फिर भी मैं,सजा भुगत लिया  
और आगे भी मुकुरुंगा नहीं 

तुमने क्या देखा दुनिया में 
इसका मुझे पता नहीं 
मैंने बहुत देखा है दुनिया 
इसका तुझे पता नहीं 

मैंने देखा केवल इंसान-व-ख़ुदा 
इसके सिवा और कोई नहीं 
इसमें तुम मुझे ख़ुदा दिखे
तुम और हो-मेरे काम का नहीं 

तुम राग हो-छंद हो-ताल हो 
दुनिया में सारे-के-सारे नाद हो 
तेरे बिना कोई सुर-राग नहीं 
सारा-का-सारा संसार हो 

जैसे ही तेरा नाम चला 
हाथ युहीं चलने लगा 
चलते-चलते अपने आप 
आँख से आंसू बहने लगा 

तुम जो भी, कुछ भी हो 
पर मेरे लिए ख़ुदा हो 
तुम्हे पता नहीं ख़ुदा का 

मुझे पता है, तुम ख़ुदा हो 

Thursday, August 21, 2014

तेरे करामात से निकला भजन

जब तु फूल बन कुछ अंकित कर रहा था 
नींद में आये भजन को मैं अंकन कर रहा था
तुम्हे पता नहीं-तुम क्या हो, सचमुच में अवतार हो 
देख लो मेरे कभी आँखों से-अगर तुम्हे विश्वास न हो

पता नहीं क्यों-तुझे धन्यवाद भी नहीं देना चाहता
तुझसे मुआफ़ी भी नहीं मांगना चाहता 
तेरे सामने गिरगिराना भी नहीं चाहता 
बस प्यार करना चाहता, बस दुलार करना चाहता 

ऐसा लगता हैं बहुत पी लिया, ऐसा लगता हैं बहुत जी लिया  
ऐसा जीना भी क्या जीना था जो तेरे रहते भी - तेरे बिन जिया 

अब छोडो यह भाव और सुनो कृष्णा का भजन, जो था सपने में आया  
और बताओ- कैसा हैं यह भजन, जो खुद तूने मेरे कान में आकर दिया  

भजन .......
=====
अति मनोरम मधुरम सुंदरम  
कन्हैया तेरे खेल निराले  
श्यामल कोमल रंग है तेरे 
कन्हैया तेरे नयन निराले 

यमुना तट पर नटखट कन्हैया
मुरली की धुन तू छेड़े .. कन्हैया..आआआआआआ
राधा प्यारी छुप-छुप तेरे ही धुन को सुने...कन्हैया..आआआआआआ
कन्हैया तेरे धुन बड़े निराले  

रास रचाये पुरे रस में , फिर भी मदन भगाये
रति को भी रतने न दिए तुम, दुनिया को भरमाये   
कन्हैया..आआआआआआ - तेरे हैं खेल निराले 

शिव-उमा के एकक रूप को पल-पल में सरल उतारे
राधा कौन - कृष्णा कौन - सारे  जग को भरमाये 
तेरे खेलsssss कन्हैया..आआआआआआ - तेरे खेल हैं बड़े निराले 



Wednesday, August 20, 2014

तेरा करामात

जिन्दा रहने को सांस की ज़रुरत होती 
तुम बन गए हो सांस, स्वतः नहीं ले पाता हूँ 
सांस लेने में अटक रहा था अभी 
जिन्दा रहने को तुम्हें बुला रहा हूँ 

तुम कहते, मेरे गुजरते ही 
मुर्दा भी ज़िंदा हो जाते 
और ज़िंदा को ही मार रहे हो 
कैसे तुम ये मेरे साथ ही कर पाते 

नफरत अगर तुझसे रहता 
यह कैसे तुम आंक लिए हो तुम 
तुम तो दिल में बसे हो,मृगनयनी
पता ही नहीं चलता - दिल है या तुम

सांस मिली दो मीठी शब्द सुन के 
शैली तो तेरा बदल गया है 
लग रहा था भगवन हो या देवी 
जो मेरा सांस वापस दे रहा है 

हाँ - हा..हा ..हा ..हा ..हा ..

तेरा खुराफात सब समझ गया हूँ 
पर इससे मैं नहीं भटकने वाला हूँ 
तुम्हें अच्छी तरह जान गया हूँ 

हा..हा ..हा ..हा ..हा ..

तुम कहीं गलत भी अगर रहे
तब भी तुम शुद्ध आत्म-तत्व ही रहोगे 
अपने ही तरह तुम्हें भी जान गया हूँ 

हा..हा ..हा ..हा ..हा ..

आध्यात्म मैंने जाना है 
अध्यन क्या है - यह पहचाना है 
तभी तो चुपचाप सा तुम्हें देखता रहा हूँ 

हा..हा ..हा ..हा ..हा ..

मैं इंतज़ार में था कि तुम मुझसे पूछोगे 
मेरे सामने आकर, आँखों में झांककर
ऐसा क्या है - जो इस तरह देखते मुझे 

पर तुमने आध्यात्म जाना नहीं था 
तुमने अध्यन पहचाना नहीं था 
कहाँ का बात कहाँ ले गए 

हा..हा ..हा ..हा ..हा ..

मैंने भी तुम्हें समझाने की कोशिश नहीं किया 
क्योंकि आध्यात्म दिमाग से नहीं 
दिल से सीखा जाता - और तुम दिमाग में थे 

हा..हा ..हा ..हा ..हा ..

अपना एक चेहरा छुपा के तूने 
कितने पन्ने जोड़ दिए चहेरे किताब पे
कितने को भरमा रहे,मुझे भी भरमा के  

हा..हा ..हा ..हा ..हा ..

आध्यात्म जो मैंने सीखी 
वह तुम्हें सोचते ही ख़त्म हो जाती (हा ..हा .)
तुम कहोगे-कैसे समझाओगे मुझे 
जब तुम ही भूल जाते हो  (हा ..हा .)

तुम हँसोगे हम पे - हा..हा ..हा ..हा ..हा ..

तुम कहोगे-झूट मुठ का 
भगवन भगवन कह रहे हो 
अपने भी भ्रम में हो 
मेरा समय भी बिगाड़ रहे हो 

हा..हा ..हा ..हा ..हा ..

सचमुच कुछ ऐसा ही है 
अब तुम ही कुछ भक्ति सीखा दो 
जो सिखाना है अब तुम ही सीखा दो :)

सचमुच .......

इस धरा पे बिलकुल तन्हा लगता 
अब तुम ही पथप्रदर्शक बनो 
तन्हा सा जी रहा हूँ, अब जीला दो  

हे प्रभु- अब बस भी करो 
अब और न भटकाओ मुझे 
मैं अब थक गया हूँ 
मैं अपने में भटक रहा हूँ 
संभाल लो मुझे सचमुच 
जैसे रखोगे रह लूंगा 
मैं अपने से अब थक गया हूँ 

Tuesday, August 19, 2014

दिल नहीं लग रहा है तेरे बिन

दिल नहीं लग रहा है तेरे बिन 
चल जरा घूम के आते हैं 
नज़रे मिलाते हैं,बात करते हैं 
दिल नहीं लग रहा है तेरे बिन....

क्यों मैं तुझसे जुड़ गया 

क्यों तुम इतने अच्छे थे 
क्यों तुम इतने दूर हो गए 
दिल नहीं लग रहा है तेरे बिन 
चल जरा घूम के आते हैं 
नज़रे मिलाते हैं,बात करते हैं 
दिल नहीं लग रहा है तेरे बिन ....

प्यार में गिरगिराना 

मुझे भी अच्छा नहीं लगता 
तुझे भी अच्छा नहीं लगता
गरिमा के साथ रहना 
मुझे भी अच्छा लगता 
तुझे भी अच्छा लगता 
पर तेरे साथ गिरगिराने का दिल नहीं करता 
तुम बिलकुल अपने लगते हो 
तेरे साथ गरिमा के साथ रहने को दिल करता 
तुम सचमुच अपने लगते हो 
चल साथ साथ बोलते हैं 
चल एक साथ बोलते हैं 
दिल नहीं लग रहा है तेरे बिन 
चल जरा घूम के आते हैं 
नज़रे मिलाते हैं,बात करते हैं 
दिल नहीं लग रहा है तेरे बिन ...



मुहब्बत एक अहसास है

मुहब्बत एक अहसास है 
अल्फ़ाज़ है, छंद है, कविता है 
तरंग है, उमंग है,
बोल है, ताल है, लय  है,
मुस्कान है, चमक है, रौनक है,

जिसे देखते ही मन गाने लगता है 
"पल पल दिल के पास तुम रहती हो"
दिल धड़क कर गाने लगता है 
"होsss -धक धक करने लगा-जियड़ा जलने लगा"
मृगनयनी नयन पे नज़र पड़ते ही बोल पड़ते हैं 
"तेरे मस्त मस्त ये नयन, दिल का ले गए चैन"
बिंदिया देखते ही गाने लगता है 
"तेरी बिंदिया रेss -सजन बिंदिया ले लेगी तेरी निंदिया रेss"
काजल को देख गाना निकलता है 
"कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना"
कान के झुमके से आवाज़ आने लगती है 
"बरेली के बाजार में झुमका गिरा रेss "
सुराहीदार गर्दन को देखते ही बोल पड़ता है 
"वो हंसिनी-मेरी हंसिनी - कहाँ उड़ चली"
बदन देखते ही निकल पड़ता 
"चन्दन सा बदन,चंचल चितवन, धीरे से तेरा ये मुस्काना"
चाल देखते ही निकल पड़ता है 
"तौबा ये मतवाली चाल,झुक जाए फूलो की डाल"
पॉव देखते ही पाकीज़ा के बोल आ जाते है 
"आपके पॉव देखे, बहुत हसीं है - इन्हे ज़मीन पर मत उतारियेगा, मैले हो जायेंगे"
उन्हें देखते ही गाने लगता 
"सागर किनारे -दिल ये पुकारे-कि तू जो नहीं तो मेरा कोई नहीं है"
और मन में होने लगता
"पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले, झूठा ही सही


सचमुच मैं-मैं नहीं रहता 
वो-वो नहीं रहता 
दोनों मिल के एक हो जाते 
दोनों घुल के पानी हो जाते 
कौन मैं था - कौन तू था 
कोई विचार नहीं रहता 
कोई भेद नहीं रहता 
उसका कोई गलती भी गलत नहीं लगता 

और सही तो बस अनुपम महसूसता 
अनूठा सा अनुपम भाव रहता
मुस्कान रहता, अहसास रहता,
न पास होते हुए भी, पास होता.
यही अहसास मरने नहीं देता 
यही अहसास जीने भी नहीं देता 
बस वह रहता और मैं रहता.



Saturday, August 16, 2014

छुटियाँ बिना काम के

कितनी अच्छी छुटियाँ थी 
आ जाते  हम हिल-मिल के 
वो दूर गगन के तारे 
बुला भी लेते घुल-मिल के 

देखा है समंदर उनके आँखों में 
तूफ़ान को सीने में समेटे हुए 
कभी फूल बनकर तरंग लुटाते 
हकीकत में मुँह मोड़ते हुए 

क्या करुँ मैं, मैं तो मदहोश हूँ 
कबसे आगोस समेटे हुए 
वर्ष-दर-वर्ष युहीं बीत गए 
आँख-मिचौली खेलते हुए 

कहाँ  जाऊँ मैं मिलने उनसे 
वो आकर भी युहीं चले गए 
कल भी भेजा था अभिवादन 
पर उसका भी नहीं जवाब दिए 

रहे मृगनयनी तू खुश हमेशा यूँही 
हम-सबका जीवन चलता रहेगा 
सपना कभी अपना,अपना कभी सपना
जीवन में युहीं रोज आता रहेगा 

अब छोड़ भी दे जिद्द अपना 
कितने पत्थर दिल हो गए हो 
इतने दिन साथ रहे फिर भी 
तंग-दिल जैसे बैठे हुए हो 

पता नहीं क्यों, तुझसे दूर नहीं रहा जाता 
कितना भी मैं दूर हूँ,पर महसूस नहीं होता 
ऐसा लगता-सारे कायनात में बस तुम हो
और हम-दो अलग हैं,सच नहीं लगता 


Friday, August 15, 2014

दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो

एक ग़ज़ल 
=========

दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो 
तुम इबाबत हो मेरी - सजदा हो मेरी 
सजदा करने का हक़ तो दिया करो 
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो 
दूर जाने..

प्यार क्या है यह हमने जाना ही नहीं 
प्यार करने की ताक़त   
हमें दिया तो करो 
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो 
दूर जाने..

तुम मुक़ददर हो मेरा 
हकीकत हो मेरा 
झूट कहने की ताक़त युँ लाया ना करो 
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो 
दूर जाने..

जाना हमने अबतक बस एक रूह को 
जो धरकता है मेरे दिल में कबसे 
उस रूह को तो पहचान लो 
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो 
दूर जाने..

बात करते हो तुम कैसे लिख-लिख के 
उसे करने की कबसे है आरज़ू 
देखता हूँ तुम्हे जब बात करते 
मुझे भी तो कुछ अब सिखाया करो 
दूर जाने..

कोई नहीं है इस धरती पर 
इस जहाँ में  बस तुम ही दीखते हो 
भले तुम्हें मिल जायेंगे अनेकों 
पर मेरे लिए तुम ही सजदा हो 
दूर जाने..

देखता हूँ जब मैं तुझे औरो संग 
देखता हूँ तुम्हें मैं अलग कर के 
तुम दिखते हो सचमुच नायब सा 
मुस्कुराते हुए डिंपल को तो देख लो 
दूर जाने..

आंसू निकल जाते तस्वीर देखते देखते 
रात कैसे कटती पता ही नहीं 
दिन कटते है बस तेरे इंतज़ार में 
सीधे अविवादन का उतर तो दिया करो 
दूर जाने..

लिखते लिखते ग़ज़ल कब बन जाते हैं
सचमुच के तुम मेरे ग़ज़ल हो 
युँ नयनों से तुम ना बहाओ मोती 
इन मोतियों की कीमत तो मुझसे पूछ लो 
दूर जाने..

दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो 
तुम इबाबत हो मेरी,सजदा हो मेरी 
सजदा करने का हक़ तो दिया करो 
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने.. 



Wednesday, August 13, 2014

You are a Star

You are a Star
Not a planet
Not a moon
Not a satellite
You are a Star

You are a Star

who always shines
who always sparks
who always lights
You are a star

Always you shine, Gives the rays
You not take the Other rays
You be stable let planet travel
You be quite let moon roam a while
You are a Star 

No one can beat you
No one can defeat you
Feel proud and wonderful
You are the Star

When some cloud

Passes me across
I say-not rain
My Doe is away
You are a star

You are a Star

Not a planet
Not a moon
Not a satellite
You are a Star






You are so Special

You are so Special
So Precious
So Amazing in my Life

You do not know
I know
Dreaming you
Powers my imagination 
Thinking you
Brings my Smile back
Seeing you
Brust my bliss-laugh
Feeling you
Sets my Goal
Feel of Touching you
Heals my pain
Feel of Talking you
Makes my Day

Why should I not say
You are So Special
So Precious
So Amazing in my Life

I may not be Special for you
But You are So Special
So Precious
So Amazing in my Life


सोलह श्रृंगार

तू  करके सोलह श्रृंगार 
तू कैसी लगेगी 
तुझे मृगनयनी मन-मोहिनी 
सारी दुनिया कहेगी 

तन  महका-मन बहका
तुम बहुत खूब लगोगे 
खूबसूरत रंग बसंती 
सारी दुनिया कहेंगे 

तेरे नयनों के ये काजल 
बहुत कुछ कहेंगे 
मृगनयनी दिल-मोहिनी 
सारे लोग कहेंगे 

बालों में लगा के गज़रा 
कैसे दिखेंगे 
बिन बादल बरसात आये 
मोर नाचेंगे 

तेरे माथे पे टिका 
कैसे चढ़ेंगे 
बिंदिया की चमक से 
तेरे साजन चहकेंगे 

तेरे कानों  में झुमका 
कैसे सजेंगे 
ठुमकती हुई चल में 
हिल-हिल के गाएंगे 

तेरे नाक की नथुनी   
कैसे नठेंगे 
तेरे नकली गुस्से में 
बिजली कौंधेंगे

तेरे गालों की सुर्ख गुलाबी 
कैसे रंगेंगे 
तेरे रसीले होंठो पे 
खूब लगेंगे 

हंसिनी गर्दन में जेवर 
कैसे दिखेंगे 
मुझे सूत्र में बाँध ले 
दोनों के दिल कहेंगे 

तेरे हाथों के बाजूबंद 
कैसे बंधेंगे 
तेरे हाथों के कंगन-संग 
खूब बजेंगे 

तेरे कमर की कमरघनी  
कैसे कसेंगे 
गदराये बदन के रस में 
मौषम चहकेंगे 

तेरे पावों के पायल 
कैसे बजेंगे 
छम-छम की आवाज़ से 
आँगन गूंजेंगे 

तेरे हांथो के मेहँदी 
कैसे दिखेंगे 
नाखून के रंग संग 
सतरंगी लगेंगे 

तेरे बदन पे ये चुनरी 
कैसे दिखेंगे 
चांदनी उतर आई हो 
सारे लोग कहेंगे 

सतरंगी बहार आई 
सोलह श्रृंगार चहकेंगे 
चली साजन से मिलने  
तेरी हर-बात कहेंगे 

तू  करके सोलह श्रृंगार 
तू में ऐसे लगोगे 
चार-चाँद लग गई हो मृगनयनी में 
सारे दुनिया कहेंगे 




कैसे पूछ लेते सवाल

इतना कैसे पूछ लेते सवाल 
मेरे आँखों में झांककर 
मैं तो देखते ही खो जाता हूँ 
तेरे आँखों में झांककर 

देख-एक झटका लगेगा "हमें"  
दोनों को मुखातिब होने में 
फिर तस्सली से बात होगी 
सभी जवाब मिल जायेंगे उत्तर में 

एक बात यह है,ये तू जान ले 
क्यों करता मैं तुझसे प्यार 
इसका नहीं कोई मेरे पास जवाब 
देखा था पहली बार-हो गया था प्यार 

शुरू में मैं, दुनिया के रंगों में चला 
बहुत समझाया अपने को,पर हारता गया 
जिसके लिए मैं था इंतज़ार में जनम से 
उसे कैसे मैं अनजान बन के हूँ दूर किया 

ना दिखा उम्र, ना दिखा मेरी स्थिति 
मुझे तो बस मिल गई मेरी पार्वती
शंकर का भी बहुत उम्र हुआ था 
जब उन्हें मिली थी उनकी पार्वती 

उम्र की बात अगर तुझे खलता है 
लो आज मैं ये शरीर छोड़ता हूँ 
तब जो "मैं" लूंगा अगला जन्म  
तब क्या मानोगे मुझे सनम 

मैं समझता हूँ अब जीवन क्या है 
यह दुनिया बस प्रभु का माया-खेल है
आत्मा-का-आत्मा से जबतक नहीं मिलता 
तबतक जीवन युहीं बस  खेलता रहता है 

इस क़ायनात को सरफिरे शरीरों ने 
बाँट दिया अंगिनत सरहदों में 
और अँधे  बन के धृतराष्ट्र-गंधारी सा    
घुलते रहते  दुनिया के उलझन में 

देख कहा से कहा तक बात चली 
प्यार-से-दर्शन के तरफ मुड़ गए 
मैं सचमुच कहता वो मृगनयनी 
तू है कोई अवतार-जो मेरे से जुड़ गए  

तुझे यह देख क्यों नहीं लगता 
तू हरवक्त होते हो-हरसमय सोचता 
जैसे ही तुझे देखता या सुनता 
बस हाथ लिखता जाता-कहता जाता 


जब प्राण तन से निकले

  एक भक्ति-ग़ज़ल का रूपांतरण मृगनयनी के अंदाज़ में 


इतना तो करना मृगनयनी 
जब प्राण तन से निकले 
नयनों में काजल लगी हो 
बलखाती बाल बिखड़ी हो 
मुख पे गुलाबी छवि हो 
सोलह श्रृंगार से सजी हो 
पीताम्बरी परिधान लिपटी हो 
कंचुकी में दुपटा हो 
तेरी चाल मेरे तरफ हो 
तब प्राण तन से निकले 

मृगनयनी मन-मोहिनी 
चांदनी-चाँद-चकोरी 
बसंती सा सावन रूख हो 
सागर का वो तट हो 
बदली सी घटा  हो 
हलकी हलकी हवा हो 
रिमझिम की फुहार हो 
तू मेरे निकट हो 
तब प्राण तन से निकले 

मुख में तेरा नाम बसा हो 
मौषम भी सुधरा हो 
आत्मभाव से प्रेरित हो 
मेरा दर्पण-आत्मा खड़ा हो 
दोनों लूटने को तज्य हो 
हम लुटाने को सज्य हो 
लूटने लुटाने कोई भाव ना हो
प्रभु का हम-दोनों पे आशीर्वाद हो 
तब प्राण तन से निकले 


Tuesday, August 12, 2014

टकटकी लगा के ना देखा कर

वो मृगनयनी दिल-मोहिनी 
ऐसे टकटकी लगा के ना देखा कर 
तुझसे प्यार हो जायेगा मुझे 
ऐसे बाल बिखड़ा के ना बैठा कर 

तूने इज़ाज़त ही नहीं दी प्यार करने की 
वरना यह रूप देख आ गया होता भागकर 
और तोड़ देता तेरी टकटकी अंदाज़ को
तेरे आँखों में झांकते अपनी चुटकी बजाकर

और चुम लेता इन आँखों को 
तेरे झपकते हुए प्यारे पलकों पर 
और उड़ा देता रेशमी बालों को   
लहराते हुए सुर्ख गुलाबी चेहरे पर 

कई बार तुझसे जानना चाहा 
देखने के अंदाज़ पे पूछना चाहा 
तेरा देखने के अंदाज़ 
है बड़ा निराला 
है बड़ा अजूबा 
है बड़ा मनमोहक  
है बहुत अलग सा 
कि देखते वक़्त क्या सोचते हो 
कि देखते हुए कैसे देखते हो 
ऐसा लगता है-दिल से देखते हो 
ऐसा लगता है-तेरे नज़र जिस पे भी जाते 
वो सारे चीज़ें दिखने को इंतज़ार में हो 
दिखाने को तत्पर हो 
और तुम देखते हुए उन्हें  
दर्शन दे रहे हो 
अपने अनुपम मृगनयनी नयनों से.

तेरे मृगनयनी आँखें ऐसे हैं 
मानो जीवंत कर दे मृत को 
प्यास मिटा दे प्यासे को 
अनुराग जगा दे कातिल को 

तेरे देखने से निकलती नूर 
चार-चाँद लगाती बनती हूर 
तुम हो वो खूबसूरत मलिक्का 
लगते पानी भरते हैं सारे तारिका

तुम हो वो अनमोल नायाब अमृत 
कि मरता रहूँगा अगर कभी 
तो जी उठूंगा फिर से उसी वक़्त सही 
अगर साथ आ गए मेरे नसीब से 
तो यह शरीर से नहीं जाऊंगा  कभी 
और तू जब अपने मन से शरीर छोड़ना चाहोगे  
जायेंगे तब "हम" साथ-साथ सही 

तू मृगनयनी चित-चोरनी 
क्यों मुझसे दूर रहते हो 
तेरे सकल-ज्ञानी मधुर-वाणी से 
मेरे कान सुनने को आतुर हो 

दुःख होता अपने पे बहुत मुझे 
तू जितनी नायाब हो, उतना मैं नहीं 
तभी तो तेरे गीत गाता अकेला 
पता नहीं-तू सुनते भी या नहीं 

मुझे अबतक नहीं पता 
तुम मुझे भाव देते भी हो या नहीं 
चेहरे किताब की भाषाएँ 
भरमाती है पर रास्ता दिखाती नहीं 

दिल में बहुत बार आता 
कि तुम्हें मना लू जाकर वही 
पर दिल मायूस हो जाता-कहता 
उन्हें मेरी ज़रूरत नहीं 

उन्हें ज़रुरत होती 
तो वो दूर भेजते ही कभी 
उन्हें अगर प्यार होता 
तो वर्ष-दर-वर्ष बीते-बात क्या नहीं करते कभी 
उनके दिल में मेरा जगह होता 
तो बंद कपट क्या नहीं खोलते कभी 
मेरे लिए कोई भावना होती 
तो वो क्या नहीं जताते कभी 
घंटो वो किस - किस से बात करते 
क्या मुझसे बात नहीं करते  कभी 

वो अनमोल नायाब मृगनयनी परी   
प्यार सच्ची क्या होता- मुझे पता है 
दिल क्या होता- मुझे पता है 
रूह क्या होता- मुझे पता है 
जीवन क्या होता - मुझे पता है 
जीना क्या होता - मुझे पता है 
तेरे बिन जीना क्या होता - मुझे पता है 
तेरे संग क्या होगा जीना - मुझे पता है 
और तेरा क्या जीवन होगा मेरे साथ - वह भी पता है.

कभी "पल-भर" के गाने की तरह
बंद खिड़की को खोल तो दो 
गाना गुनगुना तो दो
मुझे कुsss करके बता तो दो 

वरना अबतक यही समझ रहा 
लिखने के लिए किताब लिख रहा 
अपने मन को बहला रहा 
रोज सपने में तुझे बुला रहा 

क्या तुम नहीं सोचते कि 
हरवक्त तुझे सोचता हूँ मैं 
तभी तो तुझे देखते ही 
कुछ कहने को टूट पड़ता हूँ मैं 

कितना भी लिखूं - कम लगता है 
तेरे संग गीत गुनगुनाऊँ-हसीन लगता है 
तुम गाओगे - सपना लगता है 
तुझ में मैं लय हो जाऊं - अपना लगता है