Wednesday, August 27, 2014

खोया खोया चाँद

दिल दिल से बनी दिल्ली में 
एक दिल धड़क रहा है 
कायनात भी है खाली 
ऐसा दिल कह रहा है 

कौन लफ्ज उनके लिए चुनूँ  
मेरा मन कह रहा है 
अरमान है उनसे मिलने का 
मौका तलाश रहा है 

कहा जाऊँ मैं  उनसे मिलने
पहले भी भटक के आ गया है 
बस दूर से उन्हें देख के युहीं 
खाली हाथ आ गया है 

फरमान नहीं है मिलने का 
बहुत दूर है प्यार की बात
बात करना भी दूभर है 
करते हैं वो बड़ी बड़ी बात

सागर सा उन्हें दुःख है 
देखे तो है कितना रवानी 
मेरे पास भी है दिल-का-सागर 
जो समां लेते हैं रिस्ते पानी

चल चलते हैं किसी सागर पास 
जहाँ मिलते हैं सबके सारे आस 
चाँद भी लहर उठा हिलोरे देगा 
छंट जायेगा सारे दुःख के सांस 

ऐसे क्या देखते हो तुम 
दूर गगन में चाँद को 
मिला लो तुम अपनी सूरत 
कह दो मेरे मन-के-चाँद को 

बता भी दिया था एक दिन 
कि झांक लो बंद खिड़की से 
देखो इंगित किया है लाल से 
बैठ के बात तो हो अच्छे से 

देखो खो गया चाँद गगन में 
जो हैं मेरा दिल का तारा
ढूंढ़ता रहता हूँ सितारों में 
पर मिलता नहीं कोई किनारा 






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