Thursday, August 28, 2014

आज सुबह सपने में देखा

आज तुम्हें सुबह सपने में देखा 
गुरुर में नहीं पर प्यार में देखा 
बैठे पास मंद-मंद मुस्कुरा रहे हो 
अंखिया से अंखिया मिला रहे हो 
मैंने बोला - कान इधर ला
कान में बोला - आई लव यू 
तुम मुस्कुराये फिर अंखिया मिलाये 
बोले - आगे भी कुछ बोलोगे 
तभी सुबह का घंटी बजा 
मुस्कुराता यादों में दिन बिता 
तुझे भी या कुछ ऐसा सपना आता है 
जो है पराया, पर अपना सा लगता है 

पहले तो अपना पन्ना स्थित कर किताब पर 
समझ नहीं आता तू है या कोई और 
भटक जाता हूँ जवाब देते देते 
बोल देता हूँ कही का कहीं कुछ और :)


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