तू करके सोलह श्रृंगार
तू कैसी लगेगी
तुझे मृगनयनी मन-मोहिनी
सारी दुनिया कहेगी
तन महका-मन बहका
तुम बहुत खूब लगोगे
खूबसूरत रंग बसंती
सारी दुनिया कहेंगे
तेरे नयनों के ये काजल
बहुत कुछ कहेंगे
मृगनयनी दिल-मोहिनी
सारे लोग कहेंगे
बालों में लगा के गज़रा
कैसे दिखेंगे
बिन बादल बरसात आये
मोर नाचेंगे
तेरे माथे पे टिका
कैसे चढ़ेंगे
बिंदिया की चमक से
तेरे साजन चहकेंगे
तेरे कानों में झुमका
कैसे सजेंगे
ठुमकती हुई चल में
हिल-हिल के गाएंगे
तेरे नाक की नथुनी
कैसे नठेंगे
तेरे नकली गुस्से में
बिजली कौंधेंगे
तेरे गालों की सुर्ख गुलाबी
कैसे रंगेंगे
तेरे रसीले होंठो पे
खूब लगेंगे
हंसिनी गर्दन में जेवर
कैसे दिखेंगे
मुझे सूत्र में बाँध ले
दोनों के दिल कहेंगे
तेरे हाथों के बाजूबंद
कैसे बंधेंगे
तेरे हाथों के कंगन-संग
खूब बजेंगे
तेरे कमर की कमरघनी
कैसे कसेंगे
गदराये बदन के रस में
मौषम चहकेंगे
तेरे पावों के पायल
कैसे बजेंगे
छम-छम की आवाज़ से
आँगन गूंजेंगे
तेरे हांथो के मेहँदी
कैसे दिखेंगे
नाखून के रंग संग
सतरंगी लगेंगे
तेरे बदन पे ये चुनरी
कैसे दिखेंगे
चांदनी उतर आई हो
सारे लोग कहेंगे
सतरंगी बहार आई
सोलह श्रृंगार चहकेंगे
चली साजन से मिलने
तेरी हर-बात कहेंगे
तू करके सोलह श्रृंगार
तू में ऐसे लगोगे
चार-चाँद लग गई हो मृगनयनी में
सारे दुनिया कहेंगे
तू कैसी लगेगी
तुझे मृगनयनी मन-मोहिनी
सारी दुनिया कहेगी
तन महका-मन बहका
तुम बहुत खूब लगोगे
खूबसूरत रंग बसंती
सारी दुनिया कहेंगे
तेरे नयनों के ये काजल
बहुत कुछ कहेंगे
मृगनयनी दिल-मोहिनी
सारे लोग कहेंगे
बालों में लगा के गज़रा
कैसे दिखेंगे
बिन बादल बरसात आये
मोर नाचेंगे
तेरे माथे पे टिका
कैसे चढ़ेंगे
बिंदिया की चमक से
तेरे साजन चहकेंगे
तेरे कानों में झुमका
कैसे सजेंगे
ठुमकती हुई चल में
हिल-हिल के गाएंगे
तेरे नाक की नथुनी
कैसे नठेंगे
तेरे नकली गुस्से में
बिजली कौंधेंगे
तेरे गालों की सुर्ख गुलाबी
कैसे रंगेंगे
तेरे रसीले होंठो पे
खूब लगेंगे
हंसिनी गर्दन में जेवर
कैसे दिखेंगे
मुझे सूत्र में बाँध ले
दोनों के दिल कहेंगे
तेरे हाथों के बाजूबंद
कैसे बंधेंगे
तेरे हाथों के कंगन-संग
खूब बजेंगे
तेरे कमर की कमरघनी
कैसे कसेंगे
गदराये बदन के रस में
मौषम चहकेंगे
तेरे पावों के पायल
कैसे बजेंगे
छम-छम की आवाज़ से
आँगन गूंजेंगे
तेरे हांथो के मेहँदी
कैसे दिखेंगे
नाखून के रंग संग
सतरंगी लगेंगे
कैसे दिखेंगे
चांदनी उतर आई हो
सारे लोग कहेंगे
सतरंगी बहार आई
सोलह श्रृंगार चहकेंगे
चली साजन से मिलने
तेरी हर-बात कहेंगे
तू करके सोलह श्रृंगार
तू में ऐसे लगोगे
चार-चाँद लग गई हो मृगनयनी में
सारे दुनिया कहेंगे


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