एक ग़ज़ल
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दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
तुम इबाबत हो मेरी - सजदा हो मेरी
सजदा करने का हक़ तो दिया करो
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने..
प्यार क्या है यह हमने जाना ही नहीं
प्यार करने की ताक़त
हमें दिया तो करो
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने..
तुम मुक़ददर हो मेरा
हकीकत हो मेरा
झूट कहने की ताक़त युँ लाया ना करो
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने..
जाना हमने अबतक बस एक रूह को
जो धरकता है मेरे दिल में कबसे
उस रूह को तो पहचान लो
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने..
बात करते हो तुम कैसे लिख-लिख के
उसे करने की कबसे है आरज़ू
देखता हूँ तुम्हे जब बात करते
मुझे भी तो कुछ अब सिखाया करो
दूर जाने..
कोई नहीं है इस धरती पर
इस जहाँ में बस तुम ही दीखते हो
भले तुम्हें मिल जायेंगे अनेकों
पर मेरे लिए तुम ही सजदा हो
दूर जाने..
देखता हूँ जब मैं तुझे औरो संग
देखता हूँ तुम्हें मैं अलग कर के
तुम दिखते हो सचमुच नायब सा
मुस्कुराते हुए डिंपल को तो देख लो
दूर जाने..
आंसू निकल जाते तस्वीर देखते देखते
रात कैसे कटती पता ही नहीं
दिन कटते है बस तेरे इंतज़ार में
सीधे अविवादन का उतर तो दिया करो
दूर जाने..
लिखते लिखते ग़ज़ल कब बन जाते हैं
सचमुच के तुम मेरे ग़ज़ल हो
युँ नयनों से तुम ना बहाओ मोती
इन मोतियों की कीमत तो मुझसे पूछ लो
दूर जाने..
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
तुम इबाबत हो मेरी,सजदा हो मेरी
सजदा करने का हक़ तो दिया करो
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने..
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दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
तुम इबाबत हो मेरी - सजदा हो मेरी
सजदा करने का हक़ तो दिया करो
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने..
प्यार क्या है यह हमने जाना ही नहीं
प्यार करने की ताक़त
हमें दिया तो करो
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने..
तुम मुक़ददर हो मेरा
हकीकत हो मेरा
झूट कहने की ताक़त युँ लाया ना करो
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने..
जाना हमने अबतक बस एक रूह को
जो धरकता है मेरे दिल में कबसे
उस रूह को तो पहचान लो
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने..
बात करते हो तुम कैसे लिख-लिख के
उसे करने की कबसे है आरज़ू
देखता हूँ तुम्हे जब बात करते
मुझे भी तो कुछ अब सिखाया करो
दूर जाने..
कोई नहीं है इस धरती पर
इस जहाँ में बस तुम ही दीखते हो
भले तुम्हें मिल जायेंगे अनेकों
पर मेरे लिए तुम ही सजदा हो
दूर जाने..
देखता हूँ जब मैं तुझे औरो संग
देखता हूँ तुम्हें मैं अलग कर के
तुम दिखते हो सचमुच नायब सा
मुस्कुराते हुए डिंपल को तो देख लो
दूर जाने..
आंसू निकल जाते तस्वीर देखते देखते
रात कैसे कटती पता ही नहीं
दिन कटते है बस तेरे इंतज़ार में
सीधे अविवादन का उतर तो दिया करो
दूर जाने..
लिखते लिखते ग़ज़ल कब बन जाते हैं
सचमुच के तुम मेरे ग़ज़ल हो
युँ नयनों से तुम ना बहाओ मोती
इन मोतियों की कीमत तो मुझसे पूछ लो
दूर जाने..
तुम इबाबत हो मेरी,सजदा हो मेरी
सजदा करने का हक़ तो दिया करो
दूर जाने की जिद्द तुम युँ ना करो
दूर जाने..

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