सपना कैसा होता है, कोई मुझसे पूछे
अपना कैसा होता है, कोई मुझसे पूछे
सपना में हरतरफ धुआँ ही धुआँ होता है
कुछ साफ़ नहीं,फिर भी आस दीखता है
अपना में हरतरफ हरियाली होती है
सबकुछ साफ़, स्वच्छ और मधुर होती है
सपना में जज़बात होता है
बिना बात का बात होता है
अपना में अपनापन होता है
न बात रहते हुए भी बात होता है
सपना में दिल में एक तबस्सुम होता है
खुशगवार सा हर मौसम होता है
अपना में चेहरे पे खिलखलाहट होती है
हर आहट पे अपनेआप एक बात होती है
जब भी कहोगे सपने में भी पहल करने को
वह सपने की बात नहीं - अपने जैसे होती है
अपने में पहल करने की अलग जज़बात होती है
तुम पहल को सार्थक करो न करो,पर बात होती है
पहल करते समय जो दिल में धड़कन होता है
वह तबस्सुम बन के गालों पर उभरता है
तुम देख रहे हो उस तबस्सुम को अपने नजरो से
ऐसी हलकी हलकी सी अहसास होता है
मेरा तो यह सचमुच पहला अनुभव है
ऐसे में सपना भी अपना सा लगता है
तुम खेलते हो या खोते हो मेरे जज्बातों से
पर सचमुच सपना भी अपना सा लगता है
सपना कैसा होता है, कोई मुझसे पूछे
अपना कैसा होता है, कोई मुझसे पूछे
अपना कैसा होता है, कोई मुझसे पूछे
सपना में हरतरफ धुआँ ही धुआँ होता है
कुछ साफ़ नहीं,फिर भी आस दीखता है
अपना में हरतरफ हरियाली होती है
सबकुछ साफ़, स्वच्छ और मधुर होती है
सपना में जज़बात होता है
बिना बात का बात होता है
अपना में अपनापन होता है
न बात रहते हुए भी बात होता है
सपना में दिल में एक तबस्सुम होता है
खुशगवार सा हर मौसम होता है
अपना में चेहरे पे खिलखलाहट होती है
हर आहट पे अपनेआप एक बात होती है
जब भी कहोगे सपने में भी पहल करने को
वह सपने की बात नहीं - अपने जैसे होती है
अपने में पहल करने की अलग जज़बात होती है
तुम पहल को सार्थक करो न करो,पर बात होती है
पहल करते समय जो दिल में धड़कन होता है
वह तबस्सुम बन के गालों पर उभरता है
तुम देख रहे हो उस तबस्सुम को अपने नजरो से
ऐसी हलकी हलकी सी अहसास होता है
मेरा तो यह सचमुच पहला अनुभव है
ऐसे में सपना भी अपना सा लगता है
तुम खेलते हो या खोते हो मेरे जज्बातों से
पर सचमुच सपना भी अपना सा लगता है
सपना कैसा होता है, कोई मुझसे पूछे
अपना कैसा होता है, कोई मुझसे पूछे


No comments:
Post a Comment