ये हुई न बात - तिरंगी बहार में
सतरंगी बहार कही खो गई थी
आया जो बदलाव मौषम में
मनमोहक अदाएं छा गई थी
क्या चमक है इन आँखों में
सचमुच स्वर्ग भी कर दूँ कुर्बान
ऐसे लगता है मौषम को देखकर
जैसे बोल पड़ेगी तस्वीरें-जुबान
कितना भी कुछ कह ले कोई
कितना भी कुछ रोक ले कोई
चाहे ले चल न्यायालय कोई
तेरा जगह नहीं ले सकेगा कोई
तू अनमोल है, बिना बोल के बोल है
तू ताल है, तू शब्द है, तू मर्म है, तू जान है
तू ही तू - बस तू ही तू, तू ही दिल की धड़कन है
तू नहीं तो-मैं कुछ भी नहीं-बस तू मेरी जान है
तुझमें ऐसे शक्ति है - वह भक्ति बन जाती
तुझमें ऐसी नूर है - मेरी चमक बन जाती
तुझमें ऐसी विशवास है - मेरी आस बन जाती
तुझमें ऐसी मर्यादा है - पर मेरी टूट जाती
रूक जाता हूँ सोचकर-मेरे लिए सब तू है
पर तेरे लिए मैं क्या हूँ -बस एक प्रश्न चिह्न
मर्यादा आड़े आती - दुनिया खड़ी हो जाती
बिना तेरे-कैसे पायेगा "तू-मैं से हम" का चिह्न
सचमुच जैसे ही तुम याद आते
भूल जाता - मैं कौन हूँ
भूल जाता - मेरी उम्र क्या है
भूल जाता - मर्यादा क्या है
भूल जाता - करना क्या है
भूल जाता - मेरी गलती क्या है
भूल जाता - मेरी सही क्या है
भूल जाता - कल क्या है
भूल जाता - बिता कल क्या है
बस केवल तू और वर्तमान रहता
मेरे "मैं" को केंद्रित किये
कभी "तुमको" केंद्रित किये
कभी "हमदोनों" केंद्रित हुए
कभी वर्तमान को केंद्रित किये
सचमुच तू बहार है,फुहार है,
सतरंगी है, मनरंगी है
निश्छल है, जलतरंग है
विधाता की अनमोल कृति है :)
सतरंगी बहार कही खो गई थी
आया जो बदलाव मौषम में
मनमोहक अदाएं छा गई थी
क्या चमक है इन आँखों में
सचमुच स्वर्ग भी कर दूँ कुर्बान
ऐसे लगता है मौषम को देखकर
जैसे बोल पड़ेगी तस्वीरें-जुबान
कितना भी कुछ कह ले कोई
कितना भी कुछ रोक ले कोई
चाहे ले चल न्यायालय कोई
तेरा जगह नहीं ले सकेगा कोई
तू अनमोल है, बिना बोल के बोल है
तू ताल है, तू शब्द है, तू मर्म है, तू जान है
तू ही तू - बस तू ही तू, तू ही दिल की धड़कन है
तू नहीं तो-मैं कुछ भी नहीं-बस तू मेरी जान है
तुझमें ऐसे शक्ति है - वह भक्ति बन जाती
तुझमें ऐसी नूर है - मेरी चमक बन जाती
तुझमें ऐसी विशवास है - मेरी आस बन जाती
तुझमें ऐसी मर्यादा है - पर मेरी टूट जाती
रूक जाता हूँ सोचकर-मेरे लिए सब तू है
पर तेरे लिए मैं क्या हूँ -बस एक प्रश्न चिह्न
मर्यादा आड़े आती - दुनिया खड़ी हो जाती
बिना तेरे-कैसे पायेगा "तू-मैं से हम" का चिह्न
सचमुच जैसे ही तुम याद आते
भूल जाता - मैं कौन हूँ
भूल जाता - मेरी उम्र क्या है
भूल जाता - मर्यादा क्या है
भूल जाता - करना क्या है
भूल जाता - मेरी गलती क्या है
भूल जाता - मेरी सही क्या है
भूल जाता - कल क्या है
भूल जाता - बिता कल क्या है
बस केवल तू और वर्तमान रहता
मेरे "मैं" को केंद्रित किये
कभी "तुमको" केंद्रित किये
कभी "हमदोनों" केंद्रित हुए
कभी वर्तमान को केंद्रित किये
सचमुच तू बहार है,फुहार है,
सतरंगी है, मनरंगी है
निश्छल है, जलतरंग है
विधाता की अनमोल कृति है :)

No comments:
Post a Comment