तुम अगर हवा होते,तो छोड़ देता
कि बार बार आता है फिर आ जायेंगे
तुम अगर बारिस होते तो जाने देता
कि हर साल आते हैं फिर बरस जायेंगे
तुम तो इतने अनुपम आनंदित अविचल अनूठे हो
बिन हवा के हवा आ जाते,तेरे जुल्फों को लहराने को
बिन मौषम बारिस आ जाते,तेरे को भिगाने को
देखते देखते रूह एक हो जाते,जीवन को चलाने को
कैसे कहुँ कि तुम कुछ नहीं थे
कैसे अनदेखी करूँ कि तुम नहीं थे
कैसे समझाऊं कि तुम ज्ञान नहीं थे
कैसे बताऊँ कि बस तुम ही तुम थे
प्यार का अगर मौषम होता
मौषम कब का आकर चला जाता
प्यार का अगर कोई उम्र होता
कब का जन्म लेकर मर गया होता
प्यार अगर अल्फाज होता
कब का वह बयाँ हो गया होता
प्यार अगर शब्द होता
कब का शब्दों से शब्द निकलता जाता
प्यार तो वो अल्फाज है
मुस्कान है ,
अविचल है
कल कल है
पल पल है
हर पल है
निश्छल है
जिवंत है
प्राण है
अपान है
रूह है
धड़कन है
धरकते दिल का हरकत है
इस हरकत से मैं, तुम और सब हैं
यह धरा हैं, कायनात हैं
बिन तुम के भी तुम हैं
बिन हम के भी हम हैं
जीवन सबका चलता जाता हैं
आ गए तो जन्नत हैं
नहीं आये तो "मैं" खत्म है.
तुम कितना भी जोर लगाओगे
तुम्हारे प्रति औपचारिकता नहीं हो पायेगा
प्यार तो फूलों जैसा है
मौषम रहे ना रहे खिलता रहेगा
बहार आये ना आये महकता रहेगा
तुम आ गए तो खुश हो लेगा
वरना जीवन का काम है चलना
यह तो चलता रहेगा
घुट-घुट जीता रहेगा
हम खुश हैं- खाली-खाली कहता रहेगा
जीवन का काम है चलना
कि बार बार आता है फिर आ जायेंगे
तुम अगर बारिस होते तो जाने देता
कि हर साल आते हैं फिर बरस जायेंगे
तुम तो इतने अनुपम आनंदित अविचल अनूठे हो
बिन हवा के हवा आ जाते,तेरे जुल्फों को लहराने को
बिन मौषम बारिस आ जाते,तेरे को भिगाने को
देखते देखते रूह एक हो जाते,जीवन को चलाने को
कैसे कहुँ कि तुम कुछ नहीं थे
कैसे अनदेखी करूँ कि तुम नहीं थे
कैसे समझाऊं कि तुम ज्ञान नहीं थे
कैसे बताऊँ कि बस तुम ही तुम थे
प्यार का अगर मौषम होता
मौषम कब का आकर चला जाता
प्यार का अगर कोई उम्र होता
कब का जन्म लेकर मर गया होता
प्यार अगर अल्फाज होता
कब का वह बयाँ हो गया होता
प्यार अगर शब्द होता
कब का शब्दों से शब्द निकलता जाता
प्यार तो वो अल्फाज है
मुस्कान है ,
अविचल है
कल कल है
पल पल है
हर पल है
निश्छल है
जिवंत है
प्राण है
अपान है
रूह है
धड़कन है
धरकते दिल का हरकत है
इस हरकत से मैं, तुम और सब हैं
यह धरा हैं, कायनात हैं
बिन तुम के भी तुम हैं
बिन हम के भी हम हैं
जीवन सबका चलता जाता हैं
आ गए तो जन्नत हैं
नहीं आये तो "मैं" खत्म है.
तुम कितना भी जोर लगाओगे
तुम्हारे प्रति औपचारिकता नहीं हो पायेगा
प्यार तो फूलों जैसा है
मौषम रहे ना रहे खिलता रहेगा
बहार आये ना आये महकता रहेगा
तुम आ गए तो खुश हो लेगा
वरना जीवन का काम है चलना
यह तो चलता रहेगा
घुट-घुट जीता रहेगा
हम खुश हैं- खाली-खाली कहता रहेगा
जीवन का काम है चलना
यह चलता रहेगा-चलता रहेगा

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