Tuesday, August 19, 2014

मुहब्बत एक अहसास है

मुहब्बत एक अहसास है 
अल्फ़ाज़ है, छंद है, कविता है 
तरंग है, उमंग है,
बोल है, ताल है, लय  है,
मुस्कान है, चमक है, रौनक है,

जिसे देखते ही मन गाने लगता है 
"पल पल दिल के पास तुम रहती हो"
दिल धड़क कर गाने लगता है 
"होsss -धक धक करने लगा-जियड़ा जलने लगा"
मृगनयनी नयन पे नज़र पड़ते ही बोल पड़ते हैं 
"तेरे मस्त मस्त ये नयन, दिल का ले गए चैन"
बिंदिया देखते ही गाने लगता है 
"तेरी बिंदिया रेss -सजन बिंदिया ले लेगी तेरी निंदिया रेss"
काजल को देख गाना निकलता है 
"कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना"
कान के झुमके से आवाज़ आने लगती है 
"बरेली के बाजार में झुमका गिरा रेss "
सुराहीदार गर्दन को देखते ही बोल पड़ता है 
"वो हंसिनी-मेरी हंसिनी - कहाँ उड़ चली"
बदन देखते ही निकल पड़ता 
"चन्दन सा बदन,चंचल चितवन, धीरे से तेरा ये मुस्काना"
चाल देखते ही निकल पड़ता है 
"तौबा ये मतवाली चाल,झुक जाए फूलो की डाल"
पॉव देखते ही पाकीज़ा के बोल आ जाते है 
"आपके पॉव देखे, बहुत हसीं है - इन्हे ज़मीन पर मत उतारियेगा, मैले हो जायेंगे"
उन्हें देखते ही गाने लगता 
"सागर किनारे -दिल ये पुकारे-कि तू जो नहीं तो मेरा कोई नहीं है"
और मन में होने लगता
"पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले, झूठा ही सही


सचमुच मैं-मैं नहीं रहता 
वो-वो नहीं रहता 
दोनों मिल के एक हो जाते 
दोनों घुल के पानी हो जाते 
कौन मैं था - कौन तू था 
कोई विचार नहीं रहता 
कोई भेद नहीं रहता 
उसका कोई गलती भी गलत नहीं लगता 

और सही तो बस अनुपम महसूसता 
अनूठा सा अनुपम भाव रहता
मुस्कान रहता, अहसास रहता,
न पास होते हुए भी, पास होता.
यही अहसास मरने नहीं देता 
यही अहसास जीने भी नहीं देता 
बस वह रहता और मैं रहता.



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