प्यार करने का जज्बा मुझमे था
तुझे नहीं लेना था नहीं लिए
दुलार करने का मन मुझे था
तुझे नहीं लेना था नहीं लिए
तेरा तन-मन-दिल सब पहले से भरा था
मेरा नहीं था, सो हवा में उछाल रहा था
तुमने इसे क़यामत का दिन समझा
पर इसे लुटाने में मुझे जन्नत दीखता था
कैसे कैसे दिन कट ही जाते हैं
रात भी कुछ पल में बीत जाते हैं
आज तक सोचता हूँ क्यों हुआ
कुछ भी हो रीते पल याद आते हैं
ना तेरा गंतव्य अलग था
ना मेरा इरादा अलग था
अलग था तो बस समझ का
पर इसका मतलब भी नहीं था
इसी ज़ज़्बात से तो जी लेते हैं
इसी बात से अपने "चाँद" को देख लेते हैं
इसी आस में उम्र गुजरती जा रही है
देखते हैं जब मिलते हैं कभी..कैसे मिलते हैं
अब चाँद को देख ख़ुशी से उछलने
का दिल नहीं करता, बस शांत रहता हैं
जज्बात जो भी उठते हैं दिल में,
उन्हें द्रस्टा भाव में बस देख लेते हैं
तुझे नहीं लेना था नहीं लिए
दुलार करने का मन मुझे था
तुझे नहीं लेना था नहीं लिए
तेरा तन-मन-दिल सब पहले से भरा था
मेरा नहीं था, सो हवा में उछाल रहा था
तुमने इसे क़यामत का दिन समझा
पर इसे लुटाने में मुझे जन्नत दीखता था
कैसे कैसे दिन कट ही जाते हैं
रात भी कुछ पल में बीत जाते हैं
आज तक सोचता हूँ क्यों हुआ
कुछ भी हो रीते पल याद आते हैं
ना तेरा गंतव्य अलग था
ना मेरा इरादा अलग था
अलग था तो बस समझ का
पर इसका मतलब भी नहीं था
इसी ज़ज़्बात से तो जी लेते हैं
इसी बात से अपने "चाँद" को देख लेते हैं
इसी आस में उम्र गुजरती जा रही है
देखते हैं जब मिलते हैं कभी..कैसे मिलते हैं
अब चाँद को देख ख़ुशी से उछलने
का दिल नहीं करता, बस शांत रहता हैं
जज्बात जो भी उठते हैं दिल में,
उन्हें द्रस्टा भाव में बस देख लेते हैं
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