अच्छा किये मृगनयनी
ये सावन देख लिये
जीवन में ऐसे पल आते हैं
अच्छा किये, तुम जी लिये
जब देखा था तेरे भावना को
हरी-पिली रंगो में व्यक्त करते हुए
मेरा भी दिल कचोट गया था
अनुशंषा किया-जा सिमरन जा-कहते हुए
अच्छा किये, ये सावन देख लिये
रंगो को जी लिये, रिमझिम में भींग लिये
उमर-घूमर नाच लिये, गीत गा लिये
लहरों को छू लिये, सावन को जी लिये
अच्छा किये बसंती,
ये सावन परख लिये
जीवन के मधुर पल पा लिये
अच्छा किये, तुम जी लिये
मेरे कितने सावन बीत गये
रिमझिम की बारिश रीत गये
सावन की फुहार सुख गये
नयनों के तरस तड़प गये
केवल इंतज़ार में मेरे समय गये
ऐसा नहीं की, तुम कारण थे
ऐसा भी नहीं कि कोई और कारण था
अभिशप्त पे, तुम कर भी क्या सकते थे
ऐसे अरमान जब मुझमें आते हैं
खो जाता हूँ मैं ध्यान में
द्रस्टा-भाव में देखता-अनुभव करता
मुस्कुराते हुए ध्यान में
छोड़ दे मेरे लिखावटों को
यूँही चलते रहेंगे, लिखने के लिये
तुम ये सावन देख लिये
अच्छा किये,ये सावन देख लिये
ये सावन देख लिये
जीवन में ऐसे पल आते हैं
अच्छा किये, तुम जी लिये
जब देखा था तेरे भावना को
हरी-पिली रंगो में व्यक्त करते हुए
मेरा भी दिल कचोट गया था
अनुशंषा किया-जा सिमरन जा-कहते हुए
अच्छा किये, ये सावन देख लिये
रंगो को जी लिये, रिमझिम में भींग लिये
उमर-घूमर नाच लिये, गीत गा लिये
लहरों को छू लिये, सावन को जी लिये
अच्छा किये बसंती,
ये सावन परख लिये
जीवन के मधुर पल पा लिये
अच्छा किये, तुम जी लिये
मेरे कितने सावन बीत गये
रिमझिम की बारिश रीत गये
सावन की फुहार सुख गये
नयनों के तरस तड़प गये
केवल इंतज़ार में मेरे समय गये
ऐसा नहीं की, तुम कारण थे
ऐसा भी नहीं कि कोई और कारण था
अभिशप्त पे, तुम कर भी क्या सकते थे
ऐसे अरमान जब मुझमें आते हैं
खो जाता हूँ मैं ध्यान में
द्रस्टा-भाव में देखता-अनुभव करता
मुस्कुराते हुए ध्यान में
छोड़ दे मेरे लिखावटों को
यूँही चलते रहेंगे, लिखने के लिये
तुम ये सावन देख लिये
अच्छा किये,ये सावन देख लिये
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