आस विस्वास त्याग दिया
किसने ये आवाज़ दिया
दौड़ो दौड़ो प्रियतम मेरे
दिल में ये आवाज़ आया
आओ आओ प्रियतम मेरे
तुझ बिन सागर रीता है
नदी जो चली थी मिलने
क्यों ऐसे घबराता है
कल के कविता में जुमला था दुःख का
अब दुःख नहीं है उस भूले हुए पल का
गुस्ताखी तो मैंने ही की थी तुझसे
जो बिना पूछे जताया प्यार का
उसकी सजा तो मिली हमें,
पर अब भी कुछ है बाकी
वो भी दे दो अभी अभी
उफ़ न करूँगा, एक भी सांस की
मुझसे ज्यादा तो तुम होगे झेले
कहकहे लगे होंगे जमकर के
किस-किस के इरादे कैसे हुए होंगे
कड़वी घूंट तो तुम पिए समय के
सचमुच ये सोचकर
हुआ था मैं बहुत परेशान
ऐसे निकल गया था मैं भी
जैसे कभी नहीं थी पहचान
नहीं कहूँगा माफ़ करना
दे देना जो भी हो सजा
तेरे सजा को झेलने में
मुझे मिलेगा खूब मज़ा :)
कल का तेरा विचार देख के
रात भर मन उद्विग्न रहा
नींद भी नहीं आई मुझे
अँखियाँ भी बेचैन रहा
चेहरे-किताब का अर्धनारीश्वर
बहुत मन में है भाया
कहने को तो बहुत कुछ है
पर पता नहीं क्यों अँधेरा छाया
कृपया ये खालीपन दिल से हटाओ
और दिखाओ अब चाँद सा मुखड़ा
जिसे देख तुमसे बात कर सके
मैं-रूप का यह अदद तेरा टुकड़ा
किसने ये आवाज़ दिया
दौड़ो दौड़ो प्रियतम मेरे
दिल में ये आवाज़ आया
आओ आओ प्रियतम मेरे
तुझ बिन सागर रीता है
नदी जो चली थी मिलने
क्यों ऐसे घबराता है
कल के कविता में जुमला था दुःख का
अब दुःख नहीं है उस भूले हुए पल का
गुस्ताखी तो मैंने ही की थी तुझसे
जो बिना पूछे जताया प्यार का
उसकी सजा तो मिली हमें,
पर अब भी कुछ है बाकी
वो भी दे दो अभी अभी
उफ़ न करूँगा, एक भी सांस की
कहकहे लगे होंगे जमकर के
किस-किस के इरादे कैसे हुए होंगे
कड़वी घूंट तो तुम पिए समय के
सचमुच ये सोचकर
हुआ था मैं बहुत परेशान
ऐसे निकल गया था मैं भी
जैसे कभी नहीं थी पहचान
नहीं कहूँगा माफ़ करना
दे देना जो भी हो सजा
तेरे सजा को झेलने में
मुझे मिलेगा खूब मज़ा :)
रात भर मन उद्विग्न रहा
नींद भी नहीं आई मुझे
अँखियाँ भी बेचैन रहा
चेहरे-किताब का अर्धनारीश्वर
बहुत मन में है भाया
कहने को तो बहुत कुछ है
पर पता नहीं क्यों अँधेरा छाया
और दिखाओ अब चाँद सा मुखड़ा
जिसे देख तुमसे बात कर सके
मैं-रूप का यह अदद तेरा टुकड़ा

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