Thursday, July 3, 2014

तड़प रहा हूँ मैं यहाँ

तड़प रहा हूँ  मैं यहाँ 
क्यों तड़प नहीं तुझे 
ज़ालिम तुझसे मिलने को 
मेरा दिल तड़प गया 

तड़प रहा हुँ मैं यहाँ ..

नहीं रखने को दिल करता अब 
मर्यादा का यह आलम 
बस एक बार दिखा दे तू 
इशारा का दिया 

तड़प रहा हुँ मैं यहाँ ..

सचमुच ऐसा है की 
मुझे प्यार है हुआ 
यह पहली बार का अहसास है
ऐसा कभी नहीं हुआ 

तड़प रहा हुँ मैं यहाँ ..

सच में कभी चखा नहीं 
यह प्यार है क्या 
आज तुझसे मिलने को 
मेरा दिल तड़प गया 

तड़प रहा हुँ मैं यहाँ ..

अब क्यों तू खड़े हो 
चुपचाप हो के ज़ालिम 
क़त्ल भी अगर किये  
पहले भी उफ़ नहीं किया

तड़प रहा हुँ मैं यहाँ ..

खोल भी दे अब बंधन मेरा
सचमुच दिल है तड़प रहा 
बस एक इशारा कर दे मुझे 
जो अबतक तूने है रोके रखा 

तड़प रहा हुँ मैं यहाँ ..

मत रोक मुझे दूर तुझसे 
घूम लेने दे चाँद-सितारे 
बारिस भी बरस के कह रही है 
ले प्रीतम पिले प्याले

तड़प रहा हुँ मैं यहाँ ..

सारा जग लगता अभी 
बस रेत का है घड़ा 
कर्म भी लगता मुझे 
सब है झूठा धुआं 

तड़प रहा हुँ मैं यहाँ ...

मिल जाने दे दो सितारों को
एक मुकाम है लिया 
हमदोनों ही ज़हीन हैं 
ढूंढ लेंगे कोई ना कोई जिया 

तड़प रहा हुँ मैं यहाँ 
ये क्या तूने कर दिया
ज़ालिम तुझसे मिलने को 
मेरा दिल तड़प गया ..



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