Friday, July 25, 2014

दिल करता है आज उनसे बात करे

दिल करता है आज उनसे बात करे 
अँखियाँ चार करे, बतियाँ हज़ार करे 
दिल करता है...

सुबह सुबह आई थी तितली 

उड़ उड़ के कुछ कह रही थी 
कभी इधर फुदक,कभी उधर फुदक 
मन ही मन में मुस्क रही थी 
पकड़ने को जो दिल किया 
इधर-उधर घर में उड़ रही थी 
तस्वीर भी जो लेनी चाही 
पर एक जगह वह बैठ नहीं रही थी 
देखते-देखते कही गुम हो गई 
जाते जाते कुछ कह रही थी 

दिल करता है आज उनसे बात करे 

अँखियाँ चार करे, बतियाँ हज़ार करे 

कुछ बंदिशे....


कुछ साफ़ नहीं है मौषम 

बारिश होगी भी या नहीं होगी 
कुछ साफ़ नहीं है उनकी बोली 
बात होगी भी या नहीं होगी 

क्या करूँ - असमंजस में हूँ फंसा सा 

सीधा रास्ता है, पर है उलझा सा 
कैसी ये बिडंबना, मन तो है बात का, 
अब वही कुछ करे तो हो सुलझा सा   :)





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