Tuesday, July 15, 2014

मृगनैनी के पीछे ख़ामोशी

मृगनैनी के पीछे ख़ामोशी 
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भले गाना लिख दिया हूँ 
देख के तेरी तस्वीर सही 
पल भर के लिए कोई हमें 
प्यार कर ले-झूठा ही सही 

पर जितना मैं तुझे जानता हूँ  
पल भर के लिए स्तब्ध था 
एक ख़ामोशी दिखी तेरे अंदर 
मुझे तेरा "तू" दिख रहा था 

वो चमक नहीं थी 
जिससे बहार आ जाती थी 
वो महक नहीं थी 
जिससे फूल खिल जाती थी 

ऐसा नहीं की मृगनैनी नहीं थी 
पर वैसी  नहीं चमक दिखी 
कुछ उद्विगन्ता थी, कुछ सोच थी 
वैसी ही मेरी मृगनैनी दिखी 

ऐसा क्यों लगा मुझे, जबकि 
तूने मुझे कभी माना ही नहीं  
पर फिर भी  मैं  तेरी चिंतित "तू" को 
 मुझे दिखा , पर मैं खुश नहीं  

ऐसा ना रहो ऐसे, वो मृगनयनी 
तू हो मेरी मुस्कराहट 
जो भी मांगोगे मुझसे, झट से दे दूंगा 
चाहे मांग लेना दुरी,नहीं होगी घबराहट 

तेरे तरफ से कोई प्रक्रिया नहीं देख  
मुझे बहुत है खूब खलता 
मुझे ये भी नहीं पता अबतक 
तू ये पढ़ती है या कोई पढता 

इसका ये मतलब क्या समझूँ
तू नहीं चाहते,  नज़दीक आ 
देख लेता-एक और दो दिन 
फिर देखते हैं तेरा क्या फैसला हुआ 

पर अभी आया है एक गाना का बोल 
अभी तो मैं इसे पोस्ट करता हूँ 
ख़ुशी के पल में ख़ुशी की बातें
तुझसे सीख, अब मैं ये ज़रूर करता हूँ 

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