Sunday, July 31, 2016

देखने दो चाँद को

देख लेने दो भगवन
चाँद उतरकर आया है
अपनी धवल रौशनी में 
मुझ प्यासे को नहाया है

नैन उसके बड़े बड़े
पलकें हैं अतिसुन्दर 
सच देखते ही बनता है
सूरत उसकी सुंदर सुंदर

किस किस अंग का वर्णन करूँ
ये आँखें बस देखती रहती
सबसे अच्छा तो उसका रूह है
जो अपने आप छलकती रहती 

रति सी शरमाई हुई
कामायनी की है मूरत
अनुपम है हे भगवन
तेरी कलाकृति की है सूरत

तू उसे हर सुख नवाजे
दे दे उसे जो चाहे वो
उसे देखकर यही लगता
है तेरी अवतरित देवी वो 

सुंदरता मेरे आँखों में नहीं
सुंदरता है उसमें बसी
कितना वो भाग्यवान होगा
जिसके संग वो हँसी-बसी

कितना हसीन वो पल होगा
जो उसके संग हर पल होगा
तेरी भक्ति शक्ति के संग संग
उस अनुपमा का संग होगा

हे प्रभु ! तुझसे पूछता हूँ
क्या सोच ये दुनिया तूने बनायी
बहुत ही अच्छी प्रकृति है
जिसमें तूने हम सबको बनायी

रूह को भेज इस शरीर में
पुरे जग को भरमा देता 
अपने इस दुनिया में
हम सबको रचा बसा देता

नारी पुरुष के भेष में
यह दुनिया चलती रहती
तेरी पावन कृति की धरती
रचती बसती बढ़ती रहती

Thursday, July 28, 2016

वो मेरे दिल का डॉक्टर

एक गीत उन्हें सोचकर ..

उन्हें देखकर यूँ लगता
वो मेरी mirror है 
मेरे दुःख तकलीफ की
बहुत बड़ी doctor है 

चाँद भी शरमाये उनके संगमरमरी हसीन पर 
चनाजोर गरम भी घबराये उनके नमकीन पर 

देख देख क्यों लगे
वो मेरे अपने हैं 
उनके नयनों में खो जाय
वो मेरे सपने हैं 

ठुमुक ठुमक चाल उसकी, थिरके बदन उसका
नदी सी चंचल धारा में नजर ना ठहरे किसी का

उन्हें देख लगता है 
दिल का मरीज हो 
सारे हॉस्पिटल में 
वो मेरी इलाज हो 

पता नहीं कैसे उसके सामने हम प्रस्तुत करे 
घडी घडी दिल में लगे वो मुझे select करे 

उन्हें देखते ही
ज्ञान भी कम पड़ जाता
उन्हें महसूसते
Prefume सा महकता 

चन्दन सा बदन में रंग बिरंगे परिधान से 
चमकाए सारा जहान थिरकाये कसम से 

उन्हें देखकर यूँ लगता
वो मेरी mirror है 
मेरे दुःख तकलीफ की
बहुत बड़ी doctor है 


तुम बुलाओ मुझे, मैं आ जाता हूँ

तुम बुलाओ मुझे, मैं आ जाता हूँ 

अँखियों ही अँखियों में 
बात कर कर जाता हूँ 
पल दो पल खो जाता हूँ 
आँखों से नीर बहा जाता हूँ 

तुम बुलाओ मुझे, मैं आ जाता हूँ 

मत रखो बंदिश हमसे तुम 
मत रोको मुझे आने से 
दिल तड़प रहा है मिलने से 
तुम टोको नहीं भरमाने से 

तुम बुलाओ मुझे, मैं आ जाता हूँ 

जीवन में नदियाँ बहा जाता हूँ 
तेरे संग झूम लेता हूँ 
मन में उमंग भर लेता हूँ 
तेरे संग कहीं भी चल लेता हूँ 

तुम बुलाओ मुझे, मैं आ जाता हूँ 

नहीं उम्मीद है किसी से 
बस तुम मिले मुझे नसीब से 
एक प्यास तुम जगाओ भी 
गले लगा लो मुझे करीब से 

तुम बुलाओ मुझे, मैं आ जाता हूँ 

अँखियों ही अँखियों में 
बात कर कर जाता हूँ 
पल दो पल खो जाता हूँ 
आँखों से नीर बहा जाता हूँ 

तुम बुलाओ मुझे, मैं आ जाता हूँ 

मत रखो बंदिश हमसे तुम 
मत रोको मुझे आने से 
दिल तड़प रहा है मिलने से 
तुम टोको नहीं भरमाने से 

तुम बुलाओ मुझे, मैं आ जाता हूँ 

जीवन में नदियाँ बहा जाता हूँ 
तेरे संग झूम लेता हूँ 
मन में उमंग भर लेता हूँ 
तेरे संग कहीं भी चल लेता हूँ 

तुम बुलाओ मुझे, मैं आ जाता हूँ 

आँखों से मुस्कुरा जाता हूँ 
ठहाके लगा बात कर जाता हूँ 
हर पल तेरे संग खो जाता हूँ 
जिंदगी संग निभा जाता हूँ  

तुम बुलाओ मुझे, मैं आ जाता हूँ 

Wednesday, July 27, 2016

Will you marry me

Feel to ignite with you
Will you love me
Feel to unite with you
Will you marry me

The moment I feel you
I feel too much sparkling
The time I remember you
i feel too much gaining 

Will you love me,O' Dear 
Will you marry me, O' baby

I feel to feel with you
Will you live together
I feel to live with you
Will you walk together

Will you love me,O' Dear 
Will you marry me, O' baby

I am in full of sense
Can you make this happen
I am well to do 
Can you work on this happen 

Will you love me,O' Dear 
Will you marry me, O' baby

सब ही नचावत राम गोसाईं

सब ही नचावत राम गोसाईं

सब ही नचावत राम गोसाईं
नर नाचत मरकट की माही
हम सोचते रहते हम करते हैं
पर दुनिया चलती बन निर्मोही

तुमने तो छोड़ दिया था
हमसे भी है मिलना जुलना 
ऐसी भी क्या खता हुई
नहीं लगता जी तेरे बिना

कल भगवन ने दया किया
और किया कुछ चमत्कार
कुछ कोशिश नहीं थी मेरी
मैं था अपने ख्याल में निहार

ऐसा हुआ-हो रहा था देर मुझे
ऑफिस की गाडी पकड़नी थी
तेजी तेजी कदम ताल था मेरा
समय पर पहुँचने की जल्दी थी 

तभी एक अंधे ने बोला
ले चल मुझे रोड तक 
मैं निरा तेरे सोच में खोया
हाँ कर दिया बेरोकटोक

सोचा बहुत कि गाडी निकल जायेगी
पर भगवत कार्य देख मैंने कर लिया
रास्ते से दिखा मेरी गाडी निकलते  हुए 
पर अंधे का हाथ मुझसे छोड़ा ना गया 

अंधे को छोड़ने के बाद 
भगवन को मैं देखा मुस्कुराते
दिल में ही सवाल किया
अब हम ऑफिस कैसे जाते 

ढूढ़ने लगा उपाय,कहने लगा किसी से
तभी एक गाडी आई,जिसमें कभी थे हम जाते
अनायास तुम दिखे-सचमुच बाँछे खिल गई 
भगवन को कहा-अच्छा ऐसे चक्कर चलाते

ऐसे ही कभी अनायास तुमसे दूर हुआ था
कितने वर्ष बीत गए पर लगता कल है बीता
नहीं चाहता था तब भी मुझे तुमसे है दूर होना
पर भगवन ने जैसा चाहा मैं तो था बस कर्ता 

एक शेर अर्ज़ है..
रह रहा हूँ अकेले तेरे जिद्द से
पर नहीं चाहता रहूँ तेरे बिना
तुम्हें सोचते लगता ये दुनिया
बहुत ही सुहाना,बहुत अपना

Friday, July 22, 2016

बिन बात का बतंगड़

आज एक ने क्या खूब कहा 
क्या चल रहा है तेरे दिल के अंदर 
तेरे बिन बताये - लोग कैसे जानेंगे 
सब होते हैं व्यस्त अपने कामों में
तुम्हें गरज है अगर उन बातों का 
तुम बोलोगे तब लोग जानेंगे 

इतनी छोटी बात कैसे नहीं समझ आई 
क्या का क्या सोचता रहा,परेशानी खुद आई
सच में हम भी कितने आशावान हैं 
दिल में सोचता और आशा करता समझ ले कोई 

कैसे कहूँ कि तुम हो अनजान 
ऐसी ही बातें तुम भी सोच रहे थे 
बदला बदला सा केवल मुखड़ा था 
पर मेरे ही तर्ज पर बोल रहे थे 

कहता हूँ तो तुम समझते नहीं 
कि मानसिक सन्देश भी कुछ होती है 
जैसे मैंने सोचा तुम्हें ध्यान करके 
वैसे ही तुम्हें भी कुछ कुछ होती है 

अगर ऐसा नहीं होता जीवन में 
तो यही मुद्दा मैं कैसे लिखता अभी 
जैसे ही मैं कहा "जी" तेरे बातों पर 
तुम भी सुन लो जो मैंने सोचा अभी 

एक मुस्कराहट तुम भी भर लो 
जहाँ तुम हो अनमस्यक खड़े अभी 
मुझे मुस्कुराने को दिल कर रहा 
मुस्कुराना चाहता तेरे संग अभी 





Thursday, July 21, 2016

तुम्हें जब अपूर्णता का आभाष हो

तुम्हें जब जब अपने में अपूर्णता का आभाष हो
मुझे याद कर लेना तुझ में पूर्णता को बताने को
तुझे देखते ही तुझसे लिपटकर रोने को मैं होता 
कहता- क्यों रोके हो अबतक लिपटने से मुझको 

तेरे आँखों से पूर्णता शुरू हो जाता 
तेरे मदमस्त नजरें हिलोरे लेता 
ये आँखें किसी को डुबोये या नहीं 
पर मैं उन नयनों में डूब ही जाता 

दिल करता रहता तुझसे अर्ज़ करूँ 
चेहरे को मत हिलाओ तनिक भी 
डूबने दो अपने इन आँखों में हमें
इंतज़ार किया ये मेरा जीवन भी 

तुम्हें जब जब अपने में अपूर्णता का आभाष हो
मुझे याद कर लेना तुझ में पूर्णता को बताने को

आँखों से छेड़खानी करते जुल्फें 
सागर में लहरें ही लहरें फैलाते
लटके झटके का नाम देकर 
तेरे आँखों में हमें ना डूबने देते 

घनघोर घटा सी छाती तेरी जुल्फें 
दे देती हैं बरबस बारिश का आभाष 
बून्द बून्द बस टपकना बाकी रहता 
रीत रहा है ये सावन का मधुमाष

तुम्हें जब जब अपने में अपूर्णता का आभाष हो
मुझे याद कर लेना तुझ में पूर्णता को बताने को

जुल्फ़ें से हटकर नजरे मेरी 
बदन की गहराई में उतरती 
इधर अटकती उधर रूकती 
पर तन से नजर नहीं हटती

रुक ही जाती तेरे लहराते दुपट्टों पर 
देखता कहता की काश तू मिलती 
तुझे मृगनयनी कहूँ नाजनीन कहूँ
इसी उधेड़बुन मेरी नजरें लगी रहती 

तुम्हें जब जब अपने में अपूर्णता का आभाष हो
मुझे याद कर लेना तुझ में पूर्णता को बताने को
तुझे देखते ही तुझसे लिपटकर रोने को मैं होता 
कहता- क्यों रोके हो अबतक लिपटने से मुझको 



Friday, July 15, 2016

तूझसे दोस्ती है या भक्ति या प्यार

तूझसे दोस्ती है या भक्ति या प्यार

रखी कहाँ तूने दोस्ती
अपने दुनिया में शामिल ही नहीं किया
हम रह ए तड़पते
तूने बिना गौर फरमाये छोड़कर चल दिया

तोहमत तुझे ना दूँ तो किसे दूँ
तुमसे ही तो मैं जुड़ा था 
दूसरे लोग तो बस नाम के थे
केवल मैं तुझसे जुड़ा था 

छुकर देखो हमें 
रोम रोम में तेरा नाम मिलेगा
तेरी यादें अंतर्मन में बसी है
हरवक्त तेरा मुस्कुराहट मिलेगा

नहीं ढिंढोरा पिटूँगा
नहीं कुछ चीखूंगा चिल्लाऊंगा
तेरे याद में तेरे तड़पन में
रोम रोम से तेरा नाम पुकारूँगा

हूँ मैं इस ज़मीन पर
तो हूँ मैं किसलिए सोचता हूँ 
तू मेरे इतने अजीज हो
पर तुम इतने दूर क्यों,सोचता हूँ 

जब भी तुझे देखा
ऐसा लगा तुम मेरे अपने हो 
तुम्हें कोई कष्ट ना हो
चाहे मुझे लाख दुःख सहने हो 

तेरे आँखों में जो जादू है 
उस कशिश की क्या मिसाल दूँ
तुम दूर हो पता ही नहीं चलता
यादों में ही वो जादू कहता-आ मिला दूँ 

तेरे जादू के इस बात पर
मुस्कराहट निकलती मेरे चेहरे से
फिर कहता-खोने दे तबतक उन आँखों में
जब वो आएंगे, मिल लूँगा तस्सली से

इस तस्सली की बात आते ही 
सचमुच तुझसा मैं खिलखिला पड़ता 
तुम दूर हो या नजदीक 
यादों में हकीकत सा अंग से लगा लेता

रोम रोम में राम है कैसे हनुमान को 
इसकी अनुभूति भी मिलता रहता 
तुझसे दोस्ती है या भक्ति या प्यार
सच मुझे कुछ भी पता नहीं चलता 

Thursday, July 14, 2016

दिल कहने लगा

दिल तुझे पुकारे कहाँ हो तुम 
रूठे क्यों हो बतक ये दिल कहने लगा 
अब आ अभी जाओ हकीकत में 
ये दिल तुझसे आरजू करने लगा 

लोगों ने कहा तेरी शादी होगी 
पता नहीं क्यों आँसूं टपकने लगा 
कैसा ये रिश्ता तुझसे जुड़ गया 
दिल मेरा बहुत तड़पने लगा  

ऐसा कैसे तुम कर सकते हो 
मेरा दिल खुद मुझसे पूछने लगा 
मैं तो समझता थोड़ी नाराज़ हो 
इतनी बड़ी फैसला कौन करने लगा 

ख़्वाबों की बातें हकीकतन हुए बिना 
ऐसे कैसे ख्वाब मरने लगा 
देखो ऐसा तुम नहीं कर सकते 
ये दिल तुझसे आरजू करने लगा 

सपनों की शहजादी हो तुम मेरा 
हकीकत में आओ तुझसे कहने लगा 
मत नाम दो कि बावला हूँ मैं 
तुझे अपनाऊँ मेरा दिल कहने लगा 

तुझसे है नाता पता नहीं क्यों 
तुझे अपनाऊँ कैसे भी ये दिल होने लगा 
अब तुम मत रहो दूर हमसे 
ऐसा तुमसे मैं आरजू करने लगा 

Tuesday, July 12, 2016

तुमसे मिलने को दिल मचल रहा है

आज तुमसे मिलने को
दिल मचल रहा है 
रह रह कर याद आये
दिल तड़प रहा है 
आ भी जा सनम अब बाहों में
मिलने को ये दिल मचल रहा है 

सुबह सुबह से ही 
गीत आ रहा है 
तुम बिन जाऊँ कहाँ
दिल गा रहा है 
आ भी जा सनम अब राहों में 
मिलने को दिल मचल रहा है 

आज तुमसे मिलने को
दिल मचल रहा है ...

सोते सोते ये दिल
थक रहा है
नींद में भी हिचकी
आ रहा है 
आ भी जा अब हकीकत में
पलकों को आँसूं भिंगो रहा है

आज तुमसे मिलने को
दिल मचल रहा है ...

Monday, July 11, 2016

मुस्कुराहट दर्द भरी

मुस्कान पर चन्द शेर ..

मत दे तोहमत मुझे मुस्कुराने का

कौन ग़रीब मुस्कुराना चाहता है 
वो कैसे मुस्कुराते थे हकीकतन 
यादों में उनकी हाजिरी लगता है 

आज दिल सुना है,लिखने को लफ्ज भी नहीं सूझता

पर वो जान ले कैसे भी मेरा हाल,कुछ लफ्ज लिखता

दिल में होता है तूफ़ान ला दे,नदी का नदी उड़ेल दे

पर कैसे भी वो सामने आये और खुदा एक कर दे 

कहाँ है आज वो, यादों के तीर खूब चलाये जा रहे हैं

छलनी हो रहा है ये दिल और वो दूर से मजे ले रहे हैं

कितना अच्छा तो ये इश्क है,मुस्कुराहट बस निकलती

वो इस तरह क्यों तड़पाते,क्या उन्हें समझ नहीं आती 

कत्ल कर दो हमें,अगर इश्क गुनाह है तेरे नजर में 

हाँ इश्क तुझसे करता हूँ,डूबना है तेरे मुस्कुराहट में

नहीं चाहता प्रचार करना तेरे मेरे इश्क का

तुझे जरूरत है तू ढोल बजा इस सगूफ़े का 

ऐसा नहीं कि चुपचाप हमें इश्क में रहना है 

रैन बसेरा में संग संग तेरे संग मुस्कुराना है 

मुझे नहीं चाहिए इस दुनिया से केवल तेरे सिवा

तुझे अगर कुछ चाहिए कमा लूँगा तेरे लिए मेवा 

Saturday, July 9, 2016

मत नशा कर ऐ बन्दे

नशा पर चन्द शेर अर्ज़ है ..नीचे एक समाचार से प्रेरित..

लोग मुर्ख हैं जो नशा में लाते हैं ना जाने किस किस चीज को
एक बार प्यार का नशा कर ले भूल जायेंगे अन्य नाशाओं को

मत बर्बाद हो नशा करने में ऐ बन्दे
काहिल लोग ही नशा को बढ़ावा देते हैं
नशा करके किसी को होश रहता कहाँ
ज्ञान की कितनी रौशनी आप गवाँ देते हैं

मत पूछ ऐ कामचोरों कि नशा मैंने किया या नहीं किया
है प्यार का नशा, यह अन्य नशा को फटकने नहीं दिया

दर्द ऐसा नहीं कि मुझे नहीं पर विष पीने से क्या फायदा
जब तू पीने के बाद इंसान रहा ही नहीं,फिर क्या फायदा

मत नशा कर, इतना कहूँगा, सोच-तू काहिल नहीं है
जिन्दा है तो कर्म कर, आराम तो मरने के बाद भी है

मजा करने के लिए जो पीते,शायद वो प्यार चखे नहीं है
बेहोशी में कैसे देख पाएंगे,वे जुल्फें बांधे या खुले रखे हैं

पीना है तो प्यार का नशा पी, यादों में भी वे पीला देते
उनका मुस्कराना गजब ढाता,सूखे सूखे ही जीला देते


Thursday, July 7, 2016

इस दिल में तू ही तू है

ये जिंदगी कितना सकून देता है
जब दिल के रास्ते पर चलता है 
हर तरफ मौजें ही मौजें फैलता
जीने के राह में एक जूनून देता है 

भीड़ भाड़ भरे रुके राह भी 
रवानी के रंग में सराबोर होते
हल्ला गुल्ला गली-नुक्कड़ भी 
संगीत से अठखेलियां खेलते

ये जिंदगी के राह बड़े चैन से कटते
कहीं चिंता नहीं,कोई फ़िक्र ना होती
जब ये जिंदगी में अपने दिल में होती
जब ये जिंदगी दिल अनुसार चलती

दर्द को भी कहता, मत फटक तू मेरे पास
मेरे साथ मेरा जूनून है तू मत रह आसपास
अगर कभी गलती से कोई दर्द आता पास
ये दिल उसे निपटाकर कहता मत रह पास

कहाँ से इतना जूनून आता,क्या है ये दिल
कहाँ सेआत्मविश्वास जगाता,क्या है दिल
कहाँ से इतनी रंगीनियाँ लाता,क्या है दिल
सबकुछ तो इस दिल का है, यही है दिल

ये दिल है तभी तो ये शरीर है,हम जीते हैं
पर लोग कहते ये शरीर है- तभी दिल है 
गौर करें-दिल ना होने पर हम मर जाते हैं
तन को जला देते हैं,ये दिल भी खो जाते हैं 

अब आप ही निष्कर्ष निकालो,गौर करो
दिल धड़कता है तभी तक यह शरीर है 
बिन धड़कन के इस तन का वजूद नहीं है 
इस दिल में तू ही तू है, तभी तो ये दिल है 

Friday, July 1, 2016

एक ग़ज़ल -ढूंढे तुझे वादियों में

एक गजल ...ढूंढे तुझे वादियों में ...

ढूंढता हूँ वादियों में तू कहाँ मिले
तुझसे मिलन को क्यों ना हुए सिलसिले 

खोजने पर खुदा को,खुदा का पता भी लगे
पर तेरे तरफ देखने पर तू क्यों दूर दूर लगे 
पूछना भी चाहूँ तुझसे पर मुझमें कमी लगे 
फिर भी नजर तुझ तरफ ही क्यों होने लगे 

ढूंढे नजर तुझे वादियों में,तू नहीं मिले
नहीं जगा पाया तुझमें,प्यार के सिलसिले 

लिख लिख कर हार गया कि तू कुछ पढ़े 
पर तुझे ना लिखा भाया कि हम आगे बढे 
कहने की कुछ वजह नहीं कि बात भी बढे 
हारता रहा हूँ अबतक पर ये प्यार ना चढ़े 

ढूंढे ये दिल पपीहे सा,पर प्यार ना मिले 
कैसा होता ये प्यार, ना जान पाये सिलसिले 

फिर भी ये दिल ढूंढे तुझे कि तू अपना सा लगे
पर दिखा दिया दे के दुरी, टूट गए ये सिलसिले
हर तरफ नजर दौड़ाऊँ कि तू क्यों नहीं मिले
मेरा नहीं मूल्य तेरे नजर में कि बढे सिलसिले 

ढूंढे नजर तुझे वादियों में कहीं तो तू मिले
तुझसे मिलन को तड़पे कि बढ़े प्यार के सिलसिले