देख लेने दो भगवन
चाँद उतरकर आया है
अपनी धवल रौशनी में
मुझ प्यासे को नहाया है
नैन उसके बड़े बड़े
पलकें हैं अतिसुन्दर
सच देखते ही बनता है
सूरत उसकी सुंदर सुंदर
किस किस अंग का वर्णन करूँ
ये आँखें बस देखती रहती
सबसे अच्छा तो उसका रूह है
जो अपने आप छलकती रहती
रति सी शरमाई हुई
कामायनी की है मूरत
अनुपम है हे भगवन
तेरी कलाकृति की है सूरत
तू उसे हर सुख नवाजे
दे दे उसे जो चाहे वो
उसे देखकर यही लगता
है तेरी अवतरित देवी वो
सुंदरता मेरे आँखों में नहीं
सुंदरता है उसमें बसी
कितना वो भाग्यवान होगा
जिसके संग वो हँसी-बसी
कितना हसीन वो पल होगा
जो उसके संग हर पल होगा
तेरी भक्ति शक्ति के संग संग
उस अनुपमा का संग होगा
हे प्रभु ! तुझसे पूछता हूँ
क्या सोच ये दुनिया तूने बनायी
बहुत ही अच्छी प्रकृति है
जिसमें तूने हम सबको बनायी
रूह को भेज इस शरीर में
पुरे जग को भरमा देता
अपने इस दुनिया में
हम सबको रचा बसा देता
नारी पुरुष के भेष में
यह दुनिया चलती रहती
तेरी पावन कृति की धरती
रचती बसती बढ़ती रहती
चाँद उतरकर आया है
अपनी धवल रौशनी में
मुझ प्यासे को नहाया है
नैन उसके बड़े बड़े
पलकें हैं अतिसुन्दर
सच देखते ही बनता है
सूरत उसकी सुंदर सुंदर
किस किस अंग का वर्णन करूँ
ये आँखें बस देखती रहती
सबसे अच्छा तो उसका रूह है
जो अपने आप छलकती रहती
रति सी शरमाई हुई
कामायनी की है मूरत
अनुपम है हे भगवन
तेरी कलाकृति की है सूरत
तू उसे हर सुख नवाजे
दे दे उसे जो चाहे वो
उसे देखकर यही लगता
है तेरी अवतरित देवी वो
सुंदरता मेरे आँखों में नहीं
सुंदरता है उसमें बसी
कितना वो भाग्यवान होगा
जिसके संग वो हँसी-बसी
कितना हसीन वो पल होगा
जो उसके संग हर पल होगा
तेरी भक्ति शक्ति के संग संग
उस अनुपमा का संग होगा
हे प्रभु ! तुझसे पूछता हूँ
क्या सोच ये दुनिया तूने बनायी
बहुत ही अच्छी प्रकृति है
जिसमें तूने हम सबको बनायी
रूह को भेज इस शरीर में
पुरे जग को भरमा देता
अपने इस दुनिया में
हम सबको रचा बसा देता
नारी पुरुष के भेष में
यह दुनिया चलती रहती
तेरी पावन कृति की धरती
रचती बसती बढ़ती रहती






