एक गजल ...ढूंढे तुझे वादियों में ...
ढूंढता हूँ वादियों में तू कहाँ मिले
तुझसे मिलन को क्यों ना हुए सिलसिले
खोजने पर खुदा को,खुदा का पता भी लगे
पर तेरे तरफ देखने पर तू क्यों दूर दूर लगे
पूछना भी चाहूँ तुझसे पर मुझमें कमी लगे
फिर भी नजर तुझ तरफ ही क्यों होने लगे
ढूंढे नजर तुझे वादियों में,तू नहीं मिले
नहीं जगा पाया तुझमें,प्यार के सिलसिले
लिख लिख कर हार गया कि तू कुछ पढ़े
पर तुझे ना लिखा भाया कि हम आगे बढे
कहने की कुछ वजह नहीं कि बात भी बढे
हारता रहा हूँ अबतक पर ये प्यार ना चढ़े
ढूंढे ये दिल पपीहे सा,पर प्यार ना मिले
कैसा होता ये प्यार, ना जान पाये सिलसिले
फिर भी ये दिल ढूंढे तुझे कि तू अपना सा लगे
पर दिखा दिया दे के दुरी, टूट गए ये सिलसिले
हर तरफ नजर दौड़ाऊँ कि तू क्यों नहीं मिले
मेरा नहीं मूल्य तेरे नजर में कि बढे सिलसिले
ढूंढे नजर तुझे वादियों में कहीं तो तू मिले
तुझसे मिलन को तड़पे कि बढ़े प्यार के सिलसिले
ढूंढता हूँ वादियों में तू कहाँ मिले
तुझसे मिलन को क्यों ना हुए सिलसिले
खोजने पर खुदा को,खुदा का पता भी लगे
पर तेरे तरफ देखने पर तू क्यों दूर दूर लगे
पूछना भी चाहूँ तुझसे पर मुझमें कमी लगे
फिर भी नजर तुझ तरफ ही क्यों होने लगे
ढूंढे नजर तुझे वादियों में,तू नहीं मिले
नहीं जगा पाया तुझमें,प्यार के सिलसिले
लिख लिख कर हार गया कि तू कुछ पढ़े
पर तुझे ना लिखा भाया कि हम आगे बढे
कहने की कुछ वजह नहीं कि बात भी बढे
हारता रहा हूँ अबतक पर ये प्यार ना चढ़े
ढूंढे ये दिल पपीहे सा,पर प्यार ना मिले
कैसा होता ये प्यार, ना जान पाये सिलसिले
फिर भी ये दिल ढूंढे तुझे कि तू अपना सा लगे
पर दिखा दिया दे के दुरी, टूट गए ये सिलसिले
हर तरफ नजर दौड़ाऊँ कि तू क्यों नहीं मिले
मेरा नहीं मूल्य तेरे नजर में कि बढे सिलसिले
ढूंढे नजर तुझे वादियों में कहीं तो तू मिले
तुझसे मिलन को तड़पे कि बढ़े प्यार के सिलसिले


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