Thursday, July 14, 2016

दिल कहने लगा

दिल तुझे पुकारे कहाँ हो तुम 
रूठे क्यों हो बतक ये दिल कहने लगा 
अब आ अभी जाओ हकीकत में 
ये दिल तुझसे आरजू करने लगा 

लोगों ने कहा तेरी शादी होगी 
पता नहीं क्यों आँसूं टपकने लगा 
कैसा ये रिश्ता तुझसे जुड़ गया 
दिल मेरा बहुत तड़पने लगा  

ऐसा कैसे तुम कर सकते हो 
मेरा दिल खुद मुझसे पूछने लगा 
मैं तो समझता थोड़ी नाराज़ हो 
इतनी बड़ी फैसला कौन करने लगा 

ख़्वाबों की बातें हकीकतन हुए बिना 
ऐसे कैसे ख्वाब मरने लगा 
देखो ऐसा तुम नहीं कर सकते 
ये दिल तुझसे आरजू करने लगा 

सपनों की शहजादी हो तुम मेरा 
हकीकत में आओ तुझसे कहने लगा 
मत नाम दो कि बावला हूँ मैं 
तुझे अपनाऊँ मेरा दिल कहने लगा 

तुझसे है नाता पता नहीं क्यों 
तुझे अपनाऊँ कैसे भी ये दिल होने लगा 
अब तुम मत रहो दूर हमसे 
ऐसा तुमसे मैं आरजू करने लगा 

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