Monday, September 28, 2015

तेरे याद में

चेहरे किताब पर जाते ही
खो जाता है ये मन
तेरे यादों के समन्दर में
तेरे जुल्फों के लटके झटके में
तेरे खिलखिलाहट में
तेरे मुस्कराहट में
तेरे मौजों में
तेरे रवानी में
तेरे साथ ना बीती कहानियों में
तेरे साथ बीते रूखे सूखे पल में
तेरे चाल में
तेरे नजाकत में
तेरे चमक में
तेरे खनक में 
तेरे आवाज़ में 
तेरे आवाज़ को सुनने के ललक में
तेरे देखने में 
तेरे देखने के अंदाज़ में 
तेरे आँखों में 
तेरे मृगनैनी आँखों में 
तेरे दिल से उठती धड़कन में 
तेरे आँखों से बयाँ होती पल में
खो जाता हूँ 
बस खो जाता हूँ 
शांत हो जाता हूँ 
बस तेरे चेहरे से निकलते चमक में .

अगर सचमुच तुम होते पास
सचमुच तुम दूर नहीं रहते
कौन कहता है कि तुम दूर हो 
हर वक़्त तुम पास ही रहते .

Friday, September 18, 2015

तीर छोडो अपने कमान से

हे सुन ले  
कुछ कह ले  

छोडो भी तुम तीर अपने कमान से 
पता नहीं लगता है किसके नाम से  

जैसे मैं छोड़ता तीर अपने नाम से 
वैसे तुम भी छोडो अपने कमान से   

Monday, September 14, 2015

परोपकार हमसब पर

परोपकार हमसब पर
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इस पुरे अंतरिक्ष में
तारामंडलों के समूहों में
ग्रहों और उपग्रहों के झुंडों में
जहाँ तक ज्ञान जाता है
जहाँ तक भान हुआ है
केवल अपनी ही धरती है
जहाँ हरियाली है
पानी है दरिया है समन्दर है
खाद्य पदार्थ है 
जीव है जन्तु है चर है अचर है
पहाड़ है पेड़ है पौधे हैं
और ना जाने क्या क्या है
जो हम मानवों को नसीब है
जिसके हम एक मात्र भोक्ता हैं
ये सब किसने प्रदान किया
इतना बड़ा परोपकार किसने किया
इतना अमूल्य उपकार किसने किया
एक ही तो है - वो भगवान ।

एक परोपकार हम में से 
कोई अगर कर देता
तो कितनी अपेक्षा हो जाती है
चारों तरफ डंका बजने लगती है
अगर चर्चा ना होती 
तो दिल में होता 
कि कोई तो कुछ बोले
कोई तो प्रशंसा करे
दूसरी ओर एक वो भगवान् है
जो पूछने भी नहीं आता
कि मुझे पूछो
मुझे महान समझो
मैं खुदा हूँ अल्लाह हूँ ईसा हूँ
वह तो और कहता
मानना है तो मानो
नहीं मानना है तो नहीं मानो
पर जियो इस संसार में
रखो इस संसार को
जितना दिन तक रखना है
जितना दिन तक रहना है
तुम कितना भी विध्वंस करोगे
मैं इस धरती को बनाये रखूँगा
तुम भले इसे मेरा कर्तव्य मानो
या परोपकार कह कर इंगित करो
मैं इस धरती को बनाये रखने के लिए
कर्म करता रहूँगा-धर्म करता रहूँगा

धन्य है ये परोपकार 
हम सब धरतीवासी पर
उस सर्वशक्तिमान का
जो कई नामों से जाना जाता
कहीं भगवान के नाम से
तो कहीं खुदा के नाम से
कहीं ईसा तो कहीं रहीम से 

ज्ञान मार्ग

तुमसे अलग रहने का 
बस एक ही उपाय है
ज्ञान मार्ग 
अगर अज्ञान में तेरे पास
कहीं भटक कर आ जाऊँ 
कत्ल मत कर देना 

दुर्योधन को पता था
कि ज्यादा लोभ उसकी जान ले लेगा
मगर लोभ की पराकाष्ठा
वह देखना चाहता था
रावण को भी पता था.

मैं कोई दुर्योधन सा नहीं 
ना रावण ही जैसा
हमें भी पता है अपनी हकीकत
फिर भी देख रहा हूँ 
रोक रहा हूँ अपने को
कितनी देर रह पाता हूँ तुमसे दूर
कुछ भी पता नहीं
अगर अज्ञानवश
कहीं भटक कर आ जाऊँ 
कत्ल मत कर देना 

यादों का पन्ना

यादों के पन्नों से निकलकर
याद आती है तेरी
दिल कुहुककर रह जाता है
कि क्यों हो ना सकी मेरी

यादों के पन्नों से निकलकर

याद आती है तेरी
दिल चहकने लगता है
जब याद आती है मृग्नयन तेरी

क्या आँखे थी तेरी

तेरे देखने से लगता था
किसी प्यासे की प्यास बुझ रही हो
तपिस से शीतलता मिल रही हो
रोगी को दवा मिल रही हो
भूखे को खाना मिल रही हो
किसी को दुआ मिल रही हो
और सारे तेरे सामने खड़े हो
नतमस्तक होकर
कि कब तुम देखोगे उन्हें 
बस तुम अपनी नजर से 
और वो तृप्त हो जायेंगे 
बस तेरे एक नजर देख लेने से
यादों के झुरमुट से निकलकर
जब याद करता हूँ 
सचमुच मैं तो तृप्त हो जाता था
तेरे देखने मात्र से

अब मैं कहाँ रह गया "मैं"

जब से "तेरा मैं" अलग हुआ
वजूद ही नहीं है "मेरे मैं" में
जब से तू मुझसे अलग हुआ

तुम खुदा थे मेरी,जहान थे मेरी

तुम्हें देखते ही खुदाई भूल जाता
तुम बने नहीं थे जुदाई के लिए
काश हमदम सा तू बन जाता

कब से इंतज़ार में था तेरा

कोई अबतक मिला ही नहीं
जो मिला है उसे मिलना ना कहो
वह तो मात्र साधन है सुविधा नहीं

Wednesday, September 9, 2015

कई दिन से कर रहा मुझे लिखुँ तुझ पे गान

कई दिन से कर रहा मुझे लिखुँ तुझ पे गान
दूर से बैठ कर यहीं से छेड़ूँ मैं तुम पर तान 

तेरी बोल सुनने को तरसे मेरे सुने सुने कान
कहाँ बैठे हो गोरी छुपाकर अपनी मीठी तान

देखने को कर रहा वो हलकी हलकी मुस्कान
गोरे गोरे गालों वाली तेरी गुलाबी लाली जान

कहाँ छुपे बैठे हो चुलबुली सी अलबेली जान
कई दिन से कर रहा था कि लिखुँ तुझपे गान

यादों के सहारे जी रहा केवल पूरा हूँ अन्जान 
तुम कैसे हो नहीं बताने की क्यों ली तूने ठान 

पूछूं मैं किस से हाल तेरा बताओ भी मेरी जान
नयन तरस रहा देखने को मीठी मीठी मुस्कान 

लिखने को कर रहा था कई दिन से तुझ पे गान
खोने को कर रहा है तेरे मृगनयनों में मेरी जान 

तेरे आँखों के समंदर में डूब जाता हूँ मैं यादों में 
महकते हुए गुलाबी गुलाबों में हरे भरे बागों में 

गाने को कर रहा था कई दिन से तुझ पे गान
लिखूं मैं गाना सुनाऊँ छेड़कर मैं अपनी तान 

चिढ़ाने को कर रहा था कई दिन से तुम्हें युहीं 
छूने को दिल कर रहा था तुम्हें बातों से युहीं 

कहाँ छुपे बैठे हो अनाड़ी सुन भी लो मेरी तान 
लिखने को कर रहा  कई दिन से तुझ पे गान 

तुम पूछो न हमसे क्यों लिखते हो मेरी गान 
बस झूम लो पढ़कर मुस्कुराते हुए मेरी जान 

कई दिन से कर रहा मुझे लिखुँ तुझ पे गान
दूर से बैठ कर मैं सुनाऊँ तुझे अपनी तान 

लिखने को कर रहा था

लिखने को कर रहा था 
कई दिन से तुझ पे गान 
छूने को कर रहा था  
तेरी गुलाबी सी मुस्कान 

यादों के सहारे हूँ जी रहा
तुम कैसे हो, नहीं बताने का, लिए तूने ठान 
पूछूं मैं किस से हाल तेरा  
नहीं मिल पाता तेरा मीठी सी मुस्कान 

लिखने को कर रहा था 
कई दिन से तुझ पे गान ....

तेरे आँखों के समंदर में 
डूब जाता हूँ यादों में 
महकते हुए गुलाबों में 
हरे भरे बागों में 

गाने को कर रहा था 
कई दिन से तुझ पे गान ..

चिढ़ाने को कर रहा था 
कई दिन से तुम्हें युहीं 
दिल मचल रहा था 
तुम्हे छूने को युहीं 

लिखने को कर रहा था 
कई दिन से तुझ पे गान ....

तुम पूछो न हमसे 
क्यों लिखते हो गान 
बस झूम लो पढ़कर 
मुस्कुराते हुए मेरी जान 

लिखने को कर रहा था 
कई दिन से तुझ पे गान ....