I just write the topics of my Own Feelings. I really do not try to copy the texts from anybody,whatever comes in my mind, just I try to blog. Sometimes I may insert the topics as hyper-links for referring the topics. If anybody has objection, may please email to me for deletion. Secondly, I do not also wish to hurt anybody feelings, if anybody feelings are being hurt, I am really sorry.I declare that blogs are not written on anybody. It is just my creation.Thanks to Blogspot-com for all.
Wednesday, September 30, 2015
Monday, September 28, 2015
तेरे याद में
चेहरे किताब पर जाते ही
खो जाता है ये मन
तेरे यादों के समन्दर में
तेरे जुल्फों के लटके झटके में
तेरे खिलखिलाहट में
तेरे मुस्कराहट में
तेरे मौजों में
तेरे रवानी में
तेरे साथ ना बीती कहानियों में
तेरे साथ बीते रूखे सूखे पल में
तेरे चाल में
तेरे नजाकत में
तेरे चमक में
तेरे खनक में
तेरे आवाज़ में
तेरे आवाज़ को सुनने के ललक में
तेरे देखने में
तेरे देखने के अंदाज़ में
तेरे आँखों में
तेरे मृगनैनी आँखों में
तेरे दिल से उठती धड़कन में
तेरे आँखों से बयाँ होती पल में
खो जाता हूँ
बस खो जाता हूँ
शांत हो जाता हूँ
बस तेरे चेहरे से निकलते चमक में .
अगर सचमुच तुम होते पास
सचमुच तुम दूर नहीं रहते
कौन कहता है कि तुम दूर हो
हर वक़्त तुम पास ही रहते .
खो जाता है ये मन
तेरे यादों के समन्दर में
तेरे जुल्फों के लटके झटके में
तेरे खिलखिलाहट में
तेरे मुस्कराहट में
तेरे मौजों में
तेरे रवानी में
तेरे साथ ना बीती कहानियों में
तेरे साथ बीते रूखे सूखे पल में
तेरे चाल में
तेरे नजाकत में
तेरे चमक में
तेरे खनक में
तेरे आवाज़ में
तेरे आवाज़ को सुनने के ललक में
तेरे देखने में
तेरे देखने के अंदाज़ में
तेरे आँखों में
तेरे मृगनैनी आँखों में
तेरे दिल से उठती धड़कन में
तेरे आँखों से बयाँ होती पल में
खो जाता हूँ
बस खो जाता हूँ
शांत हो जाता हूँ
बस तेरे चेहरे से निकलते चमक में .
अगर सचमुच तुम होते पास
सचमुच तुम दूर नहीं रहते
कौन कहता है कि तुम दूर हो
हर वक़्त तुम पास ही रहते .
Friday, September 18, 2015
तीर छोडो अपने कमान से
हे सुन ले
कुछ कह ले
छोडो भी तुम तीर अपने कमान से
पता नहीं लगता है किसके नाम से
जैसे मैं छोड़ता तीर अपने नाम से
वैसे तुम भी छोडो अपने कमान से
कुछ कह ले
छोडो भी तुम तीर अपने कमान से
पता नहीं लगता है किसके नाम से
जैसे मैं छोड़ता तीर अपने नाम से
वैसे तुम भी छोडो अपने कमान से
Monday, September 14, 2015
परोपकार हमसब पर
परोपकार हमसब पर
------------------------
इस पुरे अंतरिक्ष में
तारामंडलों के समूहों में
ग्रहों और उपग्रहों के झुंडों में
जहाँ तक ज्ञान जाता है
जहाँ तक भान हुआ है
केवल अपनी ही धरती है
जहाँ हरियाली है
पानी है दरिया है समन्दर है
खाद्य पदार्थ है
जीव है जन्तु है चर है अचर है
पहाड़ है पेड़ है पौधे हैं
और ना जाने क्या क्या है
जो हम मानवों को नसीब है
जिसके हम एक मात्र भोक्ता हैं
ये सब किसने प्रदान किया
इतना बड़ा परोपकार किसने किया
इतना अमूल्य उपकार किसने किया
एक ही तो है - वो भगवान ।
एक परोपकार हम में से
कोई अगर कर देता
तो कितनी अपेक्षा हो जाती है
चारों तरफ डंका बजने लगती है
अगर चर्चा ना होती
तो दिल में होता
कि कोई तो कुछ बोले
कोई तो प्रशंसा करे
दूसरी ओर एक वो भगवान् है
जो पूछने भी नहीं आता
कि मुझे पूछो
मुझे महान समझो
मैं खुदा हूँ अल्लाह हूँ ईसा हूँ
वह तो और कहता
मानना है तो मानो
नहीं मानना है तो नहीं मानो
पर जियो इस संसार में
रखो इस संसार को
जितना दिन तक रखना है
जितना दिन तक रहना है
तुम कितना भी विध्वंस करोगे
मैं इस धरती को बनाये रखूँगा
तुम भले इसे मेरा कर्तव्य मानो
या परोपकार कह कर इंगित करो
मैं इस धरती को बनाये रखने के लिए
कर्म करता रहूँगा-धर्म करता रहूँगा
धन्य है ये परोपकार
हम सब धरतीवासी पर
उस सर्वशक्तिमान का
जो कई नामों से जाना जाता
कहीं भगवान के नाम से
तो कहीं खुदा के नाम से
कहीं ईसा तो कहीं रहीम से
------------------------
इस पुरे अंतरिक्ष में
तारामंडलों के समूहों में
ग्रहों और उपग्रहों के झुंडों में
जहाँ तक ज्ञान जाता है
जहाँ तक भान हुआ है
केवल अपनी ही धरती है
जहाँ हरियाली है
पानी है दरिया है समन्दर है
खाद्य पदार्थ है
जीव है जन्तु है चर है अचर है
पहाड़ है पेड़ है पौधे हैं
और ना जाने क्या क्या है
जो हम मानवों को नसीब है
जिसके हम एक मात्र भोक्ता हैं
ये सब किसने प्रदान किया
इतना बड़ा परोपकार किसने किया
इतना अमूल्य उपकार किसने किया
एक ही तो है - वो भगवान ।
एक परोपकार हम में से
कोई अगर कर देता
तो कितनी अपेक्षा हो जाती है
चारों तरफ डंका बजने लगती है
अगर चर्चा ना होती
तो दिल में होता
कि कोई तो कुछ बोले
कोई तो प्रशंसा करे
दूसरी ओर एक वो भगवान् है
जो पूछने भी नहीं आता
कि मुझे पूछो
मुझे महान समझो
मैं खुदा हूँ अल्लाह हूँ ईसा हूँ
वह तो और कहता
मानना है तो मानो
नहीं मानना है तो नहीं मानो
पर जियो इस संसार में
रखो इस संसार को
जितना दिन तक रखना है
जितना दिन तक रहना है
तुम कितना भी विध्वंस करोगे
मैं इस धरती को बनाये रखूँगा
तुम भले इसे मेरा कर्तव्य मानो
या परोपकार कह कर इंगित करो
मैं इस धरती को बनाये रखने के लिए
कर्म करता रहूँगा-धर्म करता रहूँगा
धन्य है ये परोपकार
हम सब धरतीवासी पर
उस सर्वशक्तिमान का
जो कई नामों से जाना जाता
कहीं भगवान के नाम से
तो कहीं खुदा के नाम से
कहीं ईसा तो कहीं रहीम से
ज्ञान मार्ग
तुमसे अलग रहने का
बस एक ही उपाय है
ज्ञान मार्ग
अगर अज्ञान में तेरे पास
कहीं भटक कर आ जाऊँ
कत्ल मत कर देना
दुर्योधन को पता था
कि ज्यादा लोभ उसकी जान ले लेगा
मगर लोभ की पराकाष्ठा
वह देखना चाहता था
रावण को भी पता था.
मैं कोई दुर्योधन सा नहीं
ना रावण ही जैसा
हमें भी पता है अपनी हकीकत
फिर भी देख रहा हूँ
रोक रहा हूँ अपने को
कितनी देर रह पाता हूँ तुमसे दूर
कुछ भी पता नहीं
अगर अज्ञानवश
कहीं भटक कर आ जाऊँ
कत्ल मत कर देना
बस एक ही उपाय है
ज्ञान मार्ग
अगर अज्ञान में तेरे पास
कहीं भटक कर आ जाऊँ
कत्ल मत कर देना
दुर्योधन को पता था
कि ज्यादा लोभ उसकी जान ले लेगा
मगर लोभ की पराकाष्ठा
वह देखना चाहता था
रावण को भी पता था.
मैं कोई दुर्योधन सा नहीं
ना रावण ही जैसा
हमें भी पता है अपनी हकीकत
फिर भी देख रहा हूँ
रोक रहा हूँ अपने को
कितनी देर रह पाता हूँ तुमसे दूर
कुछ भी पता नहीं
अगर अज्ञानवश
कहीं भटक कर आ जाऊँ
कत्ल मत कर देना
यादों का पन्ना
यादों के पन्नों से निकलकर
याद आती है तेरी
दिल कुहुककर रह जाता है
कि क्यों हो ना सकी मेरी
यादों के पन्नों से निकलकर
याद आती है तेरी
दिल चहकने लगता है
जब याद आती है मृग्नयन तेरी
क्या आँखे थी तेरी
तेरे देखने से लगता था
किसी प्यासे की प्यास बुझ रही हो
तपिस से शीतलता मिल रही हो
रोगी को दवा मिल रही हो
भूखे को खाना मिल रही हो
किसी को दुआ मिल रही हो
और सारे तेरे सामने खड़े हो
नतमस्तक होकर
कि कब तुम देखोगे उन्हें
बस तुम अपनी नजर से
और वो तृप्त हो जायेंगे
बस तेरे एक नजर देख लेने से
यादों के झुरमुट से निकलकर
जब याद करता हूँ
सचमुच मैं तो तृप्त हो जाता था
तेरे देखने मात्र से
अब मैं कहाँ रह गया "मैं"
जब से "तेरा मैं" अलग हुआ
वजूद ही नहीं है "मेरे मैं" में
जब से तू मुझसे अलग हुआ
तुम खुदा थे मेरी,जहान थे मेरी
तुम्हें देखते ही खुदाई भूल जाता
तुम बने नहीं थे जुदाई के लिए
काश हमदम सा तू बन जाता
कब से इंतज़ार में था तेरा
कोई अबतक मिला ही नहीं
जो मिला है उसे मिलना ना कहो
वह तो मात्र साधन है सुविधा नहीं
याद आती है तेरी
दिल कुहुककर रह जाता है
कि क्यों हो ना सकी मेरी
यादों के पन्नों से निकलकर
याद आती है तेरी
दिल चहकने लगता है
जब याद आती है मृग्नयन तेरी
क्या आँखे थी तेरी
तेरे देखने से लगता था
किसी प्यासे की प्यास बुझ रही हो
तपिस से शीतलता मिल रही हो
रोगी को दवा मिल रही हो
भूखे को खाना मिल रही हो
किसी को दुआ मिल रही हो
और सारे तेरे सामने खड़े हो
नतमस्तक होकर
कि कब तुम देखोगे उन्हें
बस तुम अपनी नजर से
और वो तृप्त हो जायेंगे
बस तेरे एक नजर देख लेने से
यादों के झुरमुट से निकलकर
जब याद करता हूँ
सचमुच मैं तो तृप्त हो जाता था
तेरे देखने मात्र से
अब मैं कहाँ रह गया "मैं"
जब से "तेरा मैं" अलग हुआ
वजूद ही नहीं है "मेरे मैं" में
जब से तू मुझसे अलग हुआ
तुम खुदा थे मेरी,जहान थे मेरी
तुम्हें देखते ही खुदाई भूल जाता
तुम बने नहीं थे जुदाई के लिए
काश हमदम सा तू बन जाता
कब से इंतज़ार में था तेरा
कोई अबतक मिला ही नहीं
जो मिला है उसे मिलना ना कहो
वह तो मात्र साधन है सुविधा नहीं
Wednesday, September 9, 2015
कई दिन से कर रहा मुझे लिखुँ तुझ पे गान
कई दिन से कर रहा मुझे लिखुँ तुझ पे गान
दूर से बैठ कर यहीं से छेड़ूँ मैं तुम पर तान
तेरी बोल सुनने को तरसे मेरे सुने सुने कान
कहाँ बैठे हो गोरी छुपाकर अपनी मीठी तान
देखने को कर रहा वो हलकी हलकी मुस्कान
गोरे गोरे गालों वाली तेरी गुलाबी लाली जान
कहाँ छुपे बैठे हो चुलबुली सी अलबेली जान
कई दिन से कर रहा था कि लिखुँ तुझपे गान
यादों के सहारे जी रहा केवल पूरा हूँ अन्जान
तुम कैसे हो नहीं बताने की क्यों ली तूने ठान
पूछूं मैं किस से हाल तेरा बताओ भी मेरी जान
नयन तरस रहा देखने को मीठी मीठी मुस्कान
लिखने को कर रहा था कई दिन से तुझ पे गान
खोने को कर रहा है तेरे मृगनयनों में मेरी जान
तेरे आँखों के समंदर में डूब जाता हूँ मैं यादों में
महकते हुए गुलाबी गुलाबों में हरे भरे बागों में
गाने को कर रहा था कई दिन से तुझ पे गान
लिखूं मैं गाना सुनाऊँ छेड़कर मैं अपनी तान
चिढ़ाने को कर रहा था कई दिन से तुम्हें युहीं
छूने को दिल कर रहा था तुम्हें बातों से युहीं
कहाँ छुपे बैठे हो अनाड़ी सुन भी लो मेरी तान
लिखने को कर रहा कई दिन से तुझ पे गान
तुम पूछो न हमसे क्यों लिखते हो मेरी गान
बस झूम लो पढ़कर मुस्कुराते हुए मेरी जान
कई दिन से कर रहा मुझे लिखुँ तुझ पे गान
दूर से बैठ कर मैं सुनाऊँ तुझे अपनी तान
दूर से बैठ कर यहीं से छेड़ूँ मैं तुम पर तान
तेरी बोल सुनने को तरसे मेरे सुने सुने कान
कहाँ बैठे हो गोरी छुपाकर अपनी मीठी तान
देखने को कर रहा वो हलकी हलकी मुस्कान
गोरे गोरे गालों वाली तेरी गुलाबी लाली जान
कहाँ छुपे बैठे हो चुलबुली सी अलबेली जान
कई दिन से कर रहा था कि लिखुँ तुझपे गान
यादों के सहारे जी रहा केवल पूरा हूँ अन्जान
तुम कैसे हो नहीं बताने की क्यों ली तूने ठान
पूछूं मैं किस से हाल तेरा बताओ भी मेरी जान
नयन तरस रहा देखने को मीठी मीठी मुस्कान
लिखने को कर रहा था कई दिन से तुझ पे गान
खोने को कर रहा है तेरे मृगनयनों में मेरी जान
तेरे आँखों के समंदर में डूब जाता हूँ मैं यादों में
महकते हुए गुलाबी गुलाबों में हरे भरे बागों में
गाने को कर रहा था कई दिन से तुझ पे गान
लिखूं मैं गाना सुनाऊँ छेड़कर मैं अपनी तान
चिढ़ाने को कर रहा था कई दिन से तुम्हें युहीं
छूने को दिल कर रहा था तुम्हें बातों से युहीं
कहाँ छुपे बैठे हो अनाड़ी सुन भी लो मेरी तान
लिखने को कर रहा कई दिन से तुझ पे गान
तुम पूछो न हमसे क्यों लिखते हो मेरी गान
बस झूम लो पढ़कर मुस्कुराते हुए मेरी जान
कई दिन से कर रहा मुझे लिखुँ तुझ पे गान
दूर से बैठ कर मैं सुनाऊँ तुझे अपनी तान
लिखने को कर रहा था
लिखने को कर रहा था
कई दिन से तुझ पे गान
छूने को कर रहा था
तेरी गुलाबी सी मुस्कान
यादों के सहारे हूँ जी रहा
तुम कैसे हो, नहीं बताने का, लिए तूने ठान
पूछूं मैं किस से हाल तेरा
नहीं मिल पाता तेरा मीठी सी मुस्कान
लिखने को कर रहा था
कई दिन से तुझ पे गान ....
तेरे आँखों के समंदर में
डूब जाता हूँ यादों में
महकते हुए गुलाबों में
हरे भरे बागों में
गाने को कर रहा था
कई दिन से तुझ पे गान ..
चिढ़ाने को कर रहा था
कई दिन से तुम्हें युहीं
दिल मचल रहा था
तुम्हे छूने को युहीं
लिखने को कर रहा था
कई दिन से तुझ पे गान ....
तुम पूछो न हमसे
क्यों लिखते हो गान
बस झूम लो पढ़कर
मुस्कुराते हुए मेरी जान
लिखने को कर रहा था
कई दिन से तुझ पे गान ....
कई दिन से तुझ पे गान
छूने को कर रहा था
तेरी गुलाबी सी मुस्कान
यादों के सहारे हूँ जी रहा
तुम कैसे हो, नहीं बताने का, लिए तूने ठान
पूछूं मैं किस से हाल तेरा
नहीं मिल पाता तेरा मीठी सी मुस्कान
लिखने को कर रहा था
कई दिन से तुझ पे गान ....
तेरे आँखों के समंदर में
डूब जाता हूँ यादों में
महकते हुए गुलाबों में
हरे भरे बागों में
गाने को कर रहा था
कई दिन से तुझ पे गान ..
चिढ़ाने को कर रहा था
कई दिन से तुम्हें युहीं
दिल मचल रहा था
तुम्हे छूने को युहीं
लिखने को कर रहा था
कई दिन से तुझ पे गान ....
तुम पूछो न हमसे
क्यों लिखते हो गान
बस झूम लो पढ़कर
मुस्कुराते हुए मेरी जान
लिखने को कर रहा था
कई दिन से तुझ पे गान ....
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