Wednesday, September 9, 2015

लिखने को कर रहा था

लिखने को कर रहा था 
कई दिन से तुझ पे गान 
छूने को कर रहा था  
तेरी गुलाबी सी मुस्कान 

यादों के सहारे हूँ जी रहा
तुम कैसे हो, नहीं बताने का, लिए तूने ठान 
पूछूं मैं किस से हाल तेरा  
नहीं मिल पाता तेरा मीठी सी मुस्कान 

लिखने को कर रहा था 
कई दिन से तुझ पे गान ....

तेरे आँखों के समंदर में 
डूब जाता हूँ यादों में 
महकते हुए गुलाबों में 
हरे भरे बागों में 

गाने को कर रहा था 
कई दिन से तुझ पे गान ..

चिढ़ाने को कर रहा था 
कई दिन से तुम्हें युहीं 
दिल मचल रहा था 
तुम्हे छूने को युहीं 

लिखने को कर रहा था 
कई दिन से तुझ पे गान ....

तुम पूछो न हमसे 
क्यों लिखते हो गान 
बस झूम लो पढ़कर 
मुस्कुराते हुए मेरी जान 

लिखने को कर रहा था 
कई दिन से तुझ पे गान ....

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