Tuesday, September 30, 2014

दर्द-भरी-याद

हरजगह तू ही तू होते 
फिर भी तुम दूर होते 
हरवक्त तुम साथ देते 
पर फिर भी दूर होते 

आज श्रीगणेश किया तूने 
मैंने पहले कई बार श्री गणेश किया था
पर हरबार दुःख देखना पड़ा 
इस बार तुम आवाज़ लगा रहे हो 
या मुझे आवाज़ लगाना है 
ये तो बता मेरे-जाने-जाना ! !

अर्ज़ है .....
वक़्त गुज़ारता हूँ - तुझ संग वक़्त पाने को 
पर वो वक़्त कब आएगा-तुझ संग वक़्त बिताने को 

एक बार तो संपर्क में आओ,
दूर से ही सही- पर वक़्त तो बिताओ 

दर्द बहुत होता है - जब नहीं देखता तुझे संपर्क में 
दूर से ही सही - पर आओ तो वक़्त पे संपर्क में 

भरोसा देता हूँ - नहीं करूँगा तंग 
जैसे रखोगे - रह लूंगा संग 
दूर से ही सही - रहो कहोगे - तो दूर ही रहूँगा 
पर संपर्क में आओ तो - दर्द नहीं लगता सह पाउँगा 

अभी अचानक - तेरी बहुत-बहुत याद आई  
दिल में दर्द उठा - और तुझे लिखने की बात हो आई 
तू नहीं हो पास में - सचमुच तेरी याद आई 
अब तो आजा संपर्क में - तेरी बहुत याद है आई 

Monday, September 29, 2014

आनेवाली बिछुड़न की बरषी

आनेवाली बिछुड़न की बरषी  
===================
(Anniversary of Separation is just Ahead)

रीत निभा लो - प्रीत निभा लो 
बिछुड़न की बरषी मना  लो 

बस है आने वाले 
वो दिन काले - काले 
प्रीत छूटा प्रीती न छूटी 
नींद टुटा सपने ना  टूटी 
सांस टुटा आस ना टूटी 
मैं  छूटा वो ना छूटी 

रीत निभा लो - प्रीत निभा लो 
बिछुड़न की बरषी मना  लो 

खुशियाँ मनाउ  या शोक मनाउ 
नहीं पता मैं क्या मनाउ 
थे तो ज्ञान के प्याले 
पर आशा देकर भी नहीं आये 
मेरे मृगनयन अनूठे निराले  
पर छद्यम भेष में वे आते रहते 
तितली जैसे उड़ते वो निराले 
पर सच में - कौन सा रंग है सच्चा 
जैसे वे हैं असल में अनुपम-अनूठा सच्चा  

रीत निभा लो - प्रीत निभा लो 
बिछुड़न की बरषी मना  लो 

कान तरस गए सुनने को 
आँख तरस गए देखने को 
मुँह सूख गए बोलने को 
मन तड़प गए मिलने को 
दिल तरस गए आलिंगन को 
तन तरस गए छूने को 
आत्मा तरस गए आत्म-तत्व पाने को 

रीत निभा लो - प्रीत निभा लो 
बिछुड़न की बरषी मना  लो 




Saturday, September 27, 2014

तहरा से मिले कहाँ आऊँ

एक भोजपुरी गीत 
=================
तहरा से मिले कहाँ आऊँ    
ये बतावा हे गोरी -  बतावा हे गोरी 
सबकुछ तहरा चाहीं अपने अड्डा पर 
अड्डा के चौहदी त - बतावा हे गोरी 
सबकुछ तहरा चाहीं अपने गाँव  में 
गाँव  के नाम त - बतावा हे गोरी 

तहरा से मिले कहाँ आऊँ    
ये बतावा हे गोरी -  बतावा हे गोरी 

देखलि जा तहार कल के फोटु 
जीभ तू देखावे लू  
इहे अदा तहार मारेला
धक-धक जियरा जगावे लू 
अइसन कइसन काहे गोरी - बतावा हे गोरी 

तहरा से मिले कहाँ आऊँ    
ये बतावा हे गोरी -  बतावा हे गोरी 

आगे चलके पीछे जे देखलू 
तहार इहे अदा मोहे मारेला 
लटक कमरिया झूमा के गोरी 
केशवा तू हिलावे  लू 
अइसन झमका के चल लू गोरी 
रतिया भर तू जगावे लू 
ऐसे कैसे उदास होलू - बतावा हे गोरी 

तहरा से मिले कहाँ आऊँ गोरी   
ये बतावा हे गोरी -  बतावा हे गोरी 

अइसन कैसे छोड़ देव तहरा के 
तू त हमर जान हो लू 
तहरा बिन नहीं रहब गोरी 
अइसन तू बस जान लू 
हमर मृगनैनी हमर राधा 
तू ही हमर जान हो लू 
अब तनिक तू हंस भी दा
जे हमरा भी स्माइल निकले 
तहरा से मिले कहाँ आऊँ
ये बतावा हे गोरी -  बतावा हे गोरी 

तहरा से मिले कहाँ आऊँ
ये बतावा हे गोरी -  बतावा हे गोरी 

Friday, September 26, 2014

अनुभव के कुछ पल

तुमसे दुरी तो बस एक परदे की है 
अब इसे तुम मिलों दूर करो तो ये तुम्हारी बातें हैं 

जोर नहीं दे सकता क्योंकि ज्ञान से बंधा हूँ 
वरना तुमसे दुरी तो बस आइना के प्रतिबिंब सा है 

जब भी सांस लेता हूँ - हर सांस में तुम होते 
अब तुम कहो तो सांस से भी कोई दुरी रखता है क्या 

मैं नहीं बनता स्वार्थी अपने लिए 
मगर तुमको देखते ही स्वार्थ जग जाता है 

यह कोई ज़रूरी नहीं कि मुझे अबतक कोई मिला नहीं 
या जो है उसमे संतोष नहीं, तुम रहोगे तो तेरा भी संतोष है 

तुम भुलाने की चीज़ नहीं - क्योंकि तुम चीज़ नहीं हो 
तुम तो हो अनूठे रूह - जो बस रूह-से-रूबरू दिला देते हो 

तुम दुःख मानते मेरे विचारों का - क्या ये प्रेम सा तुम्हें नहीं दीखता 
कौन किसका ध्यान देता इस जग में - केवल प्रेम ही प्रेमी को दीखता 

तुम होते हो तो मेरा जीवन तुकांत बन जाता है
अब अगर मेरे बिना भी तुम तुकांत रहते तो अलग की बात है 

उम्र न मेरी ज्यादा है न तेरी कम है - 
रूह की कोई उम्र नहीं होती 
एक-बार बस एक-बार रूह को महसूस लेते - 
तो एक रूह की बात सच्ची लगती 

जब कायनात बनने लगे थे - 
तब एक-एक रूह उस "एक रूह" से निकलने लगी थी
तब रूहों ने पूछा फिर मिलूंगा कैसे - 
तो उसने कहा था - जब दो रूह मिलेंगे अपने से 

चिरकाल तक - अनंत तक

आज तक मैंने उन्हें 
अप्सरा नहीं कहा 
रम्भा नहीं कहा 
मेनका नहीं कहा 
क्योंकि ये कुछ देर के लिए आते 
किसी के जिंदगी में 
जब भोग खत्म होता 
चले जाते किसी की ज़िन्दगी से 

जब भी मैंने उपाधि दी 
जब भी मैंने पुकारा उन्हें 
राधा कहा - पार्वती कहा 
जो जाने के लिए नहीं 
बल्कि अपनाने के लिए होते 
जन्म-जन्मांतरण तक 
चिरकाल तक - अनंत तक 




Thursday, September 25, 2014

अभी तुम बात करते-कितना अच्छा होता

अभी तुम बात करते 
कितना अच्छा होता 
यहाँ की रिमझिम की फुहार कीं बुँदे
बातो ही बातो में तुम तक पहुँचाता  

रात जो देखा तेरे जुल्फों को 
अनायास ही मन में बादल छाये 
घनघोर घटा का मौषम 
अनायास ही दिल में आये 
रात भर तो तुम बरसे ही सपने में 
उमर घुमड़ तन-बदन में छाये 
सुबह सुबह आसमान में भी 
घनघोर बादल थे छाये 
देखते देखते बरसने लगे 
तन-बदन को भिंगाये 

अभी तुम बात करते 
कितना अच्छा होता 
यहाँ की एक एक बून्द की खबर 
तुम्हे देता और भिंगाता और खुद भींगता 

किस जिद्द पे अड़े हो 
पता नहीं लगता 
एक जगह ठिकाना रखो 
सचमुच तेरे विचारों का पता नहीं लगता 
कभी मन के बातो में चलते 
कभी तन के बातों में चलते 
कभी तो दिल के बातो में चलो 
जैसे मैं चलता हूँ तुम भी चलो 
कुछ नहीं घटेगा तेरा 
कुछ नहीं खर्चेगा तेरा 
जब दिल की बात दिल से होते 
कहीं भी मिलते दिल से दिल मिलते 
कभी भी मिलते हिल-मिल चलते
कुछ पल गुनगुना लेते
हरपल जी लेते 
पल पल जी लेते 

अभी तुम बात करते 
कितना अच्छा होता 
यहाँ की रिमझिम की फुहार कीं बुँदे
बातो ही बातो में तुम तक पहुँचाता  



Wednesday, September 24, 2014

तेरे बिन नहीं जीना

तेरे बिन नहीं जिया रे 
तेरे बिन नहीं जीना 
मर मर के जी लेते हैं 
तेरे बिन नहीं जीना 

सतरंगी मनरंगी अदाएं   
तीखे नयन निराले 
मृगनयनी तू मनमोहिनी है 
सब कुछ तुझमे भायेssss 
सब कुछ तुझमे भाये 
तेरे बिन नहीं जीना ........

तेरे बिन नहीं जिया रे ssss
तेरे बिन नहीं जीना 

यादें तेरी या भक्ति प्रभु की 
सब्र का घूंट पीना रेssss
सब्र का घूंट पीना 
एक ही साधे सब सधे  
तू ही मेरी हिना रेssss
तू ही मेरी हिना 

तेरे बिन नहीं जिया रे ssss
तेरे बिन नहीं जीना 

सावन की झरी अगन लगाये 
मुश्किल में है जीना रेssss
मुश्किल में है जीना 
तुमसे बिछड़ के हूँ ही कहाँ रेssss
तेरे बिन नहीं जीना 

तेरे बिन नहीं जिया रे ssss
तेरे बिन नहीं जीना 

दूर बहुत दूर - चाँद भी दूर 
ठंढी हवा के झोंके भी दूर 
रूह की महक रूह ही जाने 
सब कुछ तुझमें समाया रे ssss 
सब कुछ तुझमें समाया

तेरे बिन नहीं जिया रे ssss
तेरे बिन नहीं जीना 

Tuesday, September 23, 2014

कहाँ गए मेरे यार

ये सावन करे पुकार 
तुझसे मिलने को बेक़रार 
बरसे पानी खुल के बोले
कहाँ गए  मेरे यारsssss 
ये सावन करे पुकार ......

मेरे नैना तेरे नैना से 
मिलने को बेकरार 
जब जब देखे अँखियाँ मेरी 
करते हैं चीत्कार 

कहाँ गए  मेरे यारsssss 
ये सावन करे पुकार ......

रात अँधेरी सुना जग है 
खाली लगता संसार 
कैसे कहूँ तुम ही थे मेरे 
जीवन के श्रृंगार 

कहाँ गए  मेरे यारsssss 
मेरे यार ..मेरे यार

जीवन पथ पर कैसे बढूँ  मैं 
पाता  हूँ अंधकार 
उड़ता उड़ता ये धुऑं भी 
करते है पुकार 

कहाँ गए  मेरे यारsssss 
मेरे यार ..मेरे यार




मतलब समझा

अरे अब समझा 
मतलब ख़बरदार का 
मैं झूठमूठ परेशान रहा 

अरे ये तो मै पहले से जानता था 
पर बचकानी हरकत समझ 
अन्य बातें समझाने जैसा 
ये भी समझाने की कोशिश करता था 
तब ही तो बिदा होने पे 
सच का मैं खिजा हुआ था 
गुस्सा था - तकरार था 
प्यार भी था - इकरार भी था 
इंतज़ार भी था - आशा भी था  
कि क्यों मुझे अकेला छोड़ दिए 
अपने साथ क्यों नहीं लिए :) ;)

इसमें तुम क्या छुपाते हो 
इससे तुम क्यों घबराते हो
ऐसा तो सब करते हैं 
हंसी - मजे के लिए तो करते हैं 
ये भी एक ठिठोली है 
केवल सभ्य जगह में अविद्या है 
इसीलिए तो बिदा होने समय 
मैं युहीं खामोश रहा 
आश्चर्य में रहा 
पर नियति समझ कि 
तुम नहीं समझे हमें 
मैं ही चुपचाप रहा.

इसलिए तो तुमसे 
हमें इतना प्यार हुआ 
और तुमसे दूर नहीं समझा 
तितलियों का रंग दिया 
मृगनयनी का नाम दिया 
सचमुच तुम अलबेले हो 
दिल से खिले-खिले हो 
इसलिए तो तुम इतना करीब लगते  
पर तुम हमें बहुत दूर का समझते 
मैं जोर नहीं दे सकता 
क्योंकि ज्ञान से बंधा हूँ 
वरना हकीकत में तुम 
मेरे दिल का आइना हो .

कभी पलट के देखोगे मुझे - मैं वहीँ खड़ा मिलूंगा 
मृगनयनी के आँखों में तुरंत मेरा चेहरा तुम्हें मिलेगा 







Monday, September 22, 2014

ज्ञान-अज्ञान

भगवान ने ही संसार बनाया 
अपने रूपों का विस्तार किया !

ज्ञान रहने पर संसार नहीं बधता    
ज्ञान आ जाने पर संसार में नहीं रमता 
संसार और भगवान एक ही लगता 
संसार में डुबकी नहीं लगा पाता
डुबकी लगाता भी तो ज्ञान में ही रहता  

ज्ञान के ना रहने पर संसार दिखता 
संसार का रंग दिखता 
भगवान दूसरा लगता
संसार में डुबकी लगाता 
संसार के दुःख में दुखी होता 
संसार के सुख में सुखी होता 

इस शरीर में आत्मा के साथ 
संसार के पंच-भूत भी समाहित होते हैं
इस आत्मा और पंच-भूत के कारण  
इस शरीर में दिन-रात की तरह 
ज्ञान और अज्ञान आते रहते हैं 

सोचा था, 
अज्ञान के समय "तुम" "मेरे" साथ होते 
और ज्ञान के समय "मैं" "तेरे" साथ होता 
पर "तुम" बात कहाँ-की-कहाँ ले गए 
इतनी छानबीन करके 
कोई थोड़े ही संसार में डुबकी लगाता 

कल भी तेरा इंतज़ार था 
आज भी तेरा इंतज़ार है 
कल भी तेरा इंतज़ार रहेगा 
"तुम" अनुपम हो 
कहता था -कहता हूँ -कहता रहेगा 




कर ले चाट गोरी

कर ले चाट गोरी - बात गोरी 
चाट कर ले - गोरी चाट कर ले 

चाट पकोड़े खिलाऊंगा तुझे 
नमकीन तीता लगाउँगा   
कभी मीठा-मीठा दर्द जगा के 
ठंढी आह दिलाऊंगा 
कर ले चाट गोरी ssssssssss

कर ले चाट गोरी - बात गोरी 
चाट कर ले - गोरी चाट कर ले 

देख तुझेss  देख के
गीत निकल जाता है 
सुनने के बेताब 'हेलो' 
कान तरस जाता है 
कर ले चाट गोरी ssssssssss

कर ले चाट गोरी - बात गोरी 
चाट कर ले - गोरी चाट कर ले 

नहीं करूँगा कोई गन्दी बात
हमेशा करूँगा अच्छी बात 
गीता के ज्ञान से लेकर 
रामायण का गीत बताऊंगा  
कर ले चाट गोरी ssssssssss

कर ले चाट गोरी - बात गोरी 
चाट कर ले - गोरी चाट कर ले 

चाट की खिड़की खोल के गोरी 
कर दे हमसे - हाय-हेलो 
सचमुच गाना हिट हो जायेगा 
अगली फिल्म में गाए-गेलो 
कर ले चाट गोरी ssssssssss

कर ले चाट गोरी - बात गोरी 
चाट कर ले - गोरी चाट कर ले 



एक तितली की कहानी - मेरी जुबानी

एक तितली की  कहानी - मेरी  जुबानी 
==============================
तितलियों सी उड़-उड़ आते हो 
रंग-बिरंगी छटा फैलाते हो 
इधर-उधर फुदकते हो 
इशारों से कुछ-कुछ कहते हो
दोस्ती का हाथ बढ़ाते हो 
मटक-मटक करतब दिखाते हो 
रंग-बिरंगी कहानी बनाते हो 
शेरो-शायरी के लहजे में कहते हो 
मैं लालची हूँ ऐसा भी कहते हो 
फिर कभी अपने तड़पने की बात करते हो 
कभी मेरे तड़प पे दुःख जताते हो 
कभी मेरे मरण पे हंसी मनाते हो 
कभी मेरे को गिनती नहीं करते हो 
कभी हँसते हुए खिलखिलाते हो 
कभी बात करने को कहते हो 
कभी मिलने की बात करते हो 

जब हाथ बढ़ाता बात करने को 
बात करने से कतराते हो  
पता नहीं किस-किस लहजे में 
सावधान होने की भी धमकी देते हो 

नहीं पूछूंगा-ऐसा क्यों करते हो 
जो भी करते हो - अच्छा करते हो 
कितना वक़्त हमपे जाया करते हो 
कितना मेरी ध्यान रखते हो 
कौन तुझे कहता कि तुम अच्छे नहीं हो 
क्यों तुम ऐसा सोच रहे हो 
कि तुम अच्छे नहीं हो 
मुझे तकलीफ दिए हो 
कितना तुम सोचते हो 
फिर बात क्यों नहीं करते हो 

देखने का मन था-सुनने का दिल था कि 
कैसे लिख-के-बात करते हो            (चाट)
कैसे आवाज़-बात करते हो             (फ़ोन)
कैसे दिल से बात करते हो 
कैसे मन से बात करते हो 
कैसे उमंग से बात करते हो 
कैसे ठुमुक-ठुमक बात करते हो 
कैसे चल के बात करते हो 
कैसे धीरे-धीरे बात करते हो 

इन बातो में ही सब बात हो जाती 
तुम्हारे दिन भी कट जाते 
मेरे रात भी कट जाते
बची ज़िन्दगी जीना है कैसे 
वह सारी बात हो जाती  

जो मैं समझ रहा हूँ 
जितना जान रहा हूँ 
कि मैं तुझसे मिलने को आऊँ
मेरा भी दिल करता है मिलने को 
पर दिल नहीं करता 
उस जगह जाने को 
जहाँ से तुमने विदा किया था 
बताओ कोई और जगह 
जहाँ मिल सकते हो 
बात कर सकते हो 
डरना नहीं - तेरे मर्ज़ी वगैर 
छुऊँगा भी नहीं - देखूंगा भी नहीं 
ऐसा तुम पहले भी देख चुके हो 
पर इतना ज़रूर कहूँगा कि 
मिलने से पहले बात करो 

अब गुस्सा नहीं आता है 
अब केवल आसूं आते हैं 
जो तेरे प्यार दर्शाने पर
दिल से आसूं निकलते हैं 
तेरा एक ये भी रंग लगता है 
पचास-रंग के तितलियों में से 
एक नया रंग का अदा जुड़ जाता है 

कितने रंग हैं तेरे - जितने रंग है तेरे 
सीधे तो नहीं - पर परोक्ष से जान गया हूँ
सब का खांका आंक लिया हूँ 
क्या क्या रंग तूने दिखाए 
सब तो नहीं पर कुछ जान गया हूँ  ;)
कभी अगर जानना चाहो तो 
तो एक-एक कर दिखा सकता हूँ 

इतना तो ज़रूर कह सकता हूँ 
तुम हो अलबेले-तुम हो अनमोल 
यह तुझे दिल से कहता हूँ 
तेरे जैसा नहीं है कोई 
तेरे जैसा नहीं मिलेगा किसी को 
ऐसा सचमुच कह सकता हूँ 
जितने तुम छोटे दीखते हो 
उतने ही अंदर से बड़े हो 
बड़ो-बड़ो को एक चवन्नी में 
खड़े-खड़े बेच सकते हो     ;) 
यही तेरा गुण तो मैं जानता था 
तब ही तो तुम्हें 
कभी अपने से अलग नहीं माना 
और कितना भी सितम कर ले मुझपे 
कभी अलग नहीं मानेगा 
चाहे भेज दे कारगाह 
या चढ़ा देना सूली पे 
हर जगह मैं बोलूंगा 
मैं तुमसे प्यार करता हूँ 
और करता रहूँगा 
तुम करो न करो प्रत्यक्ष में 
मैं तेरे संग ही जीता रहूँगा 
जैसे जी लेते थे राधा-कृष्णा 
मैं भी ऐसे ही जीता रहूँगा 
मेरे नसीब में इतना ही प्यार 
खुदा ने दिया है 
तो तुम कैसे बदल सकते हो 
तुम कैसे मुझे ज्यादा दे सकते हो 

इसमें मैं ज्यादा जोर नहीं दे सकता 
क्योंकि पहले भी जोर दे चूका हूँ 
कहाँ की बात कहाँ तुम ले गए  
उसमे मैं तड़प चूका हूँ - मर चूका हूँ  
मैं कई बार जीते जी मर चूका हूँ 

अब मरने में कोई तकलीफ नहीं होगी
क्योंकि क्या होता है तेरे बिना मरना 
कोई हमसे सीखे - कोई हमसे जाने 
कि क्या होता है तेरे बिना जीना

इस जन्म में तो तू कसम खा रखे हो 
कि तुझे मैं पाने के क़ाबिल नहीं
अगले जन्म के लिए मैंने खुदा से कह रखा है 
देना तो तुम्हें देना,वरना अगला जन्म देना नहीं 

निष्कर्ष -
अब छोडो- ऊपर की बातें 
बहुत हो गया - छुप छुप के दाव खेलना
मुझे गुस्सा में गाली देना 
फिर दुलार करना - दूर से ही प्यार करना 
सहारा देना - जीना सिखाना
नानी और दादी की तरह समझाना 
सचमुच दिल करता है 
कि अभी तुमसे बात करूँ 
अब तुम्हीं बात करोगे 
तब ही करूँगा 
जब तुम कहोगे 
तब ही मिलूंगा  :)



Saturday, September 20, 2014

कुछ शेर

कुछ शेर --

सपने टूटते हैं 
क्योंकि हक़ीक़त नहीं हुआ करते 
नींद से जागते हैं 
क्योंकि हमेशा सोया नहीं करते 

किसी को कोई मतलब नहीं इस जहान में 
कि आपके लिए आये आगे बढ़कर 
आप ही जबतक आगे बढ़ते रहे 
दूसरा भी आता है-साथ देने या बाधा बनकर

एक दिन मैं भी इसी तरह धुआं बन जाऊंगा 
जैसे एक दिन तो बनना ही है सारे लोगो को 

तुम होते कौन हो पूछने वाले कि मैं जीता हूँ या मरता हूँ 
तुम भी तो अपने में मस्त हो-कि जिन्दा भी रखते और मारते भी हो 

तुम होते तो बहुत हो पूछने वाले कि मैं जिन्दा हूँ या मर गया हूँ 

पर पता नहीं-क्यों खामोश हो-पर तुम ऐसा क्यों करते हो 

तुम मेरी गुनाह का नाम तो दो कम से कम
ताकि जियूं या मरूं-पर तड़पते हए तो ना निकले दम

Friday, September 19, 2014

तेरे दोस्ती के क़ायल

किसी ने खूब कहा है - 
"सपने वो नहीं होते 
जो सोने पे आते हैं 
सपने वो होते हैं 
जो सोने नहीं देते हैं "

तुम सपना थे -पर अपना थे 
तुम दूर थे -दिल से नज़दीक थे 
तुम वहाँ  थे -पर दिल में थे 
तुम जहाँ भी थे-पर हरजगह थे 

तुमसे ज्यादा तो हम 
तेरे  दोस्ती के लिए क़ायल  हैं 
तुमसे ज्यादा तो हम 
इस ज़िन्दगी में घायल हैं 

तुम जो आ जाओगे तो 
सात जनम के लिए नहीं 
बल्कि सात सौ जन्म से भी आगे 
साथ रहोगे - संग रहोगे 
ध्रुव तारा  की तरह 
एक तारा निर्माण करोगे 
साथ-साथ नाम के साथ 
चमकते और चमकाते रहोगे 

तुम्हें नहीं पता -तुम क्या हो 
मुझे पता है कि -तुम क्या हो 
तेरे जैसा जाग्रत कोई नहीं दीखता 
तेरे जैसा वक्तित्व कही नहीं मिलता 
अगर कहीं बिकता तो खरीदता
पर ऐसे लोग नहीं बिकता 
उसका कोई मूल्य नहीं होता 
वह अनमोल है होता 
तुम सही में अनमोल हो -नायाब हो 
उड़ान हो -मंज़िल की पहचान हो 
तुम है तो दुनिया है 

नहीं हो तो कुछ भी नहीं है 

=================
Sapne wo nahi hote
Jo sone pe aate hain
Sapne wo hote hain
Jo sone nahi dete hain

Tum sapna the-Par apna the
Tum dur the-dil se nazdik the
Tum wahan the-par dil me the
Tum jahan bhi the harjagah the

Tumse jayada to hum
teri dosti ke liye kayal hain
Tumse jayada to hum
Iss zindagi me ghayal hain

Tum jo aa jaoge to
Saat janam ke liye nahi
Balki saat sau janam se bhi aage
Sath rahoge
dhruv tara ki tarah
Ek tara nirman karoge
Sath-sath naam ke sath
Chamkte aur chamkate rahoge

Tumhe nahi pata-tum kya ho
Mujhe pata hai ki-Tum kya ho
tere jaisa jagrat koi nahi dikhta
Tere jaisa vaktitva kahi nahi milta
Tum sahi me anmol ho-Nayab ho
udan ho-manzil ki pahchan ho

Thursday, September 18, 2014

मायुषी में भी तुम साथ होते

मायुषी में भी तुम साथ होते 
ख़ुशी के पल में भी साथ होते 
हर-पल तुम साथ होते 
कैसे कहूँ कि तुम कब नहीं होते

कल जब मायुष था 
तुम ही थे जो मायुषी तोड़े 
हकीकत में तो नहीं हो साथ 
पर यादों और सपनों में तुम ही तुम हो 
कल जब थक कर सोया था 
नींद भी नहीं आती थी 
पर जब नींद आई 
तब तुम आ गए 
अपने बालों के साये में 
मुझे सुला गए 
आलिंगन कर गए 
गम दूर कर दिए 
कैसे कहूँ कि तुम कुछ नहीं हो 
तुम बहुत कुछ हो 
तुम सब कुछ हो. 

क्यों डरते हो मुझसे 
क्यों कतराते हो मुझसे 
बहुतेरे अरमान दबे हुए हैं 
नहीं किया कोई मिला नहीं 
ऐसा नहीं कि तुम कोई ठेकेदार हो मेरे 
पर तुम किसी देवी से कम नहीं दीखते
तुम बहुत कुछ हो 
तुम सब कुछ हो. 

लोग मुझे पागल कहते हैं 
पर ज्ञान है मुझे कि मैं क्या हूँ 
अगर मैं पागल होता 
तो अबतक सरफिरा रहता 
तुम्हे कष्ट देता - परेशान करता 
अपने कष्ट लेता - परेशान रहता 
मुझे पूरा ज्ञान है - पूरा भान है कि 
तुम अप्सरा भी नहीं हो 
तुम नारी भी नहीं हो 
तुम कोई अवतार हो.

एक  शेर - 
दूर रह भी नहीं सकता 
पास जा भी नहीं सकता 
अजब कसम-कस ज़िन्दगी है 
ओ खुदा - या तो उठा ले - या पर्दा हटा दे.

अगर उनकी मृगनयनी सी कोई तस्वीर दिखती 
तो कल की मायुषी नई कविता से निकलती 
कैसे भेजूं सन्देश - वो दूर के मुसाफिर 
अगर इनायत करते - जीवन की गाड़ी तो चलती 



Tuesday, September 16, 2014

मायुषी

कितनी अच्छी बारिस थी-कई खुशियों का आलम था 
पर एक हकीकत ने ज़िन्दगी में फिर से मायुषी ला दिया 

:(




आज के रूप का आलम

देख के तेरे रूप का आलम 
मस्ती तैर रहा तेरे चेहरे में 
गाल गुलाब नयन शराबी
दमक रहे छुक-छुक में 

जुल्फें तेरी सजी-सवंरी सी
महक रही है क्षण-क्षण में 
दुपटे की अदायें ऐसी जैसे 
फूल खिले हों बगियन में 

स्वेत वस्त्र में सिमटी गोरी 
मादकता लाये पल-पल में
डिंपल आ रही मुस्कान से
दमके चमक अंग-अंग में 

शोखी दा छाई काया में
रंग भर रहा यहाँ मेरे मन में
छू रहा तेरे अंग-अंग को
तस्वीर लगा के दिल में 

दिल करता पी जाऊं तुझे
समां लूँ -शिवशंकर की तरह
छुपा लूँ तुझे सारी दुनिया से
बन के अर्धनारीश्वर की तरह 

क्यों हो दूर मुझसे गोरी
बहुत रहा मैं दूर तुझसे
मुझे प्यार है गोरी तुमसे
नहीं कह पाया कभी तुझसे

मुझे प्यार हो गया-इकरार हो गया
गा रहा हूँ - मैं यहाँ चहक-चहक के
रमैय्या वस्तावैय्या,रमैय्या वस्तावैय्या
मैंने दिल तुझको दिया -गाना गा के 

कहाँ हो तुम दूर पड़े अकेले 
लगा लो सुर मेरे साथ गा के
दे दो मुझे कहीं से भी संकेत 
गाएं हमदोनो दूरभाष लगा के 

ऐसे मिल जाओ भी मुझसे, जैसे 
दो-नदी मिलते कल-कल करके
नहीं भान रहता दोनों नदी को 
जैसे हों धारा एक नीलगगन के 

दिल होता-यही तस्वीर यहाँ लगा दूँ 
छांट के केवल तेरे लावण्य रूप के
बन जाने दे अब मुझे तेरा कवि 
लिख लेने दे कविता तेरे रूप के 





Saturday, September 13, 2014

प्रेम भी है पानी जैसा

कितनी अच्छी व्यवस्था है 
पानी का कल-कल बहना 
प्रेम भी है पानी जैसा 
पल-पल दिल में धड़कना  

क्यों आ जाते आँसू 
सोचते ही तेरा नाम 
कैसा है तुझसे नाता 
थकते नहीं लेते नाम 

तुम हो चाँद, तुम हो बहार 
थिरक-थिरक देते फुहार 
करतब तेरे बहुत निराले 
दिल करता गले लगा ले 

कितना भी सोच में रहता 
कितना भी शोक में रहता 
तेरा ध्यान आते ही चेहरे पे 
मुस्कान अपनेआप छा जाता 

कैसे बोलूं - घटाओं को 
कि मत बरसो - तुम हो नहीं
क्या दृश्य दिख गया उसदिन 
प्यार दोगे या सजा,पता नहीं 

दिल कहता धड़क-धड़क
तुझसे फरियाद करने का 
एक बार नहीं,बल्कि कई बार
है तेरे साथ मुझे भींगने का 

क्या तुमने कभी सोचा था ऐसा
क्या तुमने अनुमान किया था 
जान-बुझ कर दिल खामोश हो 
देखने को जुर्रत किया करता था

कुछ भी कहो,तुम नायब हो 
अनूठे हो,अलबेले हो,जहीन हो
ठक-ठक करते जब चलते थे 
ऐसा लगता-जमीन चूमता हो 

दिल तो मेरा भी करता था 
तुम्हें चूमने का,आलिंगन का
तुझे गुदगुदी लगाने का 
हरवक्त देखते रहने का 

तुम आ जाओ जीवन में 
मेरे लिए सचमुच "तुम" हो 
नाप लेंगे हमदोनों एक दिन 
सूरज कितना भी दूर हो 

तुम्हें भी जरूर डर लगता है 
जीवन के उथल-पुथल देख के
अगर ऐसा हुआ होता तो 
हेमा नहीं बनी होती धर्म के 

कुछ भी करने से पहले मैं 
बहुत सोचता रहता था 
मैं पूर्ण हूँ नहीं,पहले हो लूँ 
अवसर निकल जाता था 

दुनिया को देखा, लोग देखे 
पूर्णता का कोई माप नहीं 
देखा-जो भी पहुंचे सफलता पे 
सब शुरू किये,रुके कोई नहीं 

असफलता को देखा गौर से  
पाया-मैं पूर्ण हूँ,बस किया नहीं 
तुम्हें देख - अपने अंदर देखा 
तो पाया-मैं शुरू ही किया नहीं 

नहीं कहता-छोड़ दो अपना जीवन 
तुम भी अपना जीवन चलते रहो
जैसे तुम चलते औरों के साथ 
वैसा ही हमदोनों साथ चलते रहो

कट जायेंगे जीवन के रस्ते 
जैसे नीलगगन में तारे हो 
कर्म हमारा रास्ता रहेगा  
धर्म हमेशा हमारा साथ हो 

लिखने को दिल करता है 
प्यार के कुछ मधुर गीत 
दोनों के दिल के धड़कन
बनता हो मधुर संगीत 

एक बार बस हेलो सुना दो 
खो जाने दो उस गहराई में 
जहाँ से निकलेगा मधुर तान
जिसे तुम भी सुनोगे कान में  :)


Wednesday, September 10, 2014

ब्रह्म सत्य - जगत मिथ्या

ब्रह्म सत्य - जगत मिथ्या
कह गए आदि-गुरु शंकराचार्य
मैंने भी जीवन में अनुभव किया
जैसा कह गए हैं आचार्य


आज की गतिविधि देखकर
याद आ गए उपरोक्त विचार
हा-हा-हा-हा हँसी आ गई
जब देखा तेरा विचित्र व्यव्हार

कोई गिला नहीं-शिकवा नहीं
तू भी मजा ले रहे-मैं भी ले रहा
तू खेला रही-मैं खेल रहा
हा-हा-तू हँसा रही-मैं हंस रहा

यही तो जीवन है-यही कहानी है
ज़िन्दगी की यही रवानी है
कौन क्या लेकर आया है
कौन क्या लेकर जाता है

सब माया है-प्रभु की छाया है
यह संसार तिनका सा पड़ा है
जैसे भी हो-संसार चलना है
हमे भी जीना है-तुम्हें भी जीना है

अगर मुझे "सत्य-ज्ञान" न रहता
तो क्या तेरे माया-रूप में न भटकता
मैं भी पागल सा तिल-तिल मरता
और तू हा-हा औरो के साथ हँसता

पहले भी कहा था-हमेशा ही कहूँगा
साथ नहीं जिए तो क्या होगा
साथ जी ही लेंगे तो क्या होगा
जब कुछ नहीं होगा-क्यों न जियेगा

तभी तो-देख के तेरा किताब की उक्ति
ही दिल किया था कि आवाज़ दूँ
तू ना सुने-अनसुनी किये,तेरे दिल में था
मुझे हरा दूँ-मेरे दिल में था-तुझे जीता दूँ

हा-हा हँसी आ रही है मुझे
लिखते मैं - मुस्कुरा रहा हूँ :)
तुम कैसे हँसे होगे मेरे आवाज़ पे
मुझे पता है - मैं जान रहा हूँ :)

मैं बोलता जब-एक एक शब्द का भान है
नींद में भी रहूँगा - तब भी मुझे ज्ञान है
सपने की दुनिया में खो जाता हूँ
वह ईश्वर कहता-खो जा-"तू" मेरी जान है

तुम नहीं समझोगे-मैं परे हूँ इस दुनिया से
कितना भी विकाश कर लेगा ये दुनिया
पर यह कोई नहीं समझेगा-तुम भी नहीं
कि यह सब खेल है ईश्वर का- है एक माया

इसी खेल को खेलता देख
मैं भी इस दुनिया में खेल लेता हूँ
तुम हँसते हो मेरे ऊपर
मैं ईश्वर को देख हंस लेता हूँ

कोई गिला नहीं-शिकवा नहीं
तू भी मजा ले रहे-मैं भी ले रहा हूँ
तुम अध्भुत हो-कहता था-कहता रहूँगा
हा-हा तुम हँसा रहे - मैं हंस रहा हूँ           :)