Thursday, September 4, 2014

पुरवइया हवा

कुछ दिनों से गमगीन रहता था 
मुस्कराहट भी ताना कसता था 
तुम तो बैठे हो मुझसे रूठ के 
कभी कभी जीने का दिल नहीं करता था 

गमगीन सा यूँही भटकता था 
कहीं भी जाकर भी चैन नहीं था 
तुम सोचते मैं हूँ जहाँ हूँ खुश 
इसी बात से गुस्सा करता था 

अभी कहीं से पुरवइया चली जोरों की 
उड़ा दी मेरे बालों को तेरे जुल्फों जैसे
लोगों ने बोल दिया- क्या उड़ते हैं बाल
लगते हैं किसी रोमांटिक हीरो जैसे 

तेरे उड़ते जुल्फों की तुरंत याद आई
बरबस चेहरे पे मुस्कराहट छा गई
तभी दूसरे ने बोला,क्या मुस्कुराते हो 
दुनिया क्या जाने-ये मुस्कराहट तेरे याद से थी आई 

क्यों हो जाता हूँ गमगीन, न चाह कर भी
पर क्यों न गमगीन होऊं तेरे बिना 
तुमसे करता हूँ प्यार,इसमें तुझे शक है क्या 
नहीं रह पाता हूँ एक पल भी तेरे याद बिना 

सच में नहीं जोड़ता-तुझे कभी काम से 
भले ही तू बड़े कामी हो इस दुनिया में 
तुम तो वो पल हो जो आते हो ज्ञान में भी
जहाँ मिट जाते हैं सारे काम तेरे आँखों में 

जब कभी तेरी बात चलती है किसी से 
खो जाता हूँ तेरे यादो में, उन आँखों में 
उन बालों में, उन चालों में, अदाओ में 
तेरे हंसी में, निश्छल खिलखिलाहट में 

कितने खोल डाले पन्ना,अपना बंद करके
भरमता रहता हूँ तेरे इन पन्नों के बातों में 
पता नहीं तू होते भी या नहीं, कहीं का कहीं 
कुछ लिख देता और तू भी उलझते होगें बातों में


बता भी दो हमें कि है वो तेरा कौन सा पन्ना
जहाँ से पढ़ सकूँ तेरे बातों का सिलसिला 
कम-से-कम ये तो तुम कर ही सकते हो 
नहीं मांग रहा तुमसे कोई आगरा का किला 

चलो- अब बताओ भी कि तुम कैसे हो 
कैसे लगते हो अपने खिलखिलाहट में 
पहले तो मैं खुश हो जाता था सुनकर 
आज कल कौन खोता है खिलखिलाहट में 

कैसे लगते हो देखने की इक्ष्छा होती है
क्या दिखा पाओगे अपनी मृगनयनी आँखें
तुमने तो न जाने कौन से गुड  खाए हैं
कितना भी बोलूँ,नहीं पसीजता तेरी आँखें 

चलो-नहीं देना कुछ, तेरे बातों के सिवा 
कितनी भी आरज़ू रहे मेरी आँखों में 
सुनने को तरस गए हैं तेरे मीठे बोल
जब खो जाता था कोयल की किलकारी में 

बहुत इक्ष्छा है कि लिखूं प्यार के गीत 
कैसे होते हैं जब दो दिल मिलते हैं 
अगर तुम्हें पता हो तो बता देना 
हो सके तो चलो मिल के लिखते हैं 

कुछ दिनों से गमगीन रहता था 
तुम तो कुछ बोलोगे नहीं दिल में 
आज कुछ लिखने को मेरा दिल चाहा 
सोचा चलो बताये क्या है दिल में 



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