अरे अब समझा
मतलब ख़बरदार का
मैं झूठमूठ परेशान रहा
अरे ये तो मै पहले से जानता था
पर बचकानी हरकत समझ
अन्य बातें समझाने जैसा
ये भी समझाने की कोशिश करता था
तब ही तो बिदा होने पे
सच का मैं खिजा हुआ था
गुस्सा था - तकरार था
प्यार भी था - इकरार भी था
इंतज़ार भी था - आशा भी था
कि क्यों मुझे अकेला छोड़ दिए
अपने साथ क्यों नहीं लिए :) ;)
इसमें तुम क्या छुपाते हो
इससे तुम क्यों घबराते हो
ऐसा तो सब करते हैं
हंसी - मजे के लिए तो करते हैं
ये भी एक ठिठोली है
केवल सभ्य जगह में अविद्या है
इसीलिए तो बिदा होने समय
मैं युहीं खामोश रहा
आश्चर्य में रहा
पर नियति समझ कि
तुम नहीं समझे हमें
मैं ही चुपचाप रहा.
इसलिए तो तुमसे
हमें इतना प्यार हुआ
और तुमसे दूर नहीं समझा
तितलियों का रंग दिया
मृगनयनी का नाम दिया
सचमुच तुम अलबेले हो
दिल से खिले-खिले हो
इसलिए तो तुम इतना करीब लगते
पर तुम हमें बहुत दूर का समझते
मैं जोर नहीं दे सकता
क्योंकि ज्ञान से बंधा हूँ
वरना हकीकत में तुम
मेरे दिल का आइना हो .
कभी पलट के देखोगे मुझे - मैं वहीँ खड़ा मिलूंगा
मृगनयनी के आँखों में तुरंत मेरा चेहरा तुम्हें मिलेगा
मतलब ख़बरदार का
मैं झूठमूठ परेशान रहा
अरे ये तो मै पहले से जानता था
पर बचकानी हरकत समझ
अन्य बातें समझाने जैसा
ये भी समझाने की कोशिश करता था
तब ही तो बिदा होने पे
सच का मैं खिजा हुआ था
गुस्सा था - तकरार था
प्यार भी था - इकरार भी था
इंतज़ार भी था - आशा भी था
कि क्यों मुझे अकेला छोड़ दिए
अपने साथ क्यों नहीं लिए :) ;)
इसमें तुम क्या छुपाते हो
इससे तुम क्यों घबराते हो
ऐसा तो सब करते हैं
हंसी - मजे के लिए तो करते हैं
ये भी एक ठिठोली है
केवल सभ्य जगह में अविद्या है
इसीलिए तो बिदा होने समय
मैं युहीं खामोश रहा
आश्चर्य में रहा
पर नियति समझ कि
तुम नहीं समझे हमें
मैं ही चुपचाप रहा.
इसलिए तो तुमसे
हमें इतना प्यार हुआ
और तुमसे दूर नहीं समझा
तितलियों का रंग दिया
मृगनयनी का नाम दिया
सचमुच तुम अलबेले हो
दिल से खिले-खिले हो
इसलिए तो तुम इतना करीब लगते
पर तुम हमें बहुत दूर का समझते
मैं जोर नहीं दे सकता
क्योंकि ज्ञान से बंधा हूँ
वरना हकीकत में तुम
मेरे दिल का आइना हो .
कभी पलट के देखोगे मुझे - मैं वहीँ खड़ा मिलूंगा
मृगनयनी के आँखों में तुरंत मेरा चेहरा तुम्हें मिलेगा



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