Monday, September 8, 2014

भोली सूरत

उनकी भोली सूरत देखते ही 
प्यार आ जाता था 
मृगनयनी आँखें मटकते ही 
मैं खो जाता था 
उनकी हेलो की आवाज़ से 
वापस लौट आता था 

क्या थी उनकी सूरत 
क्या थी मृगनयनी आँखे 
क्या थी उनकी आवाज़ 
सब थे खोनेवाले 
सब्र तोड़नेवाले  
दिल तक हिलानेवाले 
सोये से जगानेवाले 
शांति देनेवाले 
सुख प्रदान करनेवाले 

सारी इक्छायें ख़त्म हो जाती 
जब उन्हें देखता था 
फिर एक ही इक्ष्छा  होती 
बस उनका साथ 
उनका सांस 
हमदोनो का सांस एक हो 

यह किस्सा कई दिन चला 
कई महीना चला
कई वर्ष चला 
मैं खोता रहा 
वो देखते रहे 
मैं जीता रहा 
वो जिलाते रहे
टूट गया यह सिलसिला एक दिन.

आज न ज़िंदा हूँ, न मरा ही हूँ 
बस उनके याद के सहारे तड़पन में हूँ 
कबतक रहूँगा, जानता नहीं हूँ 
कब वो इनायत करेंगे, वो भी नहीं जानता हूँ 

ना नई तस्वीर दिखाते, ना ही खिड़की खोलते 
मन करता कि अब तो बोलते, अब तो बुलाते 
नयन से नयन लड़ाते, अँखियाँ मिलाते
बात करते-कराते, हाल-चाल पूछते-पुछवाते
आना-जाना शुरू करते और कराते
समय की धारा में एक कदम चलते-चलाते 
कई कदम हैं चलने को-कदम ताल करते-कराते
ताकधिन नाच करते-कराते 
मन बहलाते-बहलवाते
सुखी ज़िन्दगी को हरियाली में लाते 
ये वो भी जानते हैं - वही कुछ हैं कर सकते 
इस दिशा में - वही कुछ हैं कर सकते 
वही कुछ हैं कर सकते
कुछ हैं कर सकते
हैं कर सकते
कर सकते
सकते     ...................   :(     

बुला भी लो अब चाँद को - मुस्कराहट  है जाने वाली 

इतनी भी क्या है नाराज़गी - अब वर्ष भी है आने वाली  !



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