मायुषी में भी तुम साथ होते
ख़ुशी के पल में भी साथ होते
हर-पल तुम साथ होते
कैसे कहूँ कि तुम कब नहीं होते
कल जब मायुष था
तुम ही थे जो मायुषी तोड़े
हकीकत में तो नहीं हो साथ
पर यादों और सपनों में तुम ही तुम हो
कल जब थक कर सोया था
नींद भी नहीं आती थी
पर जब नींद आई
तब तुम आ गए
अपने बालों के साये में
मुझे सुला गए
आलिंगन कर गए
गम दूर कर दिए
कैसे कहूँ कि तुम कुछ नहीं हो
तुम बहुत कुछ हो
तुम सब कुछ हो.
क्यों डरते हो मुझसे
क्यों कतराते हो मुझसे
बहुतेरे अरमान दबे हुए हैं
नहीं किया कोई मिला नहीं
ऐसा नहीं कि तुम कोई ठेकेदार हो मेरे
पर तुम किसी देवी से कम नहीं दीखते
तुम बहुत कुछ हो
तुम सब कुछ हो.
लोग मुझे पागल कहते हैं
पर ज्ञान है मुझे कि मैं क्या हूँ
अगर मैं पागल होता
तो अबतक सरफिरा रहता
तुम्हे कष्ट देता - परेशान करता
अपने कष्ट लेता - परेशान रहता
मुझे पूरा ज्ञान है - पूरा भान है कि
तुम अप्सरा भी नहीं हो
तुम नारी भी नहीं हो
तुम कोई अवतार हो.
ख़ुशी के पल में भी साथ होते
हर-पल तुम साथ होते
कैसे कहूँ कि तुम कब नहीं होते
कल जब मायुष था
तुम ही थे जो मायुषी तोड़े
हकीकत में तो नहीं हो साथ
पर यादों और सपनों में तुम ही तुम हो
कल जब थक कर सोया था
नींद भी नहीं आती थी
पर जब नींद आई
तब तुम आ गए
अपने बालों के साये में
मुझे सुला गए
आलिंगन कर गए
गम दूर कर दिए
कैसे कहूँ कि तुम कुछ नहीं हो
तुम बहुत कुछ हो
तुम सब कुछ हो.
क्यों डरते हो मुझसे
क्यों कतराते हो मुझसे
बहुतेरे अरमान दबे हुए हैं
नहीं किया कोई मिला नहीं
ऐसा नहीं कि तुम कोई ठेकेदार हो मेरे
पर तुम किसी देवी से कम नहीं दीखते
तुम बहुत कुछ हो
तुम सब कुछ हो.
पर ज्ञान है मुझे कि मैं क्या हूँ
अगर मैं पागल होता
तो अबतक सरफिरा रहता
तुम्हे कष्ट देता - परेशान करता
अपने कष्ट लेता - परेशान रहता
मुझे पूरा ज्ञान है - पूरा भान है कि
तुम अप्सरा भी नहीं हो
तुम नारी भी नहीं हो
तुम कोई अवतार हो.
एक शेर -
दूर रह भी नहीं सकता
पास जा भी नहीं सकता
अजब कसम-कस ज़िन्दगी है
ओ खुदा - या तो उठा ले - या पर्दा हटा दे.
अगर उनकी मृगनयनी सी कोई तस्वीर दिखती
तो कल की मायुषी नई कविता से निकलती
कैसे भेजूं सन्देश - वो दूर के मुसाफिर
अगर इनायत करते - जीवन की गाड़ी तो चलती

No comments:
Post a Comment