Friday, September 5, 2014

कितना अच्छा ग़ज़ल है

कितना अच्छा ग़ज़ल है 
आज तुम पे प्यार आया है 
सही में, आज तुम पे प्यार आया है 
दिल पुकार रहा है,प्यार आया है 

आज दिल में तेरे लिए प्यार आया है, 
दुलार आया है , लार आया है 
दिल करता है उड़ के आऊँ
तुझे गले लगाऊँ और बात करूँ 

आज तुमपे प्यार आया है 
तुम करो ना करो, मुझे आया है 
आज तुमपे बहुत प्यार आया है 
तुम कहो ना कहो,ये दिल कहता है 

पता नहीं क्यों मुझे प्यार हो गया
तेरे गुरुर से, तेरे गुस्से से, तेरे नफरत से 
जो सिर्फ मेरे लिए था, मेरे हिस्से में था 
जिसे अपना लिया अपना समझ के इसे 

तुम बहुत जहीन हो, तुलना नहीं किसी से 
क्यों तुम्हें ज़रुरत है सामने आने की 
राधा-कृष्णा की तरह दूर से ही कर सकते
प्यार-तकरार-दिल-की-बात अपनों की 

समय होंगे-तो मिलेंगे-जब मिलेंगे-तो खिलेंगे
ना मिले तो क्या हुआ- वही तो तुम चाहते थे 
ना भी खिले तो क्या हुआ-दुरी ही तुम चाहते थे
वैसे भी आत्मिक भाव में रहना अच्छा है 

तुझसे इल्तज़ा किया था कि तस्वीर लगाओ 
जिसे देख-मैं खो जाऊँ मृगनयनी आँखों में 
पर तूने वो भी नहीं किया, खिड़की भी नहीं खोले 
फिर कैसे खोएं हमदोनों - बातो-बातो में 


इल्तज़ा तूने पूरा नहीं किया,पर सपने ने किया 
देखा तुझे - कल रात के सुबह के सपने में 
भींगे बालो में, लहराते हुए मुड़े बालों में
मुस्कुराते हुए- जोड़-तोड़ करते खयालो में 

आज दिल में तेरे लिए प्यार आया है, 
दुलार आया है , लार आया है 
दिल करता है उड़ के आऊँ
तुझे गले लगाऊँ और बात करूँ 



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