Saturday, September 13, 2014

प्रेम भी है पानी जैसा

कितनी अच्छी व्यवस्था है 
पानी का कल-कल बहना 
प्रेम भी है पानी जैसा 
पल-पल दिल में धड़कना  

क्यों आ जाते आँसू 
सोचते ही तेरा नाम 
कैसा है तुझसे नाता 
थकते नहीं लेते नाम 

तुम हो चाँद, तुम हो बहार 
थिरक-थिरक देते फुहार 
करतब तेरे बहुत निराले 
दिल करता गले लगा ले 

कितना भी सोच में रहता 
कितना भी शोक में रहता 
तेरा ध्यान आते ही चेहरे पे 
मुस्कान अपनेआप छा जाता 

कैसे बोलूं - घटाओं को 
कि मत बरसो - तुम हो नहीं
क्या दृश्य दिख गया उसदिन 
प्यार दोगे या सजा,पता नहीं 

दिल कहता धड़क-धड़क
तुझसे फरियाद करने का 
एक बार नहीं,बल्कि कई बार
है तेरे साथ मुझे भींगने का 

क्या तुमने कभी सोचा था ऐसा
क्या तुमने अनुमान किया था 
जान-बुझ कर दिल खामोश हो 
देखने को जुर्रत किया करता था

कुछ भी कहो,तुम नायब हो 
अनूठे हो,अलबेले हो,जहीन हो
ठक-ठक करते जब चलते थे 
ऐसा लगता-जमीन चूमता हो 

दिल तो मेरा भी करता था 
तुम्हें चूमने का,आलिंगन का
तुझे गुदगुदी लगाने का 
हरवक्त देखते रहने का 

तुम आ जाओ जीवन में 
मेरे लिए सचमुच "तुम" हो 
नाप लेंगे हमदोनों एक दिन 
सूरज कितना भी दूर हो 

तुम्हें भी जरूर डर लगता है 
जीवन के उथल-पुथल देख के
अगर ऐसा हुआ होता तो 
हेमा नहीं बनी होती धर्म के 

कुछ भी करने से पहले मैं 
बहुत सोचता रहता था 
मैं पूर्ण हूँ नहीं,पहले हो लूँ 
अवसर निकल जाता था 

दुनिया को देखा, लोग देखे 
पूर्णता का कोई माप नहीं 
देखा-जो भी पहुंचे सफलता पे 
सब शुरू किये,रुके कोई नहीं 

असफलता को देखा गौर से  
पाया-मैं पूर्ण हूँ,बस किया नहीं 
तुम्हें देख - अपने अंदर देखा 
तो पाया-मैं शुरू ही किया नहीं 

नहीं कहता-छोड़ दो अपना जीवन 
तुम भी अपना जीवन चलते रहो
जैसे तुम चलते औरों के साथ 
वैसा ही हमदोनों साथ चलते रहो

कट जायेंगे जीवन के रस्ते 
जैसे नीलगगन में तारे हो 
कर्म हमारा रास्ता रहेगा  
धर्म हमेशा हमारा साथ हो 

लिखने को दिल करता है 
प्यार के कुछ मधुर गीत 
दोनों के दिल के धड़कन
बनता हो मधुर संगीत 

एक बार बस हेलो सुना दो 
खो जाने दो उस गहराई में 
जहाँ से निकलेगा मधुर तान
जिसे तुम भी सुनोगे कान में  :)


No comments:

Post a Comment