Saturday, September 20, 2014

कुछ शेर

कुछ शेर --

सपने टूटते हैं 
क्योंकि हक़ीक़त नहीं हुआ करते 
नींद से जागते हैं 
क्योंकि हमेशा सोया नहीं करते 

किसी को कोई मतलब नहीं इस जहान में 
कि आपके लिए आये आगे बढ़कर 
आप ही जबतक आगे बढ़ते रहे 
दूसरा भी आता है-साथ देने या बाधा बनकर

एक दिन मैं भी इसी तरह धुआं बन जाऊंगा 
जैसे एक दिन तो बनना ही है सारे लोगो को 

तुम होते कौन हो पूछने वाले कि मैं जीता हूँ या मरता हूँ 
तुम भी तो अपने में मस्त हो-कि जिन्दा भी रखते और मारते भी हो 

तुम होते तो बहुत हो पूछने वाले कि मैं जिन्दा हूँ या मर गया हूँ 

पर पता नहीं-क्यों खामोश हो-पर तुम ऐसा क्यों करते हो 

तुम मेरी गुनाह का नाम तो दो कम से कम
ताकि जियूं या मरूं-पर तड़पते हए तो ना निकले दम

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