एक तितली की कहानी - मेरी जुबानी
==============================
तितलियों सी उड़-उड़ आते हो
रंग-बिरंगी छटा फैलाते हो
इधर-उधर फुदकते हो
इशारों से कुछ-कुछ कहते हो
दोस्ती का हाथ बढ़ाते हो
मटक-मटक करतब दिखाते हो
रंग-बिरंगी कहानी बनाते हो
शेरो-शायरी के लहजे में कहते हो
मैं लालची हूँ ऐसा भी कहते हो
फिर कभी अपने तड़पने की बात करते हो
कभी मेरे तड़प पे दुःख जताते हो
कभी मेरे मरण पे हंसी मनाते हो
कभी मेरे को गिनती नहीं करते हो
कभी हँसते हुए खिलखिलाते हो
कभी बात करने को कहते हो
कभी मिलने की बात करते हो
जब हाथ बढ़ाता बात करने को
बात करने से कतराते हो
पता नहीं किस-किस लहजे में
सावधान होने की भी धमकी देते हो
नहीं पूछूंगा-ऐसा क्यों करते हो
जो भी करते हो - अच्छा करते हो
कितना वक़्त हमपे जाया करते हो
कितना मेरी ध्यान रखते हो
कौन तुझे कहता कि तुम अच्छे नहीं हो
क्यों तुम ऐसा सोच रहे हो
कि तुम अच्छे नहीं हो
मुझे तकलीफ दिए हो
कितना तुम सोचते हो
फिर बात क्यों नहीं करते हो
देखने का मन था-सुनने का दिल था कि
कैसे लिख-के-बात करते हो (चाट)
कैसे आवाज़-बात करते हो (फ़ोन)
कैसे दिल से बात करते हो
कैसे मन से बात करते हो
कैसे उमंग से बात करते हो
कैसे ठुमुक-ठुमक बात करते हो
कैसे चल के बात करते हो
कैसे धीरे-धीरे बात करते हो
इन बातो में ही सब बात हो जाती
तुम्हारे दिन भी कट जाते
मेरे रात भी कट जाते
बची ज़िन्दगी जीना है कैसे
वह सारी बात हो जाती
जो मैं समझ रहा हूँ
जितना जान रहा हूँ
कि मैं तुझसे मिलने को आऊँ
मेरा भी दिल करता है मिलने को
पर दिल नहीं करता
उस जगह जाने को
जहाँ से तुमने विदा किया था
बताओ कोई और जगह
जहाँ मिल सकते हो
बात कर सकते हो
डरना नहीं - तेरे मर्ज़ी वगैर
छुऊँगा भी नहीं - देखूंगा भी नहीं
ऐसा तुम पहले भी देख चुके हो
पर इतना ज़रूर कहूँगा कि
मिलने से पहले बात करो
अब गुस्सा नहीं आता है
अब केवल आसूं आते हैं
जो तेरे प्यार दर्शाने पर
दिल से आसूं निकलते हैं
तेरा एक ये भी रंग लगता है
पचास-रंग के तितलियों में से
एक नया रंग का अदा जुड़ जाता है
कितने रंग हैं तेरे - जितने रंग है तेरे
सीधे तो नहीं - पर परोक्ष से जान गया हूँ
सब का खांका आंक लिया हूँ
क्या क्या रंग तूने दिखाए
सब तो नहीं पर कुछ जान गया हूँ ;)
कभी अगर जानना चाहो तो
तो एक-एक कर दिखा सकता हूँ
इतना तो ज़रूर कह सकता हूँ
तुम हो अलबेले-तुम हो अनमोल
यह तुझे दिल से कहता हूँ
तेरे जैसा नहीं है कोई
तेरे जैसा नहीं मिलेगा किसी को
ऐसा सचमुच कह सकता हूँ
जितने तुम छोटे दीखते हो
उतने ही अंदर से बड़े हो
बड़ो-बड़ो को एक चवन्नी में
खड़े-खड़े बेच सकते हो ;)
यही तेरा गुण तो मैं जानता था
तब ही तो तुम्हें
कभी अपने से अलग नहीं माना
और कितना भी सितम कर ले मुझपे
कभी अलग नहीं मानेगा
चाहे भेज दे कारगाह
या चढ़ा देना सूली पे
हर जगह मैं बोलूंगा
मैं तुमसे प्यार करता हूँ
और करता रहूँगा
तुम करो न करो प्रत्यक्ष में
मैं तेरे संग ही जीता रहूँगा
जैसे जी लेते थे राधा-कृष्णा
मैं भी ऐसे ही जीता रहूँगा
मेरे नसीब में इतना ही प्यार
खुदा ने दिया है
तो तुम कैसे बदल सकते हो
तुम कैसे मुझे ज्यादा दे सकते हो
इसमें मैं ज्यादा जोर नहीं दे सकता
क्योंकि पहले भी जोर दे चूका हूँ
कहाँ की बात कहाँ तुम ले गए
उसमे मैं तड़प चूका हूँ - मर चूका हूँ
मैं कई बार जीते जी मर चूका हूँ
अब मरने में कोई तकलीफ नहीं होगी
क्योंकि क्या होता है तेरे बिना मरना
कोई हमसे सीखे - कोई हमसे जाने
कि क्या होता है तेरे बिना जीना
इस जन्म में तो तू कसम खा रखे हो
कि तुझे मैं पाने के क़ाबिल नहीं
अगले जन्म के लिए मैंने खुदा से कह रखा है
देना तो तुम्हें देना,वरना अगला जन्म देना नहीं
निष्कर्ष -
अब छोडो- ऊपर की बातें
बहुत हो गया - छुप छुप के दाव खेलना
मुझे गुस्सा में गाली देना
फिर दुलार करना - दूर से ही प्यार करना
सहारा देना - जीना सिखाना
नानी और दादी की तरह समझाना
सचमुच दिल करता है
कि अभी तुमसे बात करूँ
अब तुम्हीं बात करोगे
तब ही करूँगा
जब तुम कहोगे
तब ही मिलूंगा :)
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तितलियों सी उड़-उड़ आते हो
रंग-बिरंगी छटा फैलाते हो
इधर-उधर फुदकते हो
इशारों से कुछ-कुछ कहते हो
दोस्ती का हाथ बढ़ाते हो
मटक-मटक करतब दिखाते हो
रंग-बिरंगी कहानी बनाते हो
शेरो-शायरी के लहजे में कहते हो
मैं लालची हूँ ऐसा भी कहते हो
फिर कभी अपने तड़पने की बात करते हो
कभी मेरे तड़प पे दुःख जताते हो
कभी मेरे मरण पे हंसी मनाते हो
कभी मेरे को गिनती नहीं करते हो
कभी हँसते हुए खिलखिलाते हो
कभी बात करने को कहते हो
कभी मिलने की बात करते हो
जब हाथ बढ़ाता बात करने को
बात करने से कतराते हो
पता नहीं किस-किस लहजे में
सावधान होने की भी धमकी देते हो
नहीं पूछूंगा-ऐसा क्यों करते हो
जो भी करते हो - अच्छा करते हो
कितना वक़्त हमपे जाया करते हो
कितना मेरी ध्यान रखते हो
कौन तुझे कहता कि तुम अच्छे नहीं हो
क्यों तुम ऐसा सोच रहे हो
कि तुम अच्छे नहीं हो
मुझे तकलीफ दिए हो
कितना तुम सोचते हो
फिर बात क्यों नहीं करते हो
देखने का मन था-सुनने का दिल था कि
कैसे लिख-के-बात करते हो (चाट)
कैसे आवाज़-बात करते हो (फ़ोन)
कैसे दिल से बात करते हो
कैसे मन से बात करते हो
कैसे उमंग से बात करते हो
कैसे ठुमुक-ठुमक बात करते हो
कैसे चल के बात करते हो
कैसे धीरे-धीरे बात करते हो
इन बातो में ही सब बात हो जाती
तुम्हारे दिन भी कट जाते
मेरे रात भी कट जाते
बची ज़िन्दगी जीना है कैसे
वह सारी बात हो जाती
जो मैं समझ रहा हूँ
जितना जान रहा हूँ
कि मैं तुझसे मिलने को आऊँ
मेरा भी दिल करता है मिलने को
पर दिल नहीं करता
उस जगह जाने को
जहाँ से तुमने विदा किया था
बताओ कोई और जगह
जहाँ मिल सकते हो
बात कर सकते हो
डरना नहीं - तेरे मर्ज़ी वगैर
छुऊँगा भी नहीं - देखूंगा भी नहीं
ऐसा तुम पहले भी देख चुके हो
पर इतना ज़रूर कहूँगा कि
मिलने से पहले बात करो
अब गुस्सा नहीं आता है
अब केवल आसूं आते हैं
जो तेरे प्यार दर्शाने पर
दिल से आसूं निकलते हैं
तेरा एक ये भी रंग लगता है
पचास-रंग के तितलियों में से
एक नया रंग का अदा जुड़ जाता है
कितने रंग हैं तेरे - जितने रंग है तेरे
सीधे तो नहीं - पर परोक्ष से जान गया हूँ
सब का खांका आंक लिया हूँ
क्या क्या रंग तूने दिखाए
सब तो नहीं पर कुछ जान गया हूँ ;)
कभी अगर जानना चाहो तो
तो एक-एक कर दिखा सकता हूँ
इतना तो ज़रूर कह सकता हूँ
तुम हो अलबेले-तुम हो अनमोल
यह तुझे दिल से कहता हूँ
तेरे जैसा नहीं है कोई
तेरे जैसा नहीं मिलेगा किसी को
ऐसा सचमुच कह सकता हूँ
जितने तुम छोटे दीखते हो
उतने ही अंदर से बड़े हो
बड़ो-बड़ो को एक चवन्नी में
खड़े-खड़े बेच सकते हो ;)
यही तेरा गुण तो मैं जानता था
तब ही तो तुम्हें
कभी अपने से अलग नहीं माना
और कितना भी सितम कर ले मुझपे
कभी अलग नहीं मानेगा
चाहे भेज दे कारगाह
या चढ़ा देना सूली पे
हर जगह मैं बोलूंगा
मैं तुमसे प्यार करता हूँ
और करता रहूँगा
तुम करो न करो प्रत्यक्ष में
मैं तेरे संग ही जीता रहूँगा
जैसे जी लेते थे राधा-कृष्णा
मैं भी ऐसे ही जीता रहूँगा
मेरे नसीब में इतना ही प्यार
खुदा ने दिया है
तो तुम कैसे बदल सकते हो
तुम कैसे मुझे ज्यादा दे सकते हो
इसमें मैं ज्यादा जोर नहीं दे सकता
क्योंकि पहले भी जोर दे चूका हूँ
कहाँ की बात कहाँ तुम ले गए
उसमे मैं तड़प चूका हूँ - मर चूका हूँ
मैं कई बार जीते जी मर चूका हूँ
अब मरने में कोई तकलीफ नहीं होगी
क्योंकि क्या होता है तेरे बिना मरना
कोई हमसे सीखे - कोई हमसे जाने
कि क्या होता है तेरे बिना जीना
इस जन्म में तो तू कसम खा रखे हो
कि तुझे मैं पाने के क़ाबिल नहीं
अगले जन्म के लिए मैंने खुदा से कह रखा है
देना तो तुम्हें देना,वरना अगला जन्म देना नहीं
निष्कर्ष -
अब छोडो- ऊपर की बातें
बहुत हो गया - छुप छुप के दाव खेलना
मुझे गुस्सा में गाली देना
फिर दुलार करना - दूर से ही प्यार करना
सहारा देना - जीना सिखाना
नानी और दादी की तरह समझाना
सचमुच दिल करता है
कि अभी तुमसे बात करूँ
अब तुम्हीं बात करोगे
तब ही करूँगा
जब तुम कहोगे
तब ही मिलूंगा :)



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