आनेवाली बिछुड़न की बरषी
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(Anniversary of Separation is just Ahead)
रीत निभा लो - प्रीत निभा लो
बिछुड़न की बरषी मना लो
बस है आने वाले
वो दिन काले - काले
प्रीत छूटा प्रीती न छूटी
नींद टुटा सपने ना टूटी
सांस टुटा आस ना टूटी
मैं छूटा वो ना छूटी
रीत निभा लो - प्रीत निभा लो
बिछुड़न की बरषी मना लो
खुशियाँ मनाउ या शोक मनाउ
नहीं पता मैं क्या मनाउ
थे तो ज्ञान के प्याले
पर आशा देकर भी नहीं आये
मेरे मृगनयन अनूठे निराले
पर छद्यम भेष में वे आते रहते
तितली जैसे उड़ते वो निराले
पर सच में - कौन सा रंग है सच्चा
जैसे वे हैं असल में अनुपम-अनूठा सच्चा
रीत निभा लो - प्रीत निभा लो
बिछुड़न की बरषी मना लो
कान तरस गए सुनने को
आँख तरस गए देखने को
मुँह सूख गए बोलने को
मन तड़प गए मिलने को
दिल तरस गए आलिंगन को
तन तरस गए छूने को
आत्मा तरस गए आत्म-तत्व पाने को
रीत निभा लो - प्रीत निभा लो
बिछुड़न की बरषी मना लो
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(Anniversary of Separation is just Ahead)
रीत निभा लो - प्रीत निभा लो
बिछुड़न की बरषी मना लो
बस है आने वाले
वो दिन काले - काले
प्रीत छूटा प्रीती न छूटी
नींद टुटा सपने ना टूटी
सांस टुटा आस ना टूटी
मैं छूटा वो ना छूटी
रीत निभा लो - प्रीत निभा लो
बिछुड़न की बरषी मना लो
खुशियाँ मनाउ या शोक मनाउ
नहीं पता मैं क्या मनाउ
थे तो ज्ञान के प्याले
पर आशा देकर भी नहीं आये
मेरे मृगनयन अनूठे निराले
पर छद्यम भेष में वे आते रहते
तितली जैसे उड़ते वो निराले
पर सच में - कौन सा रंग है सच्चा
जैसे वे हैं असल में अनुपम-अनूठा सच्चा
रीत निभा लो - प्रीत निभा लो
बिछुड़न की बरषी मना लो
कान तरस गए सुनने को
आँख तरस गए देखने को
मुँह सूख गए बोलने को
मन तड़प गए मिलने को
दिल तरस गए आलिंगन को
तन तरस गए छूने को
आत्मा तरस गए आत्म-तत्व पाने को
रीत निभा लो - प्रीत निभा लो
बिछुड़न की बरषी मना लो


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