Thursday, November 12, 2015

दीप जलाओ प्यार से

अरी नटखट सी गोरी 
कहाँ छुपे तुम संसार में 
दीपों की श्रृंखला सजी 
एक दीप जलाओ प्यार में 

लाल रंगीली चुनरी में 
लागे तुम कातिल सी 
कजरारी नयनों से 
घायल करे माहिर सी 

अरी नटखट वावरी- दिखा 
कैसे तीर चलाये मुस्कान से 
देखने को तरसे तेरी बतीसी
हँसे जो तू खिलखिलाहट से 

बूटों की खटखट नजाकत से निकलते 
सुनने को मेरे कान सचमुच को तरसे 
सुना नहीं कबसे तूने सुनाया नहीं जबसे 
सुना भी दे वो गोरी आस में बैठा अरसे 

अरी धीर-गंभीर गोरी 
कैसे बैठे तुम नजाकत से  
रंगों की रंगोली बनाकर 
दो दीप जलाओ प्यार से  

अरी नटखट सी गोरी 
कहाँ छुपे तुम संसार में 
दीपों की श्रृंखला सजी 
एक दीप जलाओ प्यार में 










क्यों चीत्कार है


एक दार्शनिक ने बड़ा अच्छा विचार किया था ....

अरे कोई नहीं कुछ भुला
सबने ही कुछ नया किया
जीवन है बड़ा ही अनुपम
सबने कुछ प्रयोग किया 

एक धर्म एक राग एक रंग
सबने ही परित्याग किया 
विभिन्न रंगों को प्रश्रय दे
सबने ही अनुराग किया 

फिर क्यों यह चीत्कार उठा
क्यों रंगों का तिरस्कार उठा
सब के रंग हैं अद्भुत अनुपम 
फिर क्यों यह वैराग्य उठा 

बस ज्ञान लाओ प्रकाश लाओ
संग संग रहने का विचार लाओ
कण कण बना है उसी खुदा से
बस थोडा सा सामन्जस्य लाओ

हरतरफ शांति ही शांति है 
मन को थोडा तो शांत करो 
रूह केवल बोलने से नहीं 
रूह का रूह से अनुभव करो 

रूह ही निज है रूह ही सत्य है
उस सत्य का अवलोकन करो
ज्ञान पिपासा दिल से जगाकर
जग में सब के संग विचरण करो 

कोई नहीं मरता-मरता ये तन है 
रूह ही हम है रूह ही तुम है 
क्यों जीते जी मारता इस रूह को
रूह ज्ञान से रूही को पा लेता है 

कोई नहीं कुछ भुला है 
सबने ही कुछ नया किया है 
जीवन बड़ा ही अनुपम है 
सबने ही कुछ प्रयोग किया है 

बस एक जगह बैठकर विचार करो
क्या लाना है बैठकर अनुशंसा करो 
हर एक उसी खुदा का अंश है अंग है
एक मत से एक मत को स्वीकार करो !

Tuesday, November 10, 2015

दीप जलाओ खुशियाँ लाओ

दीप जलाओ दीप जलाओ दीप जलाओ रे
आओ सब मिल कर गाओ दीप जलाओ रे

मन के अंधियारे को भगाओ मन जगाओ रे 
हर्षित मन से स्फूर्ति लाओ दीप जलाओ रे 

दीप जलाओ दीप जलाओ उजाला लाओ रे
मिलजुल के खुशियाँ मनाओ दीप जलाओ रे 

राम के वन से लौटने का खुशियाँ मनाओ रे 
आर्यावर्त में राम राज्य लौटा दीप जलाओ रे

राम नाम के गुण गाओ राम को भज लो रे 
सीता राम जय हनुमान राम को भज लो रे 

दीप जलाओ उजाला लाओ मीठा खाओ रे
हिल मिल के खुशियाँ बाटों आज दीवाली रे 

देख लो आसपास कोई रूठा ना हो बैठा रे 
एक दीप नयन में सजा कर ज्योत लाओ रे 

दीप जलाओ दीप जलाओ दीप जलाओ रे
दीपों की माला सजाकर दिल से गाओ रे 

रंगोली को बनाती रमणी मृगनयनी बनी रे 
यादों के संग याद कर लो आज दीवाली रे 

दीप जलाओ दीप जलाओ दीप जलाओ रे
आओ सब मिल कर गाओ दीप जलाओ रे