Thursday, November 12, 2015

दीप जलाओ प्यार से

अरी नटखट सी गोरी 
कहाँ छुपे तुम संसार में 
दीपों की श्रृंखला सजी 
एक दीप जलाओ प्यार में 

लाल रंगीली चुनरी में 
लागे तुम कातिल सी 
कजरारी नयनों से 
घायल करे माहिर सी 

अरी नटखट वावरी- दिखा 
कैसे तीर चलाये मुस्कान से 
देखने को तरसे तेरी बतीसी
हँसे जो तू खिलखिलाहट से 

बूटों की खटखट नजाकत से निकलते 
सुनने को मेरे कान सचमुच को तरसे 
सुना नहीं कबसे तूने सुनाया नहीं जबसे 
सुना भी दे वो गोरी आस में बैठा अरसे 

अरी धीर-गंभीर गोरी 
कैसे बैठे तुम नजाकत से  
रंगों की रंगोली बनाकर 
दो दीप जलाओ प्यार से  

अरी नटखट सी गोरी 
कहाँ छुपे तुम संसार में 
दीपों की श्रृंखला सजी 
एक दीप जलाओ प्यार में 










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